-दीपक रंजन दास
साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी युवाओं को साधने की तैयारी कर रही है। इसके लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा को काम पर लगाया गया है। प्रदेश के पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या एक करोड़ 94 लाख 54 हजार से कुछ ज्यादा है। इनमें से 46 लाख वोटर्स ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 से 29 साल के बीच है। इनमें से लगभग सवा चार लाख मतदाताओं की उम्र 18-19 साल है। ये पहली बार मतदान करेंगे। विधानसभा और लोकसभा के पिछले चुनाव 2018-19 में हुए थे। अर्थात जिनकी उम्र अभी 22-23 साल है वो भी पहली बार मतदान कर रहे होंगे। इसके अलावा एक बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की भी है जो उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर हैं। न तो इनका मतदाता सूची में पंजीयन हुआ है और न ही वो वोट डालने के लिए उपलब्ध रहते हैं। राजनीतिक दलों का फोकस अब इन्हीं युवाओं पर है। पूरी कोशिश है कि इनमें से सभी युवा न केवल मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाएं बल्कि मताधिकार का प्रयोग भी करें। आज और कल अर्थात 19 और 20 अगस्त मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अंतिम तिथि है। 1 अक्टूबर 2023 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले सभी युवा इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। पार्टियों की पूरी कोशिश है कि बूथ स्तर पर उनके कार्यकर्ता ऐसे सभी विद्यार्थियों के सम्पर्क में रहें जो हाल ही में कालेज पहुंचे हैं। इनमें से जो भी विद्यार्थी 1 अक्टूबर 2023 से पहले 18 साल का हो जाएगा, उसका नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए ये युद्धस्तर पर प्रयास करेंगे। इसके बाद शुरू होगी इन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश। दरअसल, यही वह खतरनाक ‘एज-मिक्सÓ है जिसे समझ पाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए कठिन है। 18 से 29 साल के बीच के ये मतदाता सैद्धांतिक तौर पर दो भाग में बंटे हुए हैं। 18 से 25 साल के बीच के युवा अकसर झुण्ड में मतदान करते हैं और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करते हैं। इससे उलट, 25 से 29 के युवाओं की नजर सरकार की योजनाओं पर होती है। ये सभी बेहतर रोजगार की तलाश में होते हैं। यह वह उम्र है जब वो सेटल होने का प्लान बना रहे होते हैं। इनमें जोश कम और होश ज्यादा होता है। भाजयुमो और युवक कांग्रेस जैसे संगठनों से ज्यादा उसे आम आदमी पार्टी की बातें भाती हैं। संख्याबल के हिसाब से देखें तो कुल मतदाताओं में इनकी 25 फीसद की हिस्सेदारी है। पिछले लोकसभा चुनावों तक इस एज ग्रुप के मतदाता साफ तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ थे। पर केन्द्र सरकार की दिल्ली वाली हरकत के बाद स्थिति बदल चुकी है। मणिपुर के हालातों ने ताकतवर केन्द्र और डबल इंजन सरकार की पोल पट्टी खोल दी है। इन्हें रिझाना मुश्किल होगा।
Gustakhi Maaf: अब युवाओं को साधने की तैयारी




