ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: Gustakhi Maaf: 21वीं सदी में कितना बचा है हिन्दुत्व
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhDurg-BhilaiFeatured

Gustakhi Maaf: 21वीं सदी में कितना बचा है हिन्दुत्व

By Om Prakash Verma
Published: February 4, 2023
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

-दीपक रंजन दास
हिन्दुत्व को परिभाषित करने की कोशिश हम नहीं करेंगे. इस शब्द को राजनीति में लाने वाले विनायक दामोदर सावरकर का मानना था कि जो भी राष्ट्र (देश), जाति (नस्ल) और संस्कृति से भारतीय होगा, वही हिन्दू होगा. अर्थात हिन्दुस्तान (भारत) से बाहर जन्म लेने वाले धर्म कभी यहां के नहीं हो सकते. हिन्दू महासभा के इस नेता का मानना था कि हिंदुत्व, हिन्दू धर्म से कहीं ज्यादा है और इस राजनीतिक दर्शन को केवल हिंदू आस्था तक सीमित नहीं किया जा सकता. ऐसा मानने का एक कारण यह भी था कि इस देश के मूल निवासियों की आस्था कभी एक सी रही ही नहीं. भिन्न-भिन्न प्रांतों में खान-पान, पहनावा, संस्कार, उपासना पद्धतियां और मान्यताएं भिन्न-भिन्न थीं. जहां तक देश या राष्ट्र का सवाल है, यहां के सभी मतांतरित, चाहे वह ईसाई हों या मुसलमान, सभी इसी देश में पैदा हुए हैं. आस्था बदलने से किसी की नस्ल नहीं बदल जाती. नस्ल एक वैज्ञानिक कसौटी है जो आस्था को किसी खातिर में नहीं लाता. बची संस्कृति, तो वह अवश्य खतरे में हैं. ग्लोबल इंडिया में सनातन संस्कृति का उत्सव तो हो सकता है पर लोगों की फितरत नहीं बदली जा सकती. खास दिनों पर केक काटकर डीजे की धुन पर नाचने वाली जमात से उस हिन्दुत्व की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, जो सावरकर के खयालों में थी. संघ की तमाम शाखाएं और वहां जाने वाले लोग भी केक कटिंग को नहीं रोक पाए हैं. आज खान-पान से लेकर पहरावे तक पर वैश्वीकरण की छाप है. विकास की अवधारणा भी पश्चिम पर टिकी हुई है. चौड़ी सड़कें, महंगी तेज रफ्तार कारें, बुलेट ट्रेन, फ्लाईओवर और आलीशान ड्राइंगरूम-बाथरूम वाले मकान एक नई संस्कृति को जन्म दे चुके हैं. और हम जानते हैं कि जिसका जन्म हो चुका है, उसे पलटा नहीं जा सकता. मूल सनातन में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है. इनमें गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, मुंडन, कर्णवेधन, विद्यारंभ, उपनयन, वेदारंभ, केशांत, सम्वर्तन, विवाह और अन्त्येष्टि संस्कार. इनमें से कितने संस्कार आज जीवित हैं? नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, विवाह और अंत्येष्टि संस्कारों का पालन प्रायः सभी करते हैं. हालांकि इनका स्वरूप बिगड़ चुका है. बहुत कम घरों में नामकरण राशि के आधार पर पंडित करते हैं. जातकर्म और उपनयन संस्कार कुछ ब्राह्मण परिवारों में आज भी होता है. बंगाल में विद्यारंभ संस्कार का चलन है. शेष संस्कारों के बारे में अधिकांश लोगों को कुछ नहीं पता. विवाह संस्कारों में आमूलचूल परिवर्तन हो चुका है. प्री वेडिंग फोटोशूट, विवाह से पहले रिसेप्शन नए दौर का दस्तूर है. लिव-इन भी जोर पकड़ रहा है. कर्णवेधन अब या तो होता ही नहीं या फिर इतना होता है कि छेद गिनते रह जाओगे. ऐसे में सवाल उठता है कि जब संस्कार, संस्कृति कोई मुद्दा नहीं रही, नस्ल और देश अप्रभावित है तो हम क्या तलाश रहे हैं? दरअसल, हम सत्ता तक पहुंचने का और वहां काबिज रहने का एक सुगम मार्ग मात्र तलाश रहे हैं.

कोविड-19 के बावजूद दूरस्थ अंचलों तक शिक्षा: राजनांदगांव में हो रहे स्कूल शिक्षा के नवाचार को भारत सरकार के नीति आयोग ने सराहा
बिहार में चुनाव से पहले महागठबंधन को झटका: जीतनराम मांझी कल एनडीए में होंगे शामिल… यह वजह आई सामने
मानसून सत्र: लोकसभा में हंगामे पर बोले पीएम मोदी- दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को मंत्री नहीं देखना चाहता विपक्ष
Breaking News : कटघोरा वनमंडल के रेंजर देवदत्त खाण्डे सस्पेंड, वन्यजीवों के शिकार और अपराध रोकने में रहे नाकाम
OMG! BEO की फटकार सुनकर महिला टीचर हो गई बेहोश, बैठक में मच गया हड़कंप, पानी लेकर दौड़े साथी कर्मी
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article जानिए पूरी दुनिया के लिए कैसे खतरा बन सकता है चीन का यह हथियार! इंटरनेट नेटवर्क से है नाता जानिए पूरी दुनिया के लिए कैसे खतरा बन सकता है चीन का यह हथियार! इंटरनेट नेटवर्क से है नाता
Next Article CG Big News : मछली मारने गए ग्रामीण पर बाघ ने हमला कर उतारा मौत के घाट, दहशत में लोग

Ro. No.-13759/19

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?