ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: Gustakhi Maaf: विश्वगुरू भारत में गुरूपूर्णिमा का पर्व
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhDurg-BhilaiFeatured

Gustakhi Maaf: विश्वगुरू भारत में गुरूपूर्णिमा का पर्व

By Om Prakash Verma
Published: July 4, 2023
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

-दीपक रंजन दास
सोमवार को भारत में गुरूपूर्णिमा का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों, व्याख्याताओं और प्राध्यापकों का आशीर्वाद लिया। अधिकांश शिक्षकों ने विद्यार्थियों के सिर पर अपना हाथ रखना तक जरूरी नहीं समझा। भारतीय समाज में यह कोई रातोंरात हुआ परिवर्तन नहीं है। सृष्टि के आरंभ में ही इसकी भी नींव रखी जा चुकी थी। इस अवसर पर एक श्लोक का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है-
गुरूब्र्रह्मा गुरूर्विष्णु: गुरूर्देवो महेश्वर:।
गुरूर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:।।
अर्थात गुरू ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव हैं। गुरू ही साक्षात् आदिब्रह्म हैं। इसी रूप में गुरू को सम्मान देते हुए उन्हें प्रणाम किया जाता है। यह मंत्र स्कंदपुराण से लिया गया है। सतयुग में यही स्थिति थी। गुरू ही सकल ज्ञान के एकमात्र स्रोत थे। युग बदलते गए और गुरू की परिभाषा और भूमिका भी बदलती गई। त्रेतायुग में गुरू ऋषि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को उनके पिता राजा दशरथ से मांग कर ले जाते हैं। प्रभु श्रीराम उन राक्षसों का संहार करने में सफल होते हैं जो यज्ञादि में विघ्न डाला करते थे। गुरू अपने शिष्य की क्षमताओं को जानते थे। इसी युग में मरणासन्न रावण से ज्ञान प्राप्त करने का अवसर भी प्रभु श्रीराम जाया नहीं करते। द्वापर के आते-आते गुरू की स्थिति काफी बदल जाती है। श्रीकृष्ण अर्जुन के मित्र थे पर उनका स्थान गुरू का था। सम्पूर्ण महाभारत के दौरान वे अर्जुन के गुरू की भूमिका में रहे। इसी युद्ध में दुनिया को कर्मयोग का सिद्धांत देने वाले गीता का जन्म हुआ। द्वापर में हम यह भी देखते हैं कि गुरू अपने शिष्यों की जिद पूरी करने के लिए अस्त्र-शस्त्र उठाते हैं और अधर्म के पक्ष में युद्ध करने के लिए विवश हो जाते हैं। गुरू की यह बदली हुई भूमिका कौरवों के समूलनाश का कारण बनती है। अब तो कलयुग चल रहा है। न तो माता-पिता को और न ही शिक्षक को इस बात का कोई आभास है कि उनका शिष्य ज्ञान कहां से प्राप्त कर रहा है। चेला ग्राहक और गुरू व्यापारी है। बस उपभोक्ता फोरम जाना बचा है। बहरहाल, गुरूपूर्णिमा पर जिस श्लोक का इन दिनों बहुतायत में प्रयोग हो रहा है वह स्वयं भी एक अपभ्रंश है। मूल श्लोक में संस्कृत व्याकरण के नियमों के अनुसार छंदों में गुरु: और ब्रह्म, गुरु: विष्णु, का युग्म रूप प्रयोग किया जाता है। विसर्ग संधि रूप में ‘रÓ का उच्चारण प्राप्त करता है। अर्थात अलग-अलग बोलने पर गुरू: विष्णु और साथ-साथ उच्चारण करने पर गुरुर्विष्णु। पर अब एक नये शब्द का जन्म हो चुका है। गुरुर विष्णु। गुरुर कोई शब्द ही नहीं है। गुरूर फारसी शब्द है जो संभवत: मंगोल से आया है। इसका अर्थ अभिमान, अहंकार या घमण्ड है। इस शब्द का इस मंत्र में कोई स्थान नहीं हो सकता। ‘निंदक नियरे राखिए…Ó का दौर भी चला गया। गुरू हमेशा मीठा ही बोलेगा, यह जरूरी नहीं। इसलिए चमचों की चांदी है।

सूअर का शिकार करने लगाया जाल, लेकिन तेंदुए की फंसकर हुई मौत, दो आरोपी गिरफ्तार
अंतागढ़ के पूर्व भाजपा विधायक भोजराज नाग को जान से मारने की धमकी, नक्सलियों ने पर्चा जारी कर लगाए यह आरोप
कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बेसहारा बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा की योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के कलेक्टर ने दिए निर्देश
VIP जिले का सरकारी अस्पताल का हाल देख भड़के कलेक्टर, गैरहाजिर Doctor की कटेगी पगार
महतारी वंदन के पैसों का कर रहीं म्यूच्युअल फंड में निवेश, बच्चों की शिक्षा में करेंगी खर्च
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article CG Crime : राजधानी में युवक की चाकू गोदकर हत्या, पड़ोसी ने पुरानी रंजिश में दिया वारदात को अंजाम
Next Article ग्रामीण की हत्या : एक सप्ताह बाद नक्सलियों ने बैनर लगाकर ली जिम्मेदारी, कहा पुलिस को देता था सूचना

Ro.No.-13672/51

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?