-दीपक रंजन दास
22 अप्रैल को पहलगाम में उकसाने वाली आतंकी गतिविधि के बाद से ही भारत आतंक के आका पाकिस्तान को एक के बाद एक सख्त संदेश दे रहा था। पर लगता है पाकिस्तान इसे हलके में ले रहा था। उसे यकीन था कि जैसे ही हालात खतरनाक स्तर पर पहुंचेंगे कोई न कोई बड़ा भाई बनकर बीच में आ जाएगा और उसकी जानबख्शी हो जाएगी। पहलगाम हमले के तत्काल बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। इसके बाद उसने वीजा रद्द करने, पाकिस्तानियों को तत्काल वापस भेजने जैसे कड़े कदम उठाए। 6-7 मई की आधी रात को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लांच कर दिया। आधे घंटे से भी कम समय में भारत ने पाकिस्तान में बने 9 आतंकी ठिकानों और उनके मुख्यालयों को उड़ा दिया। 8 मई को पाकिस्तानी सेना ने भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले शुरू कर दिये पर भारतीय रक्षा प्रणाली के चलते उसका कोई ड्रोन, कोई मिसाइल भारत नहीं पहुंच पाया। इसके साथ ही युद्ध शुरू हो गया। इसके बाद भारत ने चुन-चुन कर पाकिस्तान पर ऐसे-ऐसे चोट किये कि उसकी हालत खराब हो गई। देश को लगा कि बस अब पाकिस्तान का नामोनिशान मिटने वाला है। कम से कम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को तो अब भारत वापस ले ही लेगा। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी भावनाएं व्यक्त होने लगीं। पर युद्ध युद्ध होता है। यह किसी का शौक नहीं होता। 10 मई को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति बन गई। पर इससे पहले भारत ने कई मामलों में इस युद्ध को जीत लिया था। दरअसल, भारतीय नेतृत्व स्वयं भी युद्ध नहीं चाहता था पर वह दुनिया को यह बता देना चाहता था कि भारत अब आतंक को बर्दाश्त नहीं करने वाला। उसे परवाह नहीं कि दुश्मन के पास न्यूक्लियर हथियार हैं। वह हर स्थिति का मुकाबला करने के लिए समर्थ है। पाकिस्तान की सत्ता और आतंकियों के बीच के संबंध को उसने दुनिया के सामने उजागर कर दिया। 90 घंटे के इस संघर्ष ने स्थाई दोस्त और स्ट्रैटेजिक दुश्मनों की स्थिति भी स्पष्ट कर दी। एक बात साफ हो गई कि तुर्की हर हाल में पाकिस्तान का साथ देगा। अमेरिका मुंह से चाहे जो कहे वह भी आतंक और युद्ध के साथ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तमाम सबूतों के बाद भी पाकिस्तान को बेचारा मानेगा और उसे नए ऋण देगा। अकेला रूस ही है जो हमेशा भारत के साथ रहेगा। भारत सूचना युद्ध में कमजोर है, इसे बेहतर बनाने की जरूरत है। साफ हो गया कि ऐसे मौकों पर बॉलीवुड स्टार और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी चुप रहेंगे। एनआरआई तथा एमएनसी के भारतीय सीईओ भी मुंह में दही जमा लेंगे। काम आएगा केवल आपका इंटेलीजेंस, आपका डिफेंस सिस्टम और आपके जांबाज सिपाही। इसलिए अपने चश्मे का शीशा साफ कर लीजिए, देश के जांबाज सिपाही कोई जमींदारों के लठैत नहीं। उन्हें उनके हिस्से का सम्मान दीजिये।
Gustakhi Maaf: युद्धविराम पर क्या कहता है भारत




