-दीपक रंजन दास
केन्द्र सरकार के मंत्री गिरीराज ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को भारत माता का सपूत कहा है। कांग्रेस ने इसका जवाब भी दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि गोडसे का महिमा मंडन करके गिरीराज ने देश-दुनिया के उन करोड़ों लोगों का अपमान किया है जो गांधी को मानते हैं। यह केवल वाकयुद्ध नहीं है। आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसे निर्णय करना है कि वो किस तरह के लोगों को आगे बढ़ाना चाहती है। देश के विभाजन को मुद्दा बनाकर क्या आजादी के ७६ साल बाद भी राजनीति की जा सकती है? वैसे भी दो राष्ट्र के सिद्धांत की जनक स्वयं हिन्दू महासभा या आज की आरएसएस है। पर इस बहस का आज कोई मतलब नहीं है। भारत को आज इस बात का फैसला करना है कि वह नफरत की आड़ से हो रही गंदी राजनीति का साथ देना चाहती है या उस भारत पर यकीन करना चाहती है जिसे वह आज तक स्वयं देखती आ रही है, महसूस करती आ रही है। जिस भारत में गांव से शहर आए लोग उच्च शिक्षित होकर दुनिया भर में अपनी प्रतिभा की धाक जमा रहे हैं। जिस गांधी को भाजपा के पृष्ठपोषक हिकारत की नजर से देखते हैं, उसी गांधी को दुनिया ने नमन किया है। बात चाहे स्वच्छता की हो, रोगी सेवा की हो, अस्पृश्यता उन्मूलन की हो, गांवों को मजबूत करने की हो, ग्रामीण लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की हो या महिला स्व सहायता समूहों के जरिए गरीब परिवारों की आर्थिक और सामाजिक समृद्धि की हो, इन सभी के बीज महात्मा गांधी की सोच में निहित हैं। जब पूरी दुनिया केवल आजादी के लिए छटपटा रही थी तब वो महात्मा गांधी ही थे जिन्होंने देश को जगाने का काम किया था। हिन्दू महासभा या आरएसएस के जागते-जागते तो कई दशक बीत गए। कहते हैं, भरा हुआ पेट भी तमाम विकारों को जन्म देती है। एक तरफ जहां भरा हुआ पेट जरूरी है वहीं भरे पेट वालों को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा देने की भी जरूरत होती है। भारत में इसके कई नजीर मिल जाएंगे। सिख, मारवाड़ी और जैन समाज हिन्दू होते हुए भी गुरू प्रधान है। इनके धार्मिक गुरू इनका रचनात्मक और सकारात्मक मार्गदर्शन करते हैं। गुरू घासीदास को मानने वाले, बौद्ध धर्म को मानने वाले भी इसी रास्ते पर चलते हैं। गायत्री परिवार और ब्रह्मकुमारी आंदोलन भी संयम की राह दिखाते हैं। एकमात्र मनुवादी ही ऐसी किसी सोच से कटे हुए हैं। आज जितने भी देश धर्म के आधार पर पहचाने जाते हैं, उनकी हालत किसी से छिपी हुई नहीं है। राष्ट्र की सबसे छोटी इकाई मनुष्य है। जाहिर है, यदि आप मनुष्यता पर यकीन नहीं करते तो आपसे बड़ा जाहिल कोई नहीं है। कमल कीचड़ में तो गुलाब कांटों में होता है, पर इसके कारण इनका तिरस्कार नहीं किया जा सकता।
Gustakhi Maaf: महात्मा के हत्यारे का महिमामंडन




