-दीपक रंजन दास
नवरात्रि का पर्व चल रहा है। दिन में पूजा और रात को गरबा की धूम है। लोग गरबा गीतों पर झूम रहे हैं, नाच रहे हैं। भक्ति, श्रद्धा और आस्था हो तो भाषा कोई मायने नहीं रखती। छत्तीसगढ़ में फिलहाल चुनावी मौसम भी है। लोग एक अच्छा प्रत्याशी, एक अच्छी पार्टी को चुनने के लिए कमर कस रहे हैं। ऐसे समय में सुदूर आदिवासी अंचल से निकलकर एक महिला का नाम भी सामने आता है। वे एक शिक्षिका हैं पर देश के लिए, देश की भावी पीढ़ी के लिए कुछ करने का उनके पास जो जज्बा है, बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है। जो एक अदद टिकट के लिए घमासान मचाते हैं, अपनी जीत के लिए दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, उन्हें ऐसे लोगों से सीख लेनी चाहिए। वैसे भी, जिनके पास काम होता है, उन्हें औरों की तरफ देखने की फुर्सत ही कहां होती हैं। वे तो कर्मयोगी होते हैं। एक ऐसी ही शिक्षिका है धमतरी जिला अंतर्गत मगरलोड ब्लाक के ग्राम लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू। उन्होंने वनांचल के बच्चों को स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए 10 लाख रुपए का ऋण लिया है। इस रकम से उन्होंने 105 स्कूलों में स्मार्ट टीवी लगवाया है। इसका उपयोग इन बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने, ऑडियो-विजुअल के माध्यम से विज्ञान और भूगोल जैसे विषयों को सरल बनाने के लिए किया जा रहा है। रंजीता की समाजसेवा यहीं तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने आधा एकड़ खेत को तालाब में बदल दिया है ताकि यहां भूजल स्तर सुरक्षित रहे और धरती की नमी बनी रहे। साथ ही उन्होंने लगभग तीन हजार चन्दन के पौधे इन स्कूलों में रोपे हैं। आज के इस युग में ऐसा कौन करता है भला? ऐसे लोगों को समाज पागल की संज्ञा देता है। वैसे छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर ऐसे पागलों की कोई कमी भी नहीं है। अपना सबकुछ- स्कूल, कालेज, मठ और मंदिर को दान कर देने वाले मनीषियों के किस्से यहां आम हैं। कहते हैं, एक नारी शिक्षित होती है तो पूरा समाज शिक्षित होता है। रंजीता इसकी जीवंत मिसाल हैं। उनका विद्यादान और जागरूकता अभियान केवल अध्यापन तक सीमित नहीं है। वे अपने आचरण से भी लोगों को समाज सेवा के लिए, प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं। राजनांदगांव की फुलबासन यादव, गुण्डरदेही की शमशाद बेगम भी ऐसी ही महिलाएं हैं जो अपना पूरा समय महिलाओं की स्थिति सुधारने में लगा रही हैं। वे जानती हैं कि महिला सशक्त होगी तो परिवार मजबूत होगा। परिवार मजबूत होगा तो बच्चे शिक्षित होंगे। बच्चे शिक्षित होंगे तो समाज सुदृढ़ होगा और समाज सुदृढ़ होगा तो देश अपने आप मजबूत हो जाएगा। ये राजनीति से दूर हैं। अपना काम कर रही हैं। देश की सेवा करने के लिए इन्हें किसी भी पार्टी के टिकट की, किसी भी पद की कोई जरूरत नहीं है।





