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Gustakhi Maaf: जिसे वित्तीय सलाहकार बनाना चाहिए था…

By Om Prakash Verma
Published: November 4, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
जब सीने में जलन की भावना हो तो दूसरों की उपलब्धियां आंखों की किरकिरी बन जाती हैं। उसे बदनाम करने और उसके तौर-तरीकों पर सवाल उठाने वालों की कतारें लग जाती हैं। जब कानून में पर्याप्त दांत और नाखून न हों तो पूरा दारोमदार आरोप फैक्ट्री पर आ जाता है। कुछ ऐसा ही हो रहा है महादेव सट्टा ऐप के साथ। उधर महादेव ऐप का प्रमोटर अपनी शादी पर 200 करोड़ खर्च करता है और इधर चोरों के पेट में दर्द शुरू हो जाता है। पांच साल पहले छत्तीसगढ़ के भिलाई में जूस फैक्ट्री चलाने वाला एक 22-23 साल का युवक दुबई जाकर वहां के रईसों में अपना नाम लिखवा लेता है। उसका यह सफर कम रोमांचक या प्रेरणादायी नहीं है। देश के 99।99 प्रतिशत लोग पैसा बनाने में लगे हैं। कोई दवा उद्योग से पैसे बना रहा है, कोई शिक्षा उद्योग से तो कोई प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से। इनमें से कुछ के सिर पर सरकार का हाथ है तो कुछ का हाथ स्वयं सरकार के ऊपर है। देश की प्राकृतिक संपदा को लूटकर पैसे बनाने से तो अच्छा है कि लोगों को सपने बेचे जाएं। 200-300 करोड़ या 5000-10000 करोड़ रुपए की रकम कोई बड़ी बात नहीं है जब निवेशकों या दांव लगाने वालों की संख्या 80-90 लाख के आसपास हो। अपनी गणित जरा कमजोर है, पाठक स्वयं हिसाब लगा लें कि प्रति व्यक्ति यह कितना बैठता है। सट्टे का नाम आते ही लोग कहने लगते हैं कि लोग बर्बाद हो रहे हैं। यह भी एक पूर्वाग्रह है। यह महाभारत काल नहीं है जब लोग अपना राजपाट, पत्नी सबकुछ दांव पर लगा देते थे और फिर भी धर्मराज कहलाते थे। लोग सौ-पचास लगाते रहते हैं और जीतते हैं तो पार्टी करते हैं। सवाल यह उठता है कि जब केन्द्र सरकार स्वयं आनलाइन बेटिंग को लीगल करने पर विचार कर रही है तो यह वास्तव में कितना खतरनाक है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने 2015 की रिपोर्ट में खेलों में सट्टेबाजी को वैध बनाने की सिफारिश की थी। 21वें विधि आयोग ने 2018 की रिपोर्ट में जुआ और सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की थी। सरकार की भी इच्छा है कि इसे वैध करार देकर इसकी कमाई में हिस्सा बंटाया जाए। जब सरकार को इसमें जीएसटी मिलने लगेगा तो गरीबों के लिए यही सट्टा पुण्य हो जाएगा। बात-बात पर विदेशों का उदाहरण देने वालों को पता होना चाहिए कि इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में सट्टेबाजी वैध है। वहां की सरकारें इससे मोटी कमाई करती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया को इससे 11 अरब डॉलर और कनाडा को करीब 15 अरब डॉलर की कमाई हो चुकी है। 65 प्रतिशत सट्टा टीम इंडिया के मैचों पर ही लगता है। जिस सौरभ चन्द्राकर को वित्त मामलों का सलाहकार बनाना चाहिए था, ईडी उसी को डंडा लेकर ढूंढ रही है।

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