-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और भाजपा विपक्ष में. अब चुनाव करीब आ गए हैं तो लोगों का मनोरंजन भी शुरू हो गया है. ऐसा हर चुनाव में होता है. विपक्ष में बैठे लोग सरकार पर आरोप लगाते हैं और सरकार उनका जवाब देती. पर यह छत्तीसगढ़ है जहां हंसी-ठिठोली जन संस्कृति का हिस्सा है. यहां न तो कोई आरोपों को सीरियसली लेता है और न ही जवाब को. वह तो इसमें भी हास्य ढूंढता है. जनता को खूब दिखा रहा है कि उसके आसपास क्या हो रहा है. इसे समझने के लिए उसे किसी नेता के विचार जानने की जरूरत नहीं है. भूपेश सरकार ने इतनी नई योजनाएं बनाई हैं कि भाजपा के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि वह किसे मुद्दा बनाए. इसलिए बात घूम फिर कर शराब पर आ टिकी थी. शराब का धंधा शुरू से ही गंदा रहा है. गंदा होने के बावजूद भी यह उतना ही जरूरी है जितना आलीशान घर में संडास का होना. शराब किसी सरकार की ईजाद नहीं है बल्कि वह केवल इस धंधे को नियंत्रित करती है. जब लोग चार रुपए की दारू के 40 रुपए देने को तैयार है तो सरकार उसमें अपना हिस्सा क्यों न ले. इस पैसे से जनहित की जो योजनाएं चलती हैं, उससे तो किसी को ऐतराज होता दिखाई नहीं देता. सबको अपनी तनख्वाह बढ़वानी है, सुविधाओं में इजाफा करवाना है. जूनियर डाक्टरों से लेकर संविदा शिक्षा कर्मी तक सभी अपना वेतन-भत्ता बढ़वाने में लगे हैं. इससे शराब का मुद्दा झाग की तरह बैठ गया. अब भाजपा को नया मुद्दा मिला है गोधन-गोठान-गोबर का. भाजपाई पिछले एक महीने से गांवों में जाकर गोठानों को देख रहे हैं और इसमें हुए घोटाले का अंदाजा लगा रहे हैं. इस योजना पर अब तक हुए सरकारी खर्च को घोटाला बता रहे हैं. गोठान की योजना 2020 में शुरु हुई है. यह एक व्यापक सामाजिक आर्थिक परवर्तन से जुड़ी योजना है. रातों-रात इसके सफल हो जाने की उम्मीद करना निहायत बचकानी है. सेहत से जुड़ी हर दूसरी समस्या किसी न किसी रूप में रासायनिक उर्वरकों से जुड़ी है. इससे देश व राज्य का स्वास्थ्य बजट गड़बड़ा रहा है. शहरी क्षेत्रों में उच्च मध्यमवर्ग अब आर्गेनिक के पीछे भाग रहा है. इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहा है. किसान अब भी प्रति एकड़ ज्यादा से ज्यादा क्विंटल के लोभ में उलझा हुआ है. उसे नहीं पता कि इससे आधी उपज भी इसके बराबर दाम में बिक सकती है. वह समझेगा पर इसमें वक्त लगेगा. गोबर खाद की खरीदी बिक्री ऐच्छिक है. किसान बात को समझ जाए तो अपना वर्मी कम्पोस्ट खुद बना ले. सरकार को गोबर खरीदने से भी मुक्ति मिल जाएगी. भाजपा के नारायण चंदेल ने सरकार को गोबर पर घेरने की कोशिश की तो मंत्री अमरजीत भगत ने दो टुक कह दिया कि ऐसी योजनाओं के नतीजे आने में वक्त तो लगता है.
Gustakhi Maaf: चुनावी मौसम में गोबर पर लट्ठम-लट्ठा




