-दीपक रंजन दास
तीज त्यौहारों पर शराब दुकानों को बंद रखने का चलन पुराना है। इसके अलावा राष्ट्रीय पर्वों पर भी शराब दुकानें और आखेट परिसर बंद रखे जाते हैं। सबको पता है – बेवड़ों को भी। एक दिन पहले भी बता देते तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता। बेवड़ों को आदत है एक दिन पहले ही लाइन लगाकर अपना जुगाड़ कर लेने की। चार दिन पहले बताने की जरूरत नहीं थी। दरअसल, यह सूचना बेवड़ों के लिए नहीं बल्कि उन लोगों को भरमाने के लिए जारी की जाती है जिन्हें लगता है कि उनके पर्व पर शराबखोरी नहीं होनी चाहिए। दारू दुकान के बंद होने से शराबखोरी बंद हो जाती है, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है। लोग एक दिन तो क्या दो-तीन या चार दिन का कोटा भी पहले से खरीद कर रख सकते हैं। यकीन न आता हो तो ड्राय-डे से पहले शराब दुकानों पर लगने वाली भीड़ को देख लें। कहीं जाने की जरूरत नहीं है, मीडिया और खासकर सोशल मीडिया यह काम आपके लिए कर देगी। पूरी जानकारी, मय फोटो और वीडियो के आपके फोन पर होगी। वैसे भी मामला दारू का है। दारू बेचने के लिए न तो मौके की दुकान की जरूरत पड़ती है और न ही किसी विज्ञापन की। यही एक मात्र ऐसा धंधा है जो कभी मंदा नहीं पड़ता। ऊपर से छत्तीसगढ़ में दारू दुकानें भी सरकार की ही हैं। बिना बताए भी बंद कर सकती थी। पर इससे बड़ा नुकसान हो जाता। ड्राय-डे तो दारू की सेल बढ़ाने की तकनीक मात्र है। एक ही दिन में 4-5 दिन की सेल हो जाती है। मगर, ड्राय-डे से एक दिन पहले लगने वाली भीड़ से बेवड़ों को परेशानी होती थी। पैसा मिलाकर पव्वा खरीदने वाले परेशान होते थे। पव्वा खत्म हो जाता था या फिर दुकानदार बम्पर बेचने में इतना मशगूल हो जाता था कि इनकी चीख पुकार पर ध्यान ही नहीं देता था। इसलिए यह सरकार का फर्ज बनता था कि वह वक्त रहते उन्हें याद दिला दे कि त्यौहार आने वाला है। दारू दुकान बंद होने वाली है, आखिरी दिन की भीड़ से बचना है तो पहले से अपना बंदोबस्त कर लो। दरअसल, 75 साल की नवाबी ने हिन्दुस्तानियों की आदत खराब कर दी है। अब विद्यार्थियों से लेकर नौकरीपेशा, सभी लोग लास्ट डेट पर काम करने लगे हैं। टैक्स पटाने के लिए आखिरी दिन लाइन लगेगी, फीस पटाने के लिए, परीक्षा फार्म भरने के लिए, यहां तक कि एडमिशन लेने के लिए भी लोग लास्ट डेट का इंतजार करते हैं। जब लास्ट डेट आता है तो एक ही दिन में पास पोर्ट फोटो, फोटोकापी से लेकर चालान भरने तक का काम करने की कोशिश करते हैं। जानकारों को तो यह भी पता होता है कि किस-किस काम के लिए सरकार लास्ट डेट तब तक बढ़ाते रहने वाली है जब तक उसका हिसाब किताब पूरा नहीं हो जाता।





