-दीपक रंजन दास
भाजपा के फर्जी समर्थक देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों को गाली देने में ही अपनी शान समझते हैं. इन्हें लगता है कि नेहरू, इंदिरा, मनमोहन की लानत-मलामत से उनका अपना कद बड़ा हो जाता है. ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं है जिन्हें लगता है कि देश ने आजादी के बाद के 70 सालों में कोई तरक्की नहीं की. ऐसे लोगों को एक बार भिलाई जरूर आना चाहिए. भिलाई शहर का देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से गहरा रिश्ता है. केम्प क्षेत्र का चटाई क्वार्टर इलाका भी भिलाई की विकास यात्रा का साक्षी है. प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है. भिलाई नगर निगम में कांग्रेस का बहुमत है. महापौर भी कांग्रेस से ही हैं. पर यहां के एक उद्यान में अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा लगाई जाएगी. इस उद्यान का नामकरण भी अटलजी पर ही किया जाएगा. अटलजी की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव कांग्रेस के पार्षद व एमआईसी सदस्य मन्नान गफ्फार खान ने ही रखा. एमआईसी ने इसे सर्वसम्मति से पारित भी कर दिया. महापौर नीरज पाल ने कहा कि अटलजी का सभी लोग दिल से सम्मान करते हैं. यही हैं मूल भारतीय संस्कार. यहां किसी का सम्मान या अपमान करने से पहले उसकी पार्टी नहीं देखी जाती. अटलजी देश की सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता के भी प्रतीक थे. अटलजी को देश का प्यार और सम्मान तब भी हासिल था जब वे प्रधानमंत्री नहीं थे. 1994 में नरसिम्हा राव सरकार ने अटलजी को भारत का पक्ष रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के समक्ष गए दल का नेतृत्व सौंपा. अटलजी उन दिनों लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे. वाजपेयी इससे पहले 4 अक्टूाबर 1977 को बतौर विदेशमंत्री संयुक्तक राष्ट्रे के मंच हिन्दी में धाराप्रवाह 43 भाषण कर लोगों का दिल जीत चुके थे. ‘वसुधैव कुटुम्बु कम’ का सिद्धांत दोहराते हुए वाजपेयी ने पूरी दृढ़ता से भारत का पक्ष रखा.. दरअसल, होना भी यही चाहिए. प्रत्येक व्यक्ति में खूबियां और खामियां दोनों हो सकती हैं. सज्जन जहां केवल अच्छाइयां देखते हैं तो दुर्जन को केवल खामियां नजर आती हैं. यही कारण है कि कुछ लोगों को ऐसा लगने लगता है कि उनके अलावा दुनिया में सभी पाखंडी हैं, भ्रष्ट हैं, कदाचारी हैं. ऐसे लोग खुद को एक दायरे में समेट लेते हैं और फिर घुटते रहते हैं. वे भूल जाते हैं कि अमृत घुटन से नहीं मंथन से निकलता है. पर उसके साथ विष भी होता है. दुनिया न तो कभी पूरी स्याह हो सकती है और न ही पूरी सफेद. बहरहाल, कांग्रेस नीत भिलाई नगर पालिका निगम ने एक अच्छा उदाहरण पेश किया है. वरना तो आज हर तीसरा युवा अपने माता-पिता से पूछ बैठता है, “हमारे लिए आपने किया ही क्या है?”





