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Gustakhi Maaf: गाडिय़ों के घिसे हुए टायर और क्यूआर कोड

By Om Prakash Verma Published December 30, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
सड़कों पर लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या ने सभी की नाक में दम कर रखा है। इससे भी बड़ी समस्या लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं हैं। 2022 के दौरान अकेले छत्तीसगढ़ में 16 हजार 893 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो गई। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 12 प्रतिशत बढ़कर 4।6 लाख से अधिक हो गई। हर घंटे 19 लोगों की मौत हुई। जहां तक छत्तीसगढ़ का सवाल है तो यहां महानगरों की तुलना में वाहनों का घनत्व नगण्य है। अधिकांश दुर्घटनाएं खराब सड़कों, प्रकाश का अभाव, सड़क पर मवेशी, खराब ट्रैफिक सेंस और लापरवाह वाहन चालन के कारण होती हैं। एक छोटा कारण वाहनों का रखरखाव भी है। इसमें पुराने वाहन, घिसे हुए टायर, कमजोर या अत्यधिक तीव्र ब्रेकिंग जैसे कारण भी शामिल हैं। अब सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का इरादा किया है। पहली बार पुलिस एक्सपायरी डेट के टायरों पर कार्यवाही करेगी। जिन वाहनों के टायर एक्सपायरी डेट पार कर चुके होंगे या घिस कर टकला हो चुके होंगे, उनपर सौ रुपए का चालान किया जाएगा। दूसरी तरफ सड़क पर बेतरतीब पार्क किए हुए वाहनों को क्रेन से उठाने का काम भी चुस्ती-फुर्ती के साथ किया जाएगा। इसके लिए पुलिस ने एक काम और किया है। अब वाहनों पर एक क्यूआर कोड भी लगाना होगा जिसमें वाहन के मालिक का पूरा ब्यौरा मय मोबाइल नंबर शामिल होगा। पुलिस वाहन को उठाएगी तो मालिक को तत्काल सूचना मिल जाएगी कि उसकी गाड़ी किसी चोर उचक्के ने नहीं उड़ाई बल्कि पुलिस ले गई है। साथ ही यह सूचना भी दे दी जाएगी कि वाहन को कहां ले जाया गया है। इससे वाहन मालिक परेशान होने से बच जाएगा। अब तक जो ऐप उपलब्ध हैं उससे वाहन के नम्बर से उसके मालिक का सिर्फ पता लगाया जा सकता है। इसमें एक ही दिक्कत है कि यह वाहन मालिक का फोन नम्बर नहीं बताता। अर्थात मालिक को तत्काल सूचना देना संभव नहीं होता। अब जबकि क्यूआर कोड से फोन नंबर भी हासिल किया जा सकता है तो यह मनचलों के लिये ज्यादा काम का साबित हो सकता है। बहरहाल, बात सड़क हादसों और उसमें मरने वाले लोगों की हो रही थी। आंकड़े गवाह हैं कि अधिकांश ऐसे हादसे, जिसमें लोगों की मौत हो जाती है, उन स्थानों पर होती हैं जहां सड़कें लगभग सूनी होती हैं। तमाम सिक्यूरिटी फीचर्स के बावजूद लोगों की जान जा रही है। हेलमेट और सीट-बेल्ट के लिए पुलिस तो चेतावनी देती ही है, बेल्ट नहीं लगाने पर गाड़ी खुद भी पीं-पीं करती है। दरअसल, लोगों को सुरक्षा की कुछ पड़ी नहीं है। कोई कितना और क्या-क्या समझाए। ड्रंक ड्राइविंग, रेड लाइट जंपिंग, स्पीड लिमिट क्रॉस करना और हेलमेट-सीट बेल्ट को लेकर सख्ती करने के शायद बेहतर परिणाम आते। पर यह बेहद मुश्किल है, इसलिए…

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Om Prakash Verma December 30, 2023
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