ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: जेनेटिक इंजीनियरों का दावा : 2045 तक मरना हो जाएगा स्वैच्छिक, बढ़ती उम्र का इलाज होगा संभव
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
FeaturedWorld

जेनेटिक इंजीनियरों का दावा : 2045 तक मरना हो जाएगा स्वैच्छिक, बढ़ती उम्र का इलाज होगा संभव

By @dmin
Published: October 28, 2020
Share
जेनेटिक इंजीनियरों का दावा : 2045 तक मरना हो जाएगा स्वैच्छिक, बढ़ती उम्र का इलाज होगा संभव
जेनेटिक इंजीनियरों का दावा : 2045 तक मरना हो जाएगा स्वैच्छिक, बढ़ती उम्र का इलाज होगा संभव
SHARE

मैड्रिड (आईएनडी/एजेंसी). बार्सिलोना में दो जेनेटिक इंजीनियरों ने अपनी नई पुस्तक के प्रेजेंटेशन के दौरान दावा किया कि 25 साल बाद मरना स्वैच्छिक और उम्र बढऩे से रोकना चिकित्सा योग्य हो जाएगा। वेनेजुएला में जन्मे जोस लुई कोरडैरो और कैंब्रिज के गणितज्ञ डेविड वुड ‘सिम्बियन’ ऑपरेटिंग सिस्टम के फाउंडर हैं।

अमर रहना वैज्ञानिक संभावना
ये दोनों जेनेटिक इंजीनियर हैं और इन दोनों ने ‘द डेथ ऑफ डेथ’ नाम से पुस्तक लिखी है। इनका कहना है कि अमर रहना एक वास्तविक और वैज्ञानिक संभावना है, जो मूल रूप से सोचे जाने की तुलना में बहुत पहले आ सकती है। कोरडैरो और वुड का कहना है कि 2045 के आस-पास इंसानों की मौत केवल हादसों से होगी ना कि किसी प्राकृतिक कारण या बीमारी से। 
इनका कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुढ़ापे को किसी बीमारी के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है ताकि इसके इलाज के लिए सार्वजनिक वित्त पोषण को बढ़ाया जा सके। इन दोनों इंजीनियरों का कहना है कि अन्य नई आनुवंशिक परिवर्तन तकनीकों में नैनो टेक्नोलॉजी प्रमुख है।
इस प्रक्रिया में खराब जीन को स्वस्थ जीन में बदला जाएगा, शरीर से मृत कोशिकाओं को खत्म करना, नष्ट पड़ी कोशिकाओं को ठीक करना, स्टेम सेल से इलाज और महत्वपूर्ण अंगों को 3डी में प्रिंट करना शामिल है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी में पदस्थ कोरडैरो का कहना है, ‘उसने ना मरने का फैसला किया है और 30 साल बाद वह आज के मुकाबले ज्यादा युवा होगा।
एजिंग, डीएनए टेल्स का परिणाम है, इन्हें टेलोमेरेस के नाम से जाना जाता है, जो क्रोमोसोम्स में होते हैं। इनमें लाल रक्त और सेक्स कोशिकाओं को छोड़कर हर सेल के 23 जोड़े हैं, ये छोटे होने लगते हैं, जबकि बढ़ती उम्र को रोकने के लिए टेलोमेरेस को लंबा करना होता है। समय बीतने के साथ-साथ टेलोमेरेस कमजोर होते हैं और क्षतिग्रस्त होते जाते हैं। ऐसा तब और तेजी से होता है जब इंसान धूम्रपान, शराब और वायु प्रदूषण का शिकार होता है। इससे टेलोमेरेस की लंबाई कम होती है और इससे इंसान तेजी से बूढ़ा होता जाता है।
कोरडैरो और वुड का मानना है कि दस वर्षों में कैंसर जैसी बीमारियां ठीक होने लगेंगी। इंजीनियरों ने बताया कि हालांकि सामान्य तौर पर लोग इसके बारे में नहीं जानते, लेकिन 1951 में इसकी खोज की गई थी कि कैसे कैंसर सेल्स अमर होती हैं। जब हेनरिकेटा लैक्स की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर से हुई, सर्जनों ने ट्यूमर को हटा दिया और उसे रखा और यह आज भी जिंदा है।
जापान और कोरिया जैसे देशों में अगर बच्चे ना पैदा करने का मौजूदा चलन रहा तो ये देश 200 साल में विलुप्त हो जाएंगे। कोरडैरो ने कहा कि 200 साल बाद धरती पर कोई भी जापानी और कोरियाई समुदाय नहीं होगा। लेकिन इन नई तकनीकों का बहुत धन्यवाद, वास्तव में जापानी और कोरियाई लोग हमेशा रहेंगे और जवान बने रहेंगे। 

स्मार्टफोन जितनी लागत
जेनेटिक वैज्ञानिकों ने कहा कि एंटी एजिंग के इलाज की लागत उतनी ही होगी, जितनी मौजूदा समय में किसी नए स्मार्टफोन की है। शुरुआत में यह जरूर महंगी होगी लेकिन एक समय के बाद इसकी लागत में कमी आएगी क्योंकि इससे सभी लोगों को फायदा मिलेगा।
कोरडैरो ने कहा कि जब किसी तकनीकी का आविष्कार होता है तो वह महंगी होती है लेकिन समय के साथ लोकतांत्रिक और मुख्यधारा में आने के बाद सस्ती हो जाती है। इन दोनों इंजीनियरों ने बताया कि वो गैरकानूनी तरीके से दो साल पहले से इस तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इनकी पहली मरीज एलिजाबेथ पैरिस हैं, जिन्होंने उम्र बढऩे के लक्षणों को महसूस करना शुरू किया और कहा कि इसे रोकने के लिए क्या इलाज किया जा सकता है। वुड ने बताया कि उनका इलाज काफी जोखिम भरा और गैरकानूनी था, लेकिन अभी उस इलाज का कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखाई दिया है और उनके खून में टेलोमेरेस का स्तर पहले की तुलना में आज 20 साल पूर्व की स्थिति में है।
वुड ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा- ‘मैं चाहता हूं कि स्पेन ऐसी तकनीकों का स्थान बने और साबित करे कि हम पागल नहीं है। बस इतनी सी बात है कि लोग अभी इसके बारे में ज्यादा जानते नहीं है। दोनों वैज्ञानिकों की पुस्तक ‘द डेथ ऑफ डेथ’ चार भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी, जिसमें स्पेनिश, इंग्लिश, पुर्तगाली और कोरियन शामिल हैं। इसकी बिक्री से होने वाली कमाई को भी इसी रिसर्च में लगाया जाएगा। 

नोट : – इस आर्टिकल में वैज्ञानिकों या इंजिनियरों के द्वारा दावा या जानकारी का श्रीकंचनपथ इसकी पुष्टि या दावा नहीं करता है। यह केवल आपकी जानकारी मात्र के लिए है।

नक्सलियों की धमकी के बाद मतदान कर्मियों की मार्मिक अपील, जीतने वाले प्रत्याशी को दिया यह संदेश
विधानसभा चुनाव को देखते हुए तलाशी अभियान, चेकिंग के दौरान 1.80 करोड़ से अधिक के गहने बरामद
पेंशनरों को महंगाई से राहत : 4 फीसदी बढ़ोत्तरी के लिए मध्यप्रदेश सरकार की सहमति का इंतज़ार, सरकार ने लिखा पत्र
नफरत की पाठशाला : बच्चों में भारत के खिलाफ जहर भर रहा चीन
मुख्यमंत्री से अरूण वोरा के नेतृत्व में एमआईसी सदस्यों ने की मुलाकात
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article श्रीकंचनपथ 15 # 28 October 2020
Next Article चीन के साथ सीमा विवाद पर रक्षा मंत्री की दो टूक, कहा- भारत अब कमजोर देश नहीं रहा देश की सुरक्षा संभालने के अंदाज से रक्षा मंत्री प्रभावित, सेना की तारीफ की

Ro. No.-13759/19

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?