भिलाई। स्कूल आफ परफारमिंग आटर्स गीत वितान कला केन्द्र रुआबांधा द्वारा गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के पुण्यतिथि के अवसर पर प्रगति भवन सिविक सेन्टर भिलाई में वर्षा मंगल का आयोजन किया गया। आफिसर्स एसोशियेशन बीएसपी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक ललित चंद्राकर, विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन व डॉ आरआरबी सिंह (कुलपति) कामधेनु विश्व विद्यालय दुर्ग उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम अतिथि के द्वारा गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं उसी के समक्ष पौधरोपण से शांति निकेतन संस्कृति का अनुसरण किया गया। इसके पश्चात स्वागत भाषण उपाध्यक्ष सोमेन कुण्डू के द्वारा दिया गया। संस्था के बी म्युज, बी एफ ए एवं एम एफ ए के उत्तीर्ण छात्र छात्राओं को दीक्षांत समारोह का मान पत्र अतिथियो के द्वारा प्रदान किया गया। विशेष रूप से डॉ योगेन्द्र चौबे (रंग मंच एवं फिल्म निर्देशक) , डॉ समीर रक्षित (शिक्षा विद् एवं सास्कृतिक चिन्तक), चिरंजीव जैन (शिक्षा विद्) एवं डॉ संकल्प राय (प्रमुख) सायबर क्राइम विभाग सेक्टर-6 पुलिस कंट्रोल रूम व्यक्तित्व का मंच पर सम्मान किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत वन्दे मातरम गीत की 150 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संस्था के गिटार एवं की बोर्ड विद्यार्थियों के द्वारा धुन की प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित (वर्षा मंगल) गीत नृत्य एवं आलेख का समन्वय गीतवितान के गायन, नृत्य छात्र- छात्राओं द्वारा दिया गया । मोनो मोर मेघेरो शोंगी, हृदय मंर्दीलो डमरू, सावन गगने घोर घन घटा, आजी झरो झरो मुखोरो बादरो रवीन्द्रनाथ संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति से उपस्थित कला प्रेमी एवं दर्शक झूम उठे। वर्षा मंगल के सांग्तिक एवं नृत्य निर्देशन नृत्यमणी मिथुन दास के द्वारा किया गया। तबले पर रूद्र प्रसन्न जेना, गिटार- डेनिल कोसारिया, गिरीशा चौहान, की- बोर्ड- हर्ष सोनटेके, विनायक घोष एवं हारमोनियम पर चन्द्रा बैनर्जी ने संगत किया। आलेख का पाठ सुपर्णा चक्रवर्ती, शुभाशीष डे, साथी सेन एवं कार्यक्रम का मंच संचालन रचना श्रीवास्तव के द्वारा किया गया। वर्षा मंगल के आयोजन को सफल बनाने में नरेन्द्र कुमार बंछोर, वी के मोहम्मद, रजनी सिन्हा, प्रदीप कुमार मित्रा, राजील वर्मा, परिमल मंडल, चन्द्रा बैनर्जी, अस्मिता बैनर्जी, शैलेश चाहंडे, शान्तानू दासगुप्ता, कला साहित्य अकादमी (अध्यक्ष) शक्ति चक्रवर्ती का विशेष योगदान रहा।




