काबुल (एजेंसी)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठीक सामने गुरुवार शाम फिदायीन हमला हुआ। एक के बाद एक तीन धमाके हुए। इन धमाकों की जिम्मेदारी देर शाम तक आतंकी संगठन आईएस (इस्लामिक स्टेट) के खुरासान ग्रुप ने ली। इन धमाकों में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत कुल 72 लोगों की मौत हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने काबुल एयरपोर्ट हमले की निंदा करते हुए कहा कि सैनिकों की मौत बेहद दुखद है, दूसरों की जान बचाने में अमेरिकी सैनिकों का बलिदान हम कभी भुलेंगे नहीं और ना ही माफ करेंगे। हम आतंकियों को ढूंढकर मारेंगे । सैनिकों के परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं हैं। हम अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों को बचाएंगे और अपने अफगान सहयोगियों को बाहर निकालेंगे, हमारा मिशन जारी रहेगा, जरूरत पडऩे पर अतिरिक्त फौज भी भेजेंगे। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने काबुल धमाके पर कहा कि इस तरह की दुखद घटना बिल्कुल नहीं होनी चाहिए थी। बता दें कि ट्रंप के शासनकाल में ही अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा में समझौता हुआ था।
13 शहीद सैनिकों के सम्मान में चार दिन झुका रहेगा अमेरिकी झंडा
इस बीच अपने शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज झुका रहेगा। व्हाइट हाउस से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज 30 अगस्त की शाम तक आधा झुका रहेगा। गौरतलब है कि काबुल एयरपोर्ट पर हुए धमाके में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, वहीं 18 से ज्यादा सैनिक इसमें घायल हैं।
सैनिकों को ही बनाया गया था निशाना
काबुल एयरपोर्ट के ऐबी गेट के बाहर पहला धमाका हुआ था। यहां पर अमेरिका और ब्रिटेन के सैनिक तैनात रहते हैं। बताया जा रहा है कि हमलावर फयरिंग करते हुए ऐबी गेट के पास आया और उसने खुद को बम से उड़ा लिया। दूसरा धमाका ऐबी गेट के ही नजदीक बैरल होटल के बाहर हुआ। माना जा रहा है कि धमाके का उद्देश्य सैनिकों को ही निशाना बनाना था।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने की निंदा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बम धमाके पर बयान जारी करते हुए इसकी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा- हम काबुल में धमाकों की निंदा करते हैं। हम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करते हैं। ये धमाका बताता है कि हमें आतंकवाद और इसे पोषित करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है।





