दुर्ग (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। शहर विधायक अरूण वोरा के विरोधी ऐन चुनाव से पहले एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। ये विरोधी हर हाल में वोरा की टिकट कटवाने की कोशिश में है। वोरा को निर्विवाद और बेदाग छवि का नेता माना जाता है। अब विरोधी इसी को हथियार बना रहे हैं। सुनियोजित तरीके से वोरा की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वोरा विरोधियों के इस तरह खुलकर सामने आ जाने से शहर कांग्रेस के लिए हालात विषम हो गए हैं। हालांकि कांग्रेस के उच्चस्तरीय सूत्रों का दावा है कि वोरा के टिकट कटने की संभावना नगण्य है। कारण यह है कि कांग्रेस में विधायकों के टिकट काटने की परंपरा कभी नहीं रही है। 2018 के पिछले चुनाव में अरूण वोरा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। बावजूद इसके विरोधियों का सक्रिय होना वोरा के लिए परेशानी का सबब तो है ही। अरूण वोरा दुर्ग विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार चुनाव लडऩे का रिकार्ड बना चुके हैं।

विधानसभा चुनाव का वक्त करीब आ रहा है तो कांग्रेस से टिकट के कई दावेदार बरसाती मेंढ़कों की तरह खड्ड से बाहर निकल आए हैं। ये दावेदार सोची-समझी रणनीति के तहत वरिष्ठ नेता व सीनियर विधायक अरूण वोरा की छवि खराब करने में जुटे हैं। साजिशन अफवाहें फैलाई जा रही है और वोरा विरोधी माहौल तैयार किया जा रहा है। कई लोग दुष्प्रचार भी कर रहे हैं। हालांकि यह निर्विवाद सत्य है कि वर्तमान में दुर्ग शहर में विधायक वोरा की टक्कर का एक भी नेता किसी भी पार्टी में नहीं है। वोरा को सहृदयता, नागरिकों के साथ सहज व जीवंत संवाद करने व लोगों के सुख-दुख के साथी के रूप में जाना जाता हैं। ऐसे समय में जबकि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ता और संगठन फूंक-फूंककर कदम रख रहे है, कांग्रेस के ही भीतर एक तबका सक्रिय होकर विरोधी माहौल बनाने में जुट गया है। सुनियोजित तरीके से अफवाहें फैलाई जा रही है कि विधायक वोरा को इस बार टिकट नहीं मिलेगी। या फिर वोरा के लिए चुनाव जीतने की संभावना नहीं है।
राजनीति में आने के बाद से लेकर अब तक अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित करने वाले अरूण वोरा को अपने राजनीतिक विरोधियों के कुचक्रों का भान न हो, ऐसा संभव नहीं है। बावजूद इसके वोरा अपने सतत् और निरंतर जनसेवा अभियान में लगे हैं। आमतौर पर जनप्रतिनिधि चुनाव से कुछ महीने पहले सक्रिय होते हैं और विकास कार्यों का दम्भ भरते हैं। लेकिन वोरा के साथ ऐसा नहीं है। वे हर समय जनता से जुड़े रहते हैं। पूरे 5 साल तक सक्रिय रहने वाले वे बिरले राजनीतिज्ञ हैं। विकास के छोटे से छोटे काम भी वे स्वयं खड़े होकर करवाते हैं, ताकि कहीं कोई चूक न रह जाए। इतनी शिद्दत के साथ सेवा करने वाले जनसेवक के भी विरोधी हो सकते हैं और उनके खिलाफ माहौल बना सकते हैं, यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं है। विधायक वोरा मन, वचन और कर्म से सौम्य है और उनकी यही खूबी लोगों को पसंद भी आती है। लेकिन कई बार इनसान की खूबियां कई लोगों को नागवार गुजरती है। दरअसल, वोरा परिवार का इतिहास ही जनसेवा और जनता के प्रति समर्पण का रहा है। यही वजह है कि जनता का आशीर्वाद भी इस परिवार को लगातार और सदैव मिलता रहा। कई लोगों को इससे कोफ्त होना अस्वाभाविक नहीं है।
वोरा के लिए राह मुश्किल नहीं
विधानसभा चुनाव को महज 4 माह का वक्त बचा है। दुर्ग शहर वर्तमान में कांग्रेस का गढ़ है और विगत दो चुनाव से यहां अरूण वोरा जीत दर्ज करते रहे हैं। हर बार जीत का आंकड़ा बढ़ता गया। इस बार भी उनकी जीत की पूरी संभावना है। प्रदेश के हालातों को देखें तो राज्य में फिर से कांग्रेस की सरकार बनना मुश्किल नहीं है। हालांकि कांग्रेस संगठन इसे लेकर बेहद संजीदा है और एक-एक सीट पर फूंक-फूंककर कदम रखने के मूड़ में है। राज्य में कांग्रेस के पास 70 से ज्यादा सीटें हैं। बावजूद इसके सत्ता और संगठन में ऐन चुनाव से पहले किए गए परिवर्तन इस बात का संकेत है कि कांग्रेस चुनाव को लेकर कितनी ज्यादा गम्भीर है। इन हालातों में दुर्ग शहर जैसी जीती हुई सीट पर कांग्रेस के ही लोगों का विरोध में खड़े होना शुभ संकेत नहीं माना जा सकता।
सबको टिकट मांगें का अधिकार
कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है और लोकतांत्रिक दल होने की वजह से यहां सबको टिकट मांगने का अधिकार है, किन्तु दूसरे की छवि खराब कर या दुष्प्रचार की वीणा बजाकर अपनी ही पार्टी का नुकसान करना संदेहास्पद है। ऐसे लोगों की वजह से ही राज्य में कांग्रेस पूरे 15 वर्षों तक सत्ता से दूर रही। वर्तमान में करीब आधा दर्जन लोग दुर्ग शहर सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन उनकी दावेदारी में इसलिए भी दम नहीं है, क्योंकि राजनीतिक कद के मामले में वे विधायक वोरा के सामने कहीं नहीं टिकते। प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता आने के बाद दुर्ग में भी पार्टी के हालात बदले हैं। वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा के निधन के बाद कई लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हिलोरे मार रही है। बावजूद इसके दुर्ग शहर में अरूण वोरा बरगद की तरह अटल और अडिग हैं।




