भिलाई। कुछ दिन पहले राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय द्वारा विधायक देवेन्द्र यादव, उनके बड़े भाई धर्मेन्द्र यादव सहित परिजनों पर लगे हवाला के आरोपों के बाद सोमवार को पूर्व प्रदेश कांग्रेस सचिव धर्मेन्द्र यादव ने प्रेस वार्ता में मीडिया के सामने अपनी बात रखी। धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि जिस अनिमेष सिंह के यश बैंक के खाते से उनके व उनके भाई विधायक देवेन्द्र यादव सहित परिजनों के लेनदेन का आरोप लगाया जा रहा है वह पूरी तरह से निराधार है।

धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि अनिमेष सिंह से उन्होंने या उनके भाई विधायक देवेन्द्र व उनके किसी परिजन ने किसी प्रकार का लेनदेन नहीं किया है। इस मामले में विधायक देवेन्द्र यादव के ससुराल पक्ष के ताम्रकर परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं है। जिस धर्मेन्द्र यादव का अनिमेष सिंह से व्यवहारिक लेनदेन है वह सुपेला मार्केट हाऊस नंबर 24/5 पटेल बेकरी के पास का निवासी है। उसका श्रीमती उषा देवी यादव, श्रीमती घूमा देवी यादव, वीरेन्द्र यादव का विधायक देवेन्द्र यादव व धर्मेन्द्र यादव से कोई संबंध नहीं है।
धर्मेन्द्र यादव ने बताया कि जिन कंपनियों आदित्य रोड लाइन, अथर्व माइनिंग, जीटीआर एजुकेशन सोसायटी, मध्यानी बिल्डर, अतुल राय, सुशांत श्रीवास्तव, सेवा सिंह ओबेराय, श्याम शर्मा, संतोष गुप्ता, पवन चौधरी, प्रतीक चोपड़ा आदि का विधायक देवेंद्र यादव या उनके भाई धर्मेंद्र यादव व उनके किसी परिवार के सदस्य का कोई लेन-देन नहीं है। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि केवल सनसनी फैलाने और विधायक देवेंद्र यादव और उनके परिजनों की छवि खराब करने के उद्देश्य से छोटे निराधार आरोप लगाए गए हैं इस पर मानहानि व न्यायालय कार्यवाही भी की जाएगी।
जाने क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय ने भिलाई में करोड़ों के हवाला रैकेट का खुलासा किया है। उन्होंने पूरे मामले में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव की संलिप्तता का आरोप लगाया है। ठेकेदार हितेश चौबे के कर्मचारी अनिमेष सिंह के यश बैंक के खाते से करोड़ों के लेनदेन का खुलासा किया है। वीरेन्द्र पाण्डेय ने यस बैंक में अनिमेष सिंह के नाम से हितेश चौबे द्वारा अवैध रूप से एक करेंट अकाउंट 24 जनवरी 2017 को खुलवा कर 28 नवंबर 2019 तक कुल 160 करोड़ रुपए के लेन-देन की बात कही थी। यही नहीं इस पूरे मामले में वीरेन्द्र पाण्डेय ने विधायक देवेंद्र यादव के बड़े भाई धर्मेंद्र यादव सहित श्रीमती उषा देवी यादव, श्रीमती रूपा देवी यादव, वीरेंद्र यादव आदि के नाम से लेनदेन होने का आरोप लगाया था।




