भिलाई। कोरोना संक्रमण के कारण चौतरफा मार झेल रहे कोचिंग संचालकों ने रासहत के लिए सरकार से गुहार लगाई है। जिस प्रकार सभी सेक्टरों में सरकार ने राहत दी है उसी प्रकार कोचिंग संचालकों ने भी अब क्लासेस चलाने की अनुमति मांगी है। इस्पात नगरी के तमाम कोचिंग संचालक लामबंद होकर छत्तीसगढ़ एजुकेशनल कोचिंग एसोसिएशन के बैनर तले सरकार से गुहार लगाई है। कोचिंग संचालकोंं का कहना है कि जल्द से जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया गया है कोचिंग सेक्टर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण विगत 6 महीनों से इस्पता नगरी के कोचिंग संस्थान बंद है। सरकार ने अब तक कोचिंग संस्थानों को लेकर किसी भी प्रकार के दिशा निर्देश जारी नहीं किए हैं। कोचिंग संचालकों की हालत अब बद से बदतर हो चुकी है। राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार के उदासीन रवैया ने अधिकांश कोचिंग संचालकों को अपने कोचिंग बंद करने पर मजबूर कर दिया है। भिलाई जिसे छत्तीसगढ़ के कोचिंग का हब माना जाता है जहां हजारों बच्चे अलग-अलग शहरों तथा राज्यों से आकर विद्या अर्जित करते हैं यहां पर भी करोना का बुरा असर देखा गया है। सारे कोचिंग संस्थान विगत 6 महीनों से बंद है लेकिन संचालकों के द्वारा अभी भी किराया पटाया जा रहा है साथ ही साथ अपने स्टाफ की सैलरी भी वह किसी तरह से दे रहे हैं। अब कोचिंग संचालक सरकार से इस ओर ध्यान देने व राहत की मांग कर रहे हैं। कोचिंग संचालक राज्य व केन्द्र सरकार से जल्द इस क्षेत्र के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग कर रहे हैं।
कोचिंग संस्थानों के लिए कोई सकारात्मक उपाय नही
सरकार ने अब तक सभी सेक्टरों को शुरू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए लेकिन अभी तक कोचिंग संचालकों के प्रति कोई भी सकारात्मक उपाय नहीं लिया गया है यहां तक गुमटी रेहड़ी चलाने वाले तक को परमिशन है। ाॉपिंग मॉल तथा सिनेमा हॉल को भी चलाने का अनुमति दे दिया गया है तो ऐसे में सवाल उठता है कि कोचिंग संस्थानों को क्यों बंद रखा जा रहा है। कोचिंग संचालकों को गाइडलाइन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कोचिंग संचालन की अनुमति प्रदान नहीं की जानी चाहिए आखिर वह भी बच्चों के भविष्य निर्माण करने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं।
ऑनलाइन क्लासेस शुरू करना विकल्प नहीं
कोचिंग संचालकों का कहना है कि उनके पास ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने को लेकर सुझाव आ रहे हैं और सरकार ने भी इस प्रकार के दिशा निर्देश जारी किए लेकिन अचानक ऑनलाइन क्लासेस शुरू करना संभव नहीं होता। इसके लिए काफी महंगे सामान चाहिए। विशेष रूप से टेबलेट व लैपटॉप अनिवार्य होगा और उसके लिए हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन जो कि सभी के लिए अफोर्ड करना मुश्किल होगा। साथ ही साथ टेक्निकल नॉलेज की जानकारी आवश्यक है और इसके साथ बच्चों को भी ऑनलाइन क्लास किस प्रकार से की जानी है इसकी भी जानकारी होनी चाहिए जो कि वर्तमान में ऐसा पाया गया है कि यह संभव नहीं हो सकता। कोचिंग संचालकों का कहना है कि इसी तरह से यह चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं है कि कोचिंग संचालकों को भी रोड किनारे बैठकर सब्जी तरकारी बेचना पड़े।




