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सीएम भूपेश के कैंडिटेट को वैशाली नगर में ‘अपनों’ से खतरा!…. मुकेश चंद्राकर को चुनाव हरवाने रोजाना हो रही बैठकें

By Mohan Rao
Published: October 30, 2023
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सांकेतिक फोटो
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पार्टी विरोधी गतिविधियों पर सीएम से लेकर संगठन की पैनी नजर!

भिलाई। कहते हैं कि कांग्रेस चुनाव हारती नहीं है, उसके अपने उसे चुनाव हरवाते हैं। वैशाली नगर में यह बात सौ फीसद सच हो रही है। कांग्रेस पार्टी ने लम्बी जद्दोजहद के बाद इस सीट से जिला कांग्रेस के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन क्षेत्र के दीगर दावेदार अब उनके खिलाफ लामबंद होकर मोर्चा खोल चुके हैं। खबर है कि सुपेला स्थित एक रेस्त्रां में रोजाना इन विरोधियों की बैठकें चल रही है, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी को हरवाने की रणनीति बनाई जा रही है। इसकी भनक लगने के बाद प्रदेश संगठन के भी कान खड़े हो गए है। कई लोगों ने सीएम भूपेश बघेल तक भी शिकायत पहुंचाई है। प्रत्याशी के विरोध में लामबंद होने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में उन पर कार्रवाई के भी संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चंद्राकर को सीएम भूपेश बघेल का कैंडिटेट माना जाता है।

जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद जिस वैशाली नगर क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने मुकेश चंद्राकर ने खासी मशक्कत की थी, अब वहां खुद श्री चंद्राकर को चुनौतियां पेश की जा रही है। पार्टी ने टिकट वितरण के लिए जो प्रक्रिया अपनाई थी, उसके तहत इस क्षेत्र से करीब दर्जनों कांग्रेसियों ने दावेदारी जताई थी। लेकिन पार्टी की जारी दूसरी सूची में वैशाली नगर से श्री चंद्राकर को प्रत्याशी घोषित किया गया। इसके बाद से ही कांग्रेस के टिकट दावेदार लामबंद होने लगे। परिसीमन के बाद 2008 को अस्तित्व में आए इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति कभी बहुत अच्छी नहीं रही। इस क्षेत्र को भाजपा मानसिकता वाला माना जाता है। यही वजह है कि श्री चंद्राकर ने जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद वैशाली नगर में खूब मेहनत की। स्थानीय नागरिकों तक भूपेश सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाया। लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने की भी भरसक कोशिशें की। उनकी कोशिशें रंग भी लाती दिखी, जब क्षेत्र के लोग यह दावा करने लगे कि इस बार वैशाली नगर को फतह करना कांग्रेस के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। श्री चंद्राकर से पहले संगठन की कमान संभालने वाली तुलसी साहू ने भी भाजपाई मकडज़ाल तोडऩे काफी मेहनत की।

कहीं भाजपा से सांठगांठ तो नहीं….?
मुकेश चंद्राकर को प्रत्याशी बनाया जाना क्षेत्र के बहुत सारे कांग्रेसियों को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि उनके खिलाफ राजनीतिक कुचक्र रचा जा रहा है। बताते हैं कि ये वही लोग हैं जो स्थानीय और बाहरी का मुद्दा उठाकर पहले भी माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं। कांग्रेस प्रत्याशी श्री चंद्राकर फिलहाल अपने प्रचार अभियान को गति देने में जुटे हैं। लेकिन उनकी पीठ पीछे कई लोग गड्ढा खोदने में जुट गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ऐसे लोगों की सोच है कि यदि मुकेश चंद्राकर एक बार चुनाव जीत गए तो उनके (अन्य दावेदारों) भविष्य के दरवाजे बंद हो जाएंगे। इसलिए ऐसे लोग हर हाल में मुकेश चंद्राकर को चुनाव हरवाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस के ही एक सूत्र का दावा है कि इन गड्ढेबाजों में से कुछेक के सम्पर्क भाजपा के लोगों से भी है। इन हालातों में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस की टिकट के दावेदार रहे लोगों ने भाजपा से सांठगांठ कर ली है?

कॉफी हाउस में चल रहा बैठकों का दौर
बताते हैं कि कांग्रेस को हरवाने की साजिशों को सुपेला स्थित कॉफी हाउस में चल रही बैठकों में अंजाम दिया जा रहा है। यह बैठकें लगभग रोजाना हो रही है। हालांकि जानकारों का कहना है कि प्रदेश संगठन को इन तमाम स्थितियों से अवगत कराया जा चुका है। स्वयं सीएम भूपेश बघेल ने शिकायतों को गम्भीरता से लिया है। लेकिन फिलहाल विरोधियों पर सिर्फ पैनी नजर रखी जा रही है। मुकेश चंद्राकर, चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर रह चुके हैं। क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के वोटर्स की बाहुल्यता है। संभवत: इसी के मद्देनजर पार्टी ने श्री चंद्राकर को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी भी इसी वर्ग से है, लेकिन मुकेश चंद्राकर राजनीतिक हालातों, व्यक्तिगत छवि से लेकर कई अन्य मामलों में भाजपा प्रत्याशी से काफी आगे हैं। यही बात कांग्रेस के गड्ढेबाजों को रास नहीं आ रही है। संकेत मिल रहे हैं कि ऐसे लोगों को पार्टी व संगठनहित में काम करने की जल्द ही नसीहत दी जा सकती है। इसके बाद यदि वे नहीं सुधरते हैं तो उन पर संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सीएम दे सकते हैं दखल
राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले स्व. वासुदेव चंद्राकर के परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुकेश चंद्राकर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कैंडिटेट माना जा रहा है। ऐसे में संभावना है कि जल्द ही स्वयं सीएम भूपेश इस मामले में दखल दे सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस, प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने जी जान से जुटी हुई है। लेकिन वैशाली नगर समेत कई अन्य सीटों पर भीतरघातियों की सक्रियता रोड़ा बन सकती है। जिले की ही कम से कम तीन सीटों पर भीतरघातियों की फौज तैयार है। जबकि इन सभी सीटों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी बताई जा रही है। पिछले चुनाव में जिले से सिर्फ वैशाली नगर सीट पर ही कांग्रेस को पराजय मिली थी। यही वजह है कि पार्टी के नेताओं ने चुनाव हारने के बाद से लगातार इस क्षेत्र में काम किया। सरकार से लेकर कार्यकर्ताओं तक की 5 साल की मेहनत पर अब कांग्रेस के ही भीतरघाती या गड्ढेबाज पानी फेरने पर आमादा है। जबकि पूर्व की अपेक्षा इस बार वैशाली नगर में कांग्रेस की स्थिति को बेहतर माना जा रहा है।

सीएम की परेड का भी असर नहीं!
गौरतलब है कि मुकेश चंद्राकर को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद संभावित विरोध के मद्देनजर स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 60 से ज्यादा दावेदारों को रायपुर बुलाया था। हालांकि इस बैठक से बहुत सारे दावेदारों ने किनारा कर लिया था। बैठक तमाम दावेदारों के मान मनौव्वल के लिए रखी गई थी। सीएम के समक्ष सभी दावेदारों ने पार्टी के पक्ष में काम करने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान में जो हालात है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि सीएम की समझाइश का असर भी इन दावेदारों पर नहीं हुआ है। वैशाली नगर, प्रदेश की उन सीटों में है, जहां कांग्रेस में सबसे ज्यादा दावेदार सामने आए थे। पार्टी यहां से अब तक सिर्फ एक उपचुनाव में ही जीत हासिल कर पाई है। इस सीट की कितनी अहमियत है, इसका अंदाजा भी इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं सीएम को प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट करने के लिए तमाम दावेदारों को बुलाकर समझाइश देनी पड़ी थी।

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