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CG Politics: विधानसभा चुनाव हारे नेताओं को कांग्रेस ने बनाया प्रत्याशी, एक फ्रेश चेहरा भी

By Om Prakash Verma
Published: March 9, 2024
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CG Politics: विधानसभा चुनाव हारे नेताओं को कांग्रेस ने बनाया प्रत्याशी, एक फ्रेश चेहरा भी
CG Politics: विधानसभा चुनाव हारे नेताओं को कांग्रेस ने बनाया प्रत्याशी, एक फ्रेश चेहरा भी
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सीएम साय का दावा, कहा- कांग्रेस डूबती नैय्या, सभी 11 सीटों पर दर्ज करेंगे जीत
रायपुर (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को अपने आधे पत्ते खोलते हुए 11 में से 6 लोकसभा प्रत्याशियों का ऐलान किया है। इनमें 3 ऐसे नेता भी हैं, जिन्हें हालिया सम्पन्न विधानसभा चुनाव में जनता ने नकार दिया था। इनमें पूर्ववर्ती सरकार में शामिल रहे दो मंत्री भी है। मजे की बात है कि ये दोनों पूर्व मंत्री पहले भी लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रह चुके हैं। 6 प्रत्याशियों की घोषणा में कांग्रेस ने काफी हद तक जातीय और सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखा है। भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू और शिवकुमार डहरिया के साथ ही राजेन्द्र साहू की उम्मीदवारी इसी आधार पर तय हुई है। राजेन्द्र साहू कांग्रेस के लिए एकदम फ्रेश कैंडिडेट हैं। दरअसल, कांग्रेस वाकओवर नहीं देना चाह रही है, इसलिए उसने दमदार चेहरों को तवज्जो दी है। हालांकि ये चेहरे विधानसभा चुनाव क्यों हारे, इसे अनदेखा कर दिया गया है। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस को डूबती हुई नैय्या बताते हुए सभी 11 सीटों पर जीत का दावा किया है।

लोकसभा चुनाव के लिए जब छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी चयन की कवायद प्रारम्भ हुई थी तब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम का प्रस्ताव भी रखा गया, लेकिन तब बघेल ने साफ तौर पर कह दिया था कि वे लोकसभा चुनाव लडऩे की बजाए घूम-घूमकर प्रचार करना पसंद करेंगे। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद उन्होंने चुनाव लडऩा स्वीकार कर लिया। लेकिन उनकी ही सरकार में गृहमंत्री रहे ताम्रध्वज साहू को महासमुंद भेजना बहुत सारे लोगों को रास नहीं आया है। महासमुंद क्षेत्र, दरअसल, साहू बाहुल्य इलाका है और साहू समाज में ताम्रध्वज की जबरदस्त पकड़ है। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी उन्हें महासमुंद का टिकट थमा दिया गया है। वैसे भी कहा जा रहा है कि जिस दुर्ग क्षेत्र से वे आते हैं, वहां उनके लिए संभावना कम थी। कांग्रेस की सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री रहे शिवकुमार डहरिया को जांजगीर सीट से टिकट दी गई है। विधानसभा चुनाव में वे भी बुरी तरह पराजित हुए थे। ताम्रध्वज साहू ने जहां 2014 की प्रचंड मोदी लहर के बावजूद दुर्ग संसदीय सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी, वहीं शिवकुमार डहरिया भी लोकसभा का चुनाव लड़े, हालांकि उन्हें पराजय मिली थी। रायपुर लोकसभा से प्रत्याशी बनाए गए विकास उपाध्याय हालिया विधानसभा चुनाव राजेश मूणत से हार गए थे।

कोरबा क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी सांसद ज्योत्सना महंत पर एक बार फिर भरोसा जताया है। इस क्षेत्र को महंत परिवार का गढ़ माना जाता है, लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार इस संसदीय क्षेत्र के हालात भी बदले हुए हैं। भाजपा ने यहां से दिग्गज भाजपा नेत्री सरोज पाण्डेय को उतारा है। वहीं राजनांदगांव सीट से प्रत्याशी बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बात करें तो यह संसदीय क्षेत्र पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है। कांग्रेस ने यहां से भूपेश बघेल को उतारकर बड़ा जातीय कार्ड खेला है। भाजपा ने यहां से सामान्य वर्ग के संतोष पाण्डे पर एक बार फिर भरोसा जताया है। यहां इस बार रोमांचक मुकाबले के आसार हैं। कांग्रेस ने 11 में से 6 प्रत्याशियों का ऐलान कर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। लोकसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की 11 सीटों के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। अब कांग्रेस ने भी अपनी पहली सूची में बड़े चेहरों पर दांव लगाकर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है। इस बार कांग्रेस ने भाजपा को सीधी टक्कर देने के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल सहित हारे हुए दो पूर्व मंत्रियों को भी मैदान में उतारकर बड़ा भरोसा जताया है, लेकिन इस बार इनकी सीट को बदलकर जातिवाद का बड़ा कार्ड खेला है।

इसलिए नांदगांव से उतरे भूपेश
कांग्रेस की लिस्ट में पहला और बड़ा नाम पूर्व सीएम भूपेश बघेल का है। वे दुर्ग के पाटन से विधायक हैं, लेकिन उन्हें राजनांदगांव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है। ये सीट छत्तीसगढ़ की हॉट सीट में से एक है। इस लोकसभा सीट में ओबीसी वर्ग के वोटर्स की संख्या ज्यादा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ओबीसी वर्ग से ही आते हैं। इनके सामने भाजपा से सांसद संतोष पांडेय हैं। भाजपा ने जिन दो सांसदों को दोबारा टिकट दी है, उनमें से एक संतोष पांडेय हैं, लेकिन इनके सामने अब पूर्व सीएम को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने इनके लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। इस सीट के लिए अब सबसे बड़ी दिलचस्प बात ये है कि यह क्षेत्र पूर्व सीएम और विधानसभा के अध्यक्ष डॉ रमन सिंह का क्षेत्र है। सूत्र बताते हैं कि पूर्व सीएम ने इस सीट के लिए अपने बेटे अभिषेक के लिए टिकट मांगा था।

डहरिया को मिला दोबारा मौका
कांग्रेस ने डॉ. शिव कुमार डहरिया को दूसरी बार प्रत्याशी बनाकर लोकसभा चुनाव लडऩे का मौका दिया है। कांग्रेस सरकार में डहरिया नगरीय प्रशासन मंत्री थे। इस बार वे आरंग से भाजपा के खुशवंत साहेब से चुनाव हार गए हैं। इसके बाद भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए जांजगीर से मौक़ा दिया है। इनके लिए थोड़ी राहत की बात ये है कि इस लोकसभा सीट की आठों विधानसभा सीटें इस समय कांग्रेस के पास हैं। पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू को पार्टी ने महासमुंद सीट पर मैदान में उतारा है। ताम्रध्वज साहू दुर्ग से सांसद रह चुके हैं, लेकिन इस बार यहां विधानसभा चुनाव हार गए थे। उन्हें पार्टी ने दोबारा सांसद का टिकट दिया है, लेकिन सीट दुर्ग से बदलकर महासमुंद कर दी गई है। यहां इनके सामने भाजपा से रूपकुमारी चौधरी हैं। ये इलाका साहू बाहुल्य है। सामाजिक वोट बंटोरकर सीट हासिल करने ये सीट भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कोरबा बन गई हॉट सीट
कोरबा लोकसभा सीट भी अब हॉट सीट बन गई है। यहां भाजपा से सरोज पांडेय चुनावी मैदान में हैं। इनके सामने मौजूदा सांसद कांग्रेस की ज्योत्सना महंत चुनाव लड़ेंगी। ज्योत्सना छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष और कद्दावर नेता चरणदास महंत की पत्नी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जिन दो सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, उनमें से ये सीट भी थी। इस सीट पर दोनों ही पार्टियों ने बड़े चेहरों को उतारा है। अब ये दोनों महिला प्रत्याशी एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देंगी। हालांकि चुनाव से पहले ही भाजपा ने राजनीतिक बढ़त बनाने के लिहाज से बयानबाजी शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि ज्योत्सना महंत ने अपने 5 साल के कार्यकाल में एक बार भी संसद में अपनी बात नहीं रखी। आरोप लगाए गए हैं कि ज्योत्सना महंत को जनता ने अपनी बात रखने के लिए संसद में भेजा था, लेकिन वे सदन में जनता की आवाज बनने में नाकाम रही।

बृजमोहन के सामने विकास लड़ेंगे
रायपुर लोकसभा सीट में नजारा देखने लायक है। भाजपा ने यहां से रिकार्ड मतों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले बृजमोहन अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया तो वहीं कांग्रेस ने चुनाव हार चुके विकास उपाध्याय को मौका दिया है। विकास इस बार विधानसभा चुनाव में राजेश मूणत से हार गए थे। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। 90 में से 71 सीटें कांग्रेस के पास थीं। एक तरफा सीटों के बाद भी लोकसभा चुनाव में महज 2 सीटों पर ही कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। अब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों की घोषणा होने और बड़े नेताओं की सीधी टक्कर ने चुनाव में दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ा दी है। इसी बीच सीएम विष्णुदेव साय का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम साय ने कहा कि भाजपा पूरी की पूरी 11 सीटें जीतेगी। कांग्रेस कुछ भी कर ले- भारत जोड़ो यात्रा कर ले, चाहे न्याय यात्रा कर ले, चाहे जातिगत राजनीति कर ले। लेकिन कांग्रेस डूबती नैया है। नैया में छेद हो चुका है। पार्टी बिखर रही है और इस बार एक भी सीट जीतने वाला नहीं है।

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