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CG Politics: महासमुंद ने बार-बार तय किया दिग्गजों का भाग्य, भाजपा का गढ़ बनी इस सीट पर जोगी ने ढहाया था विद्याचरण शुक्ल का किला, बाद में खुद भी हारे

By Om Prakash Verma
Published: March 2, 2024
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CG Politics: महासमुंद ने बार-बार तय किया दिग्गजों का भाग्य, भाजपा का गढ़ बनी इस सीट पर जोगी ने ढहाया था विद्याचरण शुक्ल का किला, बाद में खुद भी हारे
CG Politics: महासमुंद ने बार-बार तय किया दिग्गजों का भाग्य, भाजपा का गढ़ बनी इस सीट पर जोगी ने ढहाया था विद्याचरण शुक्ल का किला, बाद में खुद भी हारे
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रायपुर (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। कभी छत्तीसगढ़ की राजनीति का केन्द्र रहे महासमुंद क्षेत्र ने देश व प्रदेश को कई कद्दावर नेता दिए हैं। महानदी तट पर बसे इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सिरपुर और गंगरेल बांध की वजह से जरूर है, लेकिन दिग्गज नेताओं के कारण महासमुंद सदैव सुर्खियों में रहा है। राजनीतिक दृष्टि से महासमुंद संसदीय क्षेत्र को हाई प्रोफाइल माना जाता है। विद्याचरण शुक्ल यहां से 6 बार सांसद रहे, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संत कवि पवन दीवान भी इसी क्षेत्र से दो बार सांसद रहे। विगत 3 चुनाव से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है और वर्तमान में चुन्नीलाल साहू यहां का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस बार भी उनकी टिकट तय मानी जा रही है। हालांकि पार्टी के कुछ और नेता भी महासमुंद के जरिए दिल्ली का सफर तय करने की दावेदारी कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ ही नहीं, अविभाजित मध्यप्रदेश में भी महासमुंद लोकसभा क्षेत्र देश में जाना माना नाम रहा है। दरअसल, महासमुंद ने छत्तीसगढ़ के कई दिग्गज नेताओं को देश की राजधानी तक पहुंचाया। इस लोकसभा में तीन जिले और उनकी आठ विधानसभा सीटें आती है। महासमुंद जिले में चार विधानसभा महासमुंद, खल्लारी, बसना और सरायपाली, गरियाबंद जिले में बिंद्रा नवागढ़ और राजिम विधानसभा सहित धमतरी जिले में कुरूद और धमतरी विधानसभा क्षेत्र शामिल है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के खाते में 4-4 सीटें आई। बसना और महासमुंद विधानसभा पर भाजपा ने जीत हासिल की है। धमतरी और बिंद्रानवागढ़ कांग्रेस की झोली में रहा वहीं कुरूद और राजिम भाजपा के खाते में गया। वैसे तो इस सीट पर कांग्रेस के कब्जे का इतिहास रहा है, लेकिन कांग्रेस के चक्रव्यूह को भाजपा ने पांच बार भेदने में सफलता हासिल की।

रोचक रहा है इतिहास
1952 से अब तक महासमुंद में 18 चुनाव हुए हैं। इनमें 12 बार कांग्रेस ने चुनाव जीता। एक बार 1989 के चुनाव में विद्याचरण शुक्ल जनता दल की टिकट पर जीते थे, जबकि भाजपा व जनता पार्टी यहां से पांच बार चुनाव जीतने में सफल रहीं। महासमुंद से ही कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। बतौर सांसद अपने नौ कार्यकाल में से विद्याचरण ने अपने पहले चुनाव समेत छह चुनाव महासमुंद से ही जीते। वर्ष 2004 में जब उन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ दी, तो वे इसी निर्वाचन क्षेत्र में लौटकर आए। तब वे पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता अजीत जोगी से हार गए थे। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल इस सीट से 1999 में चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं 2004 में राज्य के पहले मुख्यमंत्री जोगी यहां से सांसद बने थे। कांग्रेस के श्योदास डागा 1952 में चुनाव जीतकर महासमुंद के पहले सांसद बने। इसके बाद 1971 तक लगातार कांग्रेस ही जीती। 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार बृजलाल वर्मा लगभग 80 हजार मतों से चुनाव जीते थे। इस तरह पहली बार महासमुंद में जनता पार्टी (भाजपा) की एंट्री हुई। वर्ष 1998 में फिर भाजपा के चंद्रशेखर साहू ने चुनाव जीता। 2009 से लगातार यहां भाजपा के सांसद चुने गए।

…जब केबीसी में पूछा गया सवाल
टीवी के प्रसिद्ध शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में भी महासमुंद क्षेत्र चर्चा में रहा है। दरअसल, वाकया यह है कि 2014 के चुनाव में भाजपा ने चंदूलाल साहू को महासमुंद क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया था। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी प्रत्याशी थे। इस चुनाव में कुल 11 चंदू साहू मैदान में थे। इनमें से 8 चंदूलाल थे वहीं 3 चंदूराम साहू थे। केबीसी में इसी को लेकर सवाल पूछा गया था। आरोप लगे थे कि भाजपा के चंदूलाल साहू को हराने के लिए ही उनके हमनाम 11 लोगों के चुनावी फार्म भरवाए गए थे, ताकि वोट चंदुओं में बँट जाए। बताया जाता है कि 11 में से ज्यादातर चंदुओं की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी। कई चंदुओं के पास तो जमानत की राशि जमा करने के लिए पैसे भी नहीं थे। हालांकि चंदुओं के समानांतर खड़ा करने के बावजूद भाजपा के चंदूलाल साहू यहां से दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुए थे। अजीत जोगी को पराजय का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में महासमुंद क्षेत्र में कुल 38 प्रत्याशी मैदान में थे।

दिग्गजों की भिड़ंत से चर्चा में आई महासमुंद सीट
महासमुंद लोकसभा सीट पर राज्य बनने के बाद हुए 4 आम चुनावों में से दो ने देश-विदेश में सुर्खियां बटोरी। राज्य बनने के बाद 2004 में हुए पहले आम चुनाव में इस सीट से दो कांग्रेसी दिग्गज आमने-सामने थे। कांग्रेस ने चार महीने पहले राज्य की सत्ता खोने वाले अजीत जोगी को यहां से प्रत्याशी बनाया तो भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री पं. विद्याचरण शुक्ल को कमल निशान थमा दिया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान दोनों-तरफ से जोरदार प्रचार अभियान चला, लेकिन मतदान के ठीक दो दिन पहले जोगी सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसा इतना भयानक था कि जोगी के बचने की उम्मीद नहीं थी। कहा जाता है कि इससे जोगी के पक्ष में सहानुभूति लहर चली। जोगी एक लाख से अधिक मतों से जीत गए, लेकिन हादसे के कारण जिंदगीभर के लिए चलने- फिरने में असमर्थ हो गए। 2014 में जोगी ने फिर इस सीट से भाग्य आजमाया। लेकिन उन्हें दूसरी बार कामयाबी नहीं मिली। इस बार महासमुंद की चर्चा एक ही नाम के 11 प्रत्याशियों को लेकर थी।

पर्यटन से भी है महासमुंद की पहचान
महानदी के तट पर स्थित महासमुंद क्षेत्र की विशेष पहचान अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल सिरपुर और गंगरेल बांध से है। प्राचीन छत्तीसगढ़ अर्थात दक्षिण कौशल की राजधानी रहे श्रीपुर (सिरपुर) को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रयास जारी है। सिरपुर, महासमुंद जिले का आइकॉन है। यह जिला छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है। विद्याचरण शुक्ल, अजीत जोगी, श्यामाचरण शुक्ल से लेकर संत कवि पवन दीवान तक ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। यह क्षेत्र सोमवंशीय सम्राट द्वारा शासित दक्षिण कोशल की राजधानी था। यहां के मंदिर अपने प्राकृतिक और सौंदर्य के कारण लोगों को आकर्षित करते हैं। यहां के बम्हनी गांव में निरंतर प्रवाह होने वाली कुंड श्वेत गंगा बेहद लोकप्रिय स्थान है। इस कुंड के समीप भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। यहां मांघ पूर्णिमा और महाशिवरात्री के दौरान मेला लगता है। महासमुंद को साहू बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। साहू समाज की आबादी यहां करीब 20 फीसद है। यही वजह है कि राजनीतिक दल यहां जातीय समीकरणों को देखकर प्रत्याशी तय करते हैं।

चुन्नी की मजबूत दावेदारी, चंद्राकर भी मैदान में
वर्तमान सांसद चुन्नीलाल साहू की दावेदारी इस क्षेत्र से काफी मजबूत है। लेकिन उनके अलावा भी भाजपा से कई अन्य दावेदार सक्रिय हैं। पार्टी ने साहू के अलावा दो अन्य नामों का पैनल बनाकर दिल्ली भेजा था। इनमें पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर व संत गोवर्धन शरण व्यास के नाम शामिल है। इनके अलावा प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री विभा अवस्थी का नाम भी दावेदारों में शामिल है। विभा लम्बे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं। विशेष कर देवभोग अमलीपदर क्षेत्र में आदिवासी जनजाति के विकास के लिए उन्होंने काफी काम किया है। यदि यहां प्रत्याशी बदलने की नौबत आती है तो इन्हीं तीन नामों में ही फैसला होने की संभावना है। माना जा रहा है कि भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द ही जारी हो सकती है। पार्टी के नेताओं ने महासमुंद सीट को अपने पक्ष में माना है। इसलिए इस बात की संभावना कम ही है कि पहली सूची में इस सीट का नाम शामिल हो। हालांकि बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की करीब-करीब सभी सीटों पर प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए गए हैं।

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