भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से 3 महीने पहले 21 प्रत्याशियों की सूची क्या जारी की, छत्तीसगढ़ की राजनीति उफान पर आ गई। इसे भाजपा की कांग्रेस पर लीड के रूप में भी देखा गया, लेकिन क्या वास्तव में भाजपा ने लीड हासिल की है? सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2018 के चुनाव में भाजपा को महज 14 सीटें ही मिली थी। जबकि कांग्रेस के पास 69 से ज्यादा सीटें थी। कांग्रेस क्योंकि सत्ता में है, इसलिए पार्टी और उसके विधायक व नेता लम्बे समय से चुनाव तैयारियों में जुटे हुए हैं। वैसे भी उसके ज्यादातर विधायकों को टिकट मिलना लगभग तय है। परिस्थितियों को देखें तो कांग्रेस प्रारम्भ से ही भाजपा से आगे रही है। टिकट वितरण के लिए बहुत ज्यादा माथापच्ची करने की दरकार भी नहीं है। अलबत्ता, यह जरूर कह सकते हैं कि भाजपा ने चुनाव से काफी पहले हारी हुई सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर बड़ा दांव चला है। इससे दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला लगभग बराबर होने की उम्मीद की जा सकती है।
भाजपा आलाकमान के पास छत्तीसगढ़ की सभी 90 सीटों को लेकर जो रिपोर्ट पहुंची है, उसके आधार पर कहा जा रहा है कि पार्टी ने कुल 30 सीटों को अपने लिए कमजोर माना है। हालांकि पूर्व में इसे 36 सीटें बताया गया था। इन 30 सीटों में से कुल 21 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही पार्टी बाकी बची 9 सीटों के लिए भी नामों का ऐलान कर सकती है। इनमें से ज्यादातर सीटें ट्रायबल की होने की खबर है। शहरी परिवेश की सीटों की घोषणा अंत में किए जाने की भी बातें कही जा रही है। दरअसल, भाजपा वर्तमान घोषित 21 सीटों में से करीब 15 सीटों को जीतने की उम्मीद में है। यानी पार्टी की मंशा है कि पिछले चुनाव में उसे जितनी कुल सीटें मिली थी, उससे ज्यादा सीटें इस पहली सूची से निकलकर आ जाए। माना जा रहा था कि 2018 की बुरी पराजय के बाद पार्टी के लिए नए और बेहतर प्रत्याशी तलाशना बड़ी चुनौती होगी। लेकिन जिस तरह से भाजपा ने चुन-चुनकर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, उसकी तारीफ विरोधी भी कर रहे हैं। इस पर इन प्रत्याशियों को प्रचार समेत तमाम तरह की गतिविधियों के लिए काफी वक्त भी मिल गया है। इस पहली सूची तो देखें तो पार्टी ने बड़े नामों की बजाए रिजल्ट देने वाले छोटे नामों पर ज्यादा भरोसा जताया है। कद्दावर दावेदारों के मुकाबले पंचायत स्तर के व्यक्ति को तवज्जो दी गई है। इसी से जाहिर होता है कि भाजपा की पहली प्राथमिकता सिर्फ चुनाव जीतना ही है। वरिष्ठता और नेता के कद के कोई मायने नहीं है। कई पुराने और चूके हुए नेताओं को अचानक से सामने लाकर भी पार्टी ने कुछ ऐसा ही संदेश दिया है।
संभावना है तो जरूर मिलेगी टिकट
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा सारे पुराने नेताओं को घर नहीं बैठाने वाली है। यानी जिन नेताओं में जीत की संभावना होगी, उनको टिकट जरूर दिया जाएगा। इनमें वे नेता भी होंगे जो पिछली बार चुनाव जीते हैं या चुनाव हारे हैं। पार्टी ने यह निर्णय तीन से चार दौर के सर्वे के बाद लिया है। पार्टी ने यह भी तय किया है कि पूर्व और वर्तमान सांसदों को 2023 के चुनाव में मौका दिया जाएगा। पिछले कुछ दिनों से पार्टी के साथ ही विरोधी दल के नेताओं के बीच ऐसी चर्चा जोरों पर थी कि भाजपा सारे पुराने नेताओं का टिकट काटकर नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारेगी। लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार के चुनाव में पुराने नेता भी मैदान में होंगे। भाजपा के पास इस समय 14 सीटें हैं। वैशाली नगर विधानसभा के विधायक विद्यारतन भसीन का हाल में निधन हुआ है इस कारण एक सीट रिक्त है। इस तरह 13 विधायक मौजूदा हैं। इनमें से कितने के टिकट कटेंगे, यह स्पष्ट नहीं है।
गुटीय संतुलन व सिफारिशें दरकिनार
भाजपा ने 21 विधायकों की पहली सूची जारी की जिसमें पूर्व सांसद रामविचार नेताम का भी नाम है। वे रमन सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। बाद में केन्द्र में राज्यमंत्री भी रहे। इसी प्रकार पिछला चुनाव कटघोरा से हारने वाले लखन देवांगन को इस बार कोरबा से टिकट दिया गया है। संजीव शाह भी पूर्व विधायक हैं। इस लिहाज से पहली ही सूची में पुराने हारे नेताओं का नंबर लग गया है। पहली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि वे पुराने सांसद जिन्हें 2019 में टिकट नहीं दिया गया था, उनको भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। ऐसे नामों पर विचार किया जा रहा है। गुरुवार को जारी सूची में दुर्ग के सांसद विजय बघेल का नाम है। पार्टी इस बार गुटीय संतुलन या अन्य सिफारिशों को दरकिनार कर केवल इस बात पर फोकस कर रही है कि कौन जीत सकता है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्रीय चुनाव समिति ने नामों पर मुहर लगाई है।
इन सीटों की भी होनी थी घोषणा, अब दूसरी सूची का इंतजार
बताते हैं कि भाजपा ने पहले चरण में कुल 27 सीटों के लिए सूची तैयार की थी। लेकिन अंतिम समय में 21 सीटों की घोषणा ही की गई। जिन सीटों पर नाम घोषित करने से रोक दिए गए, उनमें कोंटा, सीतापुर, जैजेपुर, पामगढ़, पाली तानाखार और दुर्ग ग्रामीण की सीटें शामिल है। संभावना है कि अब दूसरी सूची में इन सीटों से प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया जाएगा। पता चला है कि इन सीटों पर नाम तो तय कर लिए गए थे, किन्तु केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्यों में नामों को लेकर अस्पष्टता सामने आई। इसलिए इन सीटों पर फिर से पतासाजी करने और किसी नतीजे पर पहुंचने के बाद नामों का ऐलान करने का निर्णय लिया गया। दुर्ग ग्रामीण सीट पर दो महिला उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा होने की खबर है। इनमें से एक महिला पंचायत प्रतिनिधि रह चुकीं हैं, जबकि दूसरे पूर्व में जनप्रतिनिधि रह चुकीं हैं। इस सीट पर पेंच इसलिए फंस गया है क्योंकि बताते हैं कि पड़ोस की एक अन्य सीट से महिला प्रत्याशी की पुख्ता दावेदारी है।




