भिलाई। जिला अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव प्रसुता का निजी अस्पताल में प्रसव के मामले में जिला कलेक्टर ने बड़ी कार्रवाई की है। मालवीय नगर स्थित ओम अस्पताल प्रबंधन को इस मामले में दोषी पाया गया। कलेक्टर ने आदेश जारी कर ओम अस्पताल पर 20 हजार का जुर्माना लगाया है। साथ की अस्पताल के लाइसेंस को निरस्त करने का नोटिस भी जारी किया गया है। इसके लिए कलेक्टर ने 30 दिनों का समय दिया है। इसके अलावा जीवन दीप समिति के जिस वाहन चालक ने कोरोना पॉजिटिव प्रसुता को ओम अस्पताल पहुंचाया था उसकी सेवा भी समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिया है।
बता दें कि 16 दिसंबर को गर्भवती महिला विभा यादव पति रुद्र नारायण यादव का ओम अस्पताल मालवीय नगर में प्रसव कराया गया। उक्त महिला पहले जिला अस्पताल में भर्ती थी जिसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे मेकाहरा रिफर किया गया था। लेकिन महिला को मेकाहरा ले जाने के बजाय जीवन दीप समिति के वाहन चालक बसंत उर्फ राजू मानिकपुरी द्वारा मालवीय नगर स्थित ओम अस्पताल पहुंचाया गया। ओम अस्पताल में नियम विरुद्ध कोरोना पॉजिटिव प्रसुता का प्रसव करा दिया गया। जब मामला खुला तो जिला प्रशासन हरकत में आया। जिला कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी। समिति में डिप्टी कलेक्टर दिव्या वैष्णव, तहसीलदार पार्वती पटेल व चिकित्सा अधिकारी अर्चना चौहान को शामिल किया। समिति ने पूरे मामले की जांच कर 20 दिसंबर को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट पर गौर करने के बाद कलेक्टर ने कार्रवाई की।
जांच में सही पाई गई शिकायत
कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में ओम अस्पताल के खिलाफ की गई शिकायत सही पाई गई। कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे द्वारा जारी कार्रवाई आदेश ेक मुताबिक ओम अस्पताल के विरुद्ध कोरोना पॉजिटिव प्रसुता का प्रस्व कराने संबंधी शिकायत सही पाई गई है। ओम अस्पताल को कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज की अनुमति नहीं है इसके बाद भी प्रसव कराया गया जो कि नर्सिंग होम एक्ट के अधिनियम का उल्लंघन है। जांच समिति द्वारा प्रसुता के परिजनों के बयान भी लिए जिससे ओम अस्पताल की लापरवाही सामने आई। इसे देखते हुए ओम अस्पताल पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने के साथ ही नर्सिंग होम एक्ट 2010 व 2013 के वर्णित प्रावधान 9 अनुज्ञा पत्र निस्तारी करण अथवा निलंबन के तहत भी दोषी पाया गया है। इसे देखते हुए ओम अस्पताल का लाइसेंस निलंबन के लिए 30 दिनों का नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा जीवन दीप समिति के वाहन चालक बसंत उर्फ राजू मानिकपुरी भी दोषी पाया गया इसलिए इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई। ओम अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए कलेक्टर भविष्य में इस तरह का कृत्य न करने की चेतावनी भी दी है।




