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6 अगस्त जन्मदिन पर विशेष: जितने सरल-सहज उतने ही अनुशासित माटीपुत्र ताम्रध्वज साहू…. छत्तीसगढ़ में बदली पर्यटन की तस्वीर, बिछाया सड़कों का जाल

By @dmin
Published: August 6, 2021
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Expansion of Modi cabinet: List of 43 MPs to become ministers released
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भिलाई। छत्तीसगढ़ प्रदेश के गृह, जेल, लोकनिर्माण, धर्मस्व व पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू का 6 अगस्त 72 वां जन्मदिन है। ताम्रध्वज साहू ने राजनीति का शिखर छुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से लेकर अब तक ताम्रध्वज साहू सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं इस दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। राज्य बनने के बाद राज्यमंत्री के रूप में सेवाएं देने वाले ताम्रध्वज साहू वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार के केबिनेट मंत्री हैं। एक मंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू ने अपने विभागों की तस्वीर बदल दी है। चाहे वह गृह विभाग हो, पर्यटन विभाग या फिर जेल, धर्मस्व व लोकनिर्माण विभाग हर जगह अपनी अलग तस्वीर पेश की है। ताम्रध्वज साहू जितने सरल व्यक्तित्व के धनी हैं उतने ही वे कुशाग्र बुद्धि के स्वामी भी है। प्रदेश के कद्दावर मंत्री होने के बाद भी ताम्रध्वज साहू का जीवन सदा ही सादगी वाला रहा है इस वजह से उन्होंने जन जन के प्रिय नेता के रूप में अपनी छवि विकसित की है।

15 वर्षों तक भाजपा के शासन के बाद 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी और इसके पीछे ताम्रध्वज साहू की मेहनत किसी से छिपी नहीं। 2014 में भाजपा की कद्दावर नेत्री सरोज पाण्डेय के विजय रथ को रोककर प्रदेश से कांग्रेस के एकलौते सांसद बने और यहीं से प्रदेश में परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2018 में सांसद रहते हुए उन्होंने दुर्ग ग्रामीण विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर प्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री बने। सरकार में ताम्रध्वज साहू को गृह, जेल, लोकनिर्माण, धर्मस्व व पर्यटन विभाग का दायित्व मिला। ताम्रध्वज साहू ने सभी विभागों के साथ समान तालमेल बैठाया। विशेषकर छत्तीसगढ़ में पर्यटन को दिशा देने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। राजीम माघी पुन्नी मेला को भव्यता इन्होंने दी है उसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। यही नहीं छत्तीसगढ़ के तमाम पर्यटन स्थलों को भव्यता देने का काम अब हो रहा है। यही नहीं लोकनिर्माण मंत्री के तौर पर ताम्रध्वज साहू प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा रहे हैं।

सरलता की प्रतिमूर्ति है साहू
प्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री ताम्रध्वज साहू सरलता की प्रतिमूर्ति कहे जाते हैं। वे शुरू से सादगी पसंद रहे हैं। उनमें सबको साथ लेकर चलने की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। वे साहू समाज में जितने लोकप्रिय हैं, उतनी ही लोकप्रियता उनकी भोजपुरी, यूपी-बिहार, बंगाली एवं अन्य समाजों में भी है। उनकी बातें सम्पूर्ण मानवता और प्रकृति को समाहित करती हैं। प्रदेश के वरिष्ठ केबिनेट मंत्री होने के बावजूद ताम्रध्वज साहू सामान्य तौर पर हमेशा लोगों से अपने सरल स्वभाव के अनुरूप ही लोगों से मिलते जुलते नजर आते हैं। उनका यह स्वभाव ही उन्हें वीआईपी होने के बावजूद आम व्यक्ति के रूप में एक अलग पहचान दिलाता है। यही कारण है कि ताम्रध्वज साहू आज हर वर्ग के लोगों के पसंद के नेता हैं।

छत्तीसगढ़ में रामवन गमनपथ ले रहा आकार
छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ का काम प्रगति पर है। अयोध्या में राम मंदिर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में राम गमन पथ का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। पैराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम छत्तीसगढ़ के कई जिलों से होकर गुजरे, इसे ही राम वन गमन पथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के प्रथम चरण के लिए नौ स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरी नारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-साऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। इसमें से चंद्रपुरी रायपुर में आठ करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से अगस्त से कार्य शुरू हो चुका है, जहां लगभग 30 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

राजिम माघी पुन्नी मेला को मिल रहा भव्य स्वरूप
प्रदेश के माघ पूर्णिमा के अवसर पर राजिम में प्रतिवर्ष भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। इस मेले को देखने न केवल प्रदेश औऱ देश बल्कि विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। मंत्री तामध्वज साहू ने इस मेले को इसकी खोई हुई पहचान दिलाकर इसे अपने मूलस्वरूप में लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। वर्तमान में राजीम माघी पुन्नी मेला के स्थल विकास पर बड़ा कार्य हो रहा है। नदी के बीच में मेला लगाने के बजाए इसके लिए अलग से स्थल चिह्नांकित किया गया है। अभी राजीम में नए स्थल के विकास कार्य चल रहा है। आने वाले समय में राजीम माघी पुन्नी मेला का स्वरूप और भी भव्य होगा इसके लिए वृहदस्तर पर कार्य हो रहा है। पर्यटन मंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू राजीम में पर्यटन विकास को लेकर बड़े स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

कोरबा जिले का सतरेंगा बन रहा विश्वस्तरीय पिकनिक स्पॉट
कोरबा जिले का सतरेंगा पर्यटन के लिहाज से एक बेहतर विकल्प बनता जा रहा है। ताम्रध्वज साहू ने पर्यटन मंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र के विकास पर खासा जोर दिया है। सतरेंगा कोरबा जिले का एक बहुत ही खुबसुरत पिकनिक स्पाट है, हर साल यहां सैकड़ो कि संख्या में टुरिस्ट आते हैं, यह सुंदर पिकनिक स्?पाट कोरबा शहर से लगभग 38 कि.मी. और बिलासपुर शहर से लगभग 126 कि.मी. की दूरी पर हसदेव-बांगो रिसर्वायर में सतरेंगा गांव के पास स्थित है, जहां पहाड़ो से घिरे इस झील का आनंद लेने के लिए छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोग यहां आते है। सतरेंगा के इस सुदर पिकनिक स्पॉट को विकसित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा यहां यहां खुबसुरत गार्डन का निर्माण, रेस्ट हाउस, वाटर स्पोर्टस और टिकिटिंग की भी व्यवस्था बनाई जा रही है। आने वाले समय में लोग यहां रूककर प्रकृति के बीच रहकर अपने फैमिली के साथ समय व्यतीत कर पायेंगे। आने वाले समय में सतरेंगा कोरबा जिले और छत्तीसगढ़ का एक बहुत ही प्रचलित पिकनिक स्पॉट बन जाएगा।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का हो रहा खात्मा
छत्तीसगढ़ पिछले कई दशकों से नक्सलियों की समस्या से जूझ रहा है। 15 साल बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई तो इस विभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता ताम्रध्वज साहू के कंधों पर आई। गृहमंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू ने प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे का जो संकल्प लिया वह पूरा होता दिख रहा है। प्रदेश में नक्सली बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। ताम्रध्वज साहू सरल, सौम्य और शांतचित्त राजनेता हैं, लेकिन साथ ही विरोधियों को उसी मुखरता से जवाब भी देते हंै। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू प्रदेश के गृहमंत्री के रूप में अब तक बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। जिले में कानून व्यवस्था को सुचारू करने से लेकर अफसरशाही पर नकेल कसने में ताम्रध्वज साहू ने सफलता पाई है। ताम्रध्वज साहू नेक विचारों के साथ काम करते हैं। उनका मानना है जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें विधायक बनाया है उस विश्वास को कभी नहीं तोडऩा है। ताम्रध्वज साहू के प्रयासों के कारण ही आज प्रदेश के सभी जिलों में जनता क प्रति पुलिस का व्यवहार सुधरा है।

निखर रही है बस्तर की छठा
पर्यटन की दृष्टि से बस्तर जिले का अपना अलह ही महत्व है।ख़ूबसूरत जंगलों और आदिवासी संस्कृति में रंगा जि़ला बस्तर, प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है। पर्यटन मंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू बस्तर के पर्यटन को निखारने व सवांरने का काम कर रहे हैं। उड़ीसा से शुरू होकर बीजापुर की भद्रकाली नदी में समाहित होने वाली करीब 290 किलोमीटर लंबी इंद्रावती नदी बस्तर के लोगों के लिए आस्था और भक्ति की प्रतीक है। इंद्रावती नदी के मुहाने पर बसा जगदलपुर एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प केन्द्र है। यहां मौजूद मानव विज्ञान संग्रहालय में बस्तर के आदिवासियों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं मनोरंजन से संबंधित वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। डांसिंग कैक्टस कला केन्द्र, बस्तर के विख्यात कला संसार की अनुपम भेंट है। बस्तर महल, दलपत सागर, चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर और कैलाश गुफा आदि क्षेत्रों के विकास को लेकर ताम्रध्वज साहू कृतसंकल्पित हैं।

गांव-गांव बिछ रहा सड़कों का जाल
लोकनिर्माण मंत्री के रूप में ताम्रध्वज साहू एक विजन के साथ काम कर रहे हैं। शहरों की तरह ही हर गांव में पक्की सड़क हो इसके लिए काम हो रहा है। मंत्री ताम्रध्वज साहू का कहना है कि प्रदेश के हर गांव में पक्की सड़क हो जहां जरूरत टू लेन वहां टूलेन बनेगा और जहां फोरलेन की जरूरत हैं वहां फोरलेन सड़क भी बनेगा। ताम्रध्वज साहू ने इसके लिए विभागीय अधिकारियों को वृहद स्तर पर कार्य करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में प्रदेश के हर गांव में सड़कों को लेकर काम हो रहा है। आने वाले वर्षों में प्रदेश में शहरों से लेकर गांवों तक को धूल व कीचड़ से सनी सड़कों से मुक्त करने का संकल्प है जिसके लिए मंत्री ताम्रध्वज साहू लगातार काम कर रहे हैं। ताम्रध्वज साहू यहीं नहीं रुकते वे निर्माण कार्यों का स्वयं जायजा लेते हैं और गुणवत्ता को परखते हैं। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर अफसरों को फटकार लगाने से भी नहीं चूकते। इसकी वजह से आज प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण सड़कों का निर्माण हो रहा है।

ताम्रध्वज साहू का संक्षिप्त जीवन परिचय
ताम्रध्वज साहू का जन्म 06 अगस्त 1949 को बेमेतरा जिले के ग्राम पतोरा में हुआ। उनके पिता का नाम श्री मोहन लाल साहू और माता का नाम स्वर्गीय श्रीमती जियन बाई साहू हैं। ताम्रध्वज साहू ने शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुर्ग से हायर सेकेण्डरी की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1998 से 2000 तक वे अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 2000-2003 छत्तीसगढ़ सांसद से अलग होने के बाद, ताम्रध्वज छत्तीसगढ़ सरकार के राज्य शिक्षा, जल संसाधन मंत्री बने। 2003 तताम्रध्वज साहू ने धामधा निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीता। उन्होंने भाजपा के जगेश्वर साहू को हराया। 2008 उन्होंने बेमेतरा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल की। इस बार उन्होंने बीजेपी के अवधेश सिंह चंदेल को हराया। 2013 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2013 के दौरान, उन्होंने बेमेतरा निर्वाचन क्षेत्र से फिर से चुनाव लड़ा लेकिन इस बार वे भाजपा के अवधेश सिंह चंदेल से हार गए। 2014 ताम्रध्वज साहू ने 2014 में लोकसभा चुनाव दुर्ग निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उन्होंने बीजेपी की सरोज पांडे को हराया और 16 वीं लोकसभा में प्रवेश किया। मई 2014 में वे दुर्ग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 16 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। लोकसभा सांसद के रूप में ताम्रध्वज साहू संसद की कोल एवं स्टील स्टैण्डिंग कमेटी और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की सलाहकार समिति तथा राजभाषा समिति के सदस्य रहे।

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