रायपुर। पोस्टिंग के बाद भी ज्वाइनिंग नहीं लेने वाले मेडिकल अफसरों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। राज्य के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में पदस्थ किए गए एमबीबीएस अनुबंधित चिकित्सा अधिकारी जिन्होंने अपने पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, उनके विरूद्ध बॉण्ड की संपूर्ण राशि की वसूल की जाएगी।
बता दें स्वास्थ्य विभाग द्वारा 9 नवम्बर 2022 को 212 एमबीबीएस अनुबंधित चिकित्सा अधिकारियों को अपने पदस्थापना स्थल में पांच दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने अंतिम अवसर प्रदान करने के लिए सूचना (Notice) जारी की गई थी। इसके परिपालन में 212 में से 123 अनुबंधित चिकित्सा अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दे दी है। परंतु 89 अनुबंधित चिकित्सा अधिकारी अभी भी अनुपस्थित हैं।
राज्य शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग के छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथैरेपी) स्नातक प्रवेश नियम के अनुसार बॉण्ड की शर्तों का अनुपालन नहीं करने वाले अनुपस्थित चिकित्सकों के विरूद्ध बॉण्ड की संपूर्ण राशि की वसूली की कार्रवाई भू-राजस्व की बकाया राशि के रूप में की जाएगी। राज्य मेडिकल काउंसिल में एमबीबीएस स्नातक योग्यता का स्थायी पंजीयन अभ्यर्थी को प्रदान की गई अंतिम डिग्री के आधार पर ही किया जाएगा।
डिग्री के लिए अभ्यर्थी को अपने महाविद्यालय के अधिष्ठाता को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिनकी अनुशंसा पर विश्वविद्यालय द्वारा अंतिम डिग्री प्रदान की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में कार्रवाई किए जाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक, मेडिकल कांउसिल के रजिस्ट्रार एवं आयुष युनिवर्सिटी उपरवारा, नया रायपुर के अधिष्ठाता को पत्र लिखा गया है। बॉण्ड की शर्तों का पालन नहीं करने वाले अनुबंधित चिकित्सा अधिकारियो के विरूद्ध वसूली की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
20 से 25 लाख रुपए देना होगा जुर्माना
छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार बॉन्ड पूरा नहीं करने पर जुर्माना अलग अलग तय किया गया है। यह जुर्माना आनारक्षित वर्ग के लिए 25 लाख और आरक्षित वर्ग के लिए 20 लाख रुपए है। बताया जा रहा है बॉन्ड पूरा नहीं करने वालों में अधिकतर अन्य राज्यों से हैं। यह सभी ऑल इंडिया कोटे के तहत एडमिशन लेने के बाद वे कोर्स पूरा करते हैं। MBBS और मेडिकल के पाठ्यक्रम में प्रवेश के समय प्रत्येक विद्यार्थी को सरकार के साथ एक बॉन्ड भरना होता है। जिसमें यह तय किया जाता है कि कोर्स पूरा करने के बाद डॉक्टर को दो वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में काम करना होता है। सरकार द्वारा नए डॉक्टरों को संविदा नियुक्ति दी जाती है।




