ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, पर्यटकों को कर रहा आकर्षित
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
BasterBreaking NewsCG GovermentChhattisgarhFeatured

बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब, पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

By Mohan Rao
Published: May 26, 2026
Share
SHARE

बैम्बू राफ्टिंग, आमचो लाड़ी होमस्टे और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम दे रहा प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत अनुभव

रायपुर। प्रकृति की अनुपम छटा, जनजातीय संस्कृति की आत्मीयता और रोमांच से सराबोर बस्तर अंचल का खूबसूरत ग्राम मांझीपाल आज छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह मनोरम स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा बस्तर में इको-टूरिज्म, ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई विशेष पहल का ही परिणाम है कि आज मांझीपाल वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इस मॉडल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

कांगेर नदी में बैम्बू राफ्टिंग बना रोमांच का नया केंद्र
मांझीपाल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है। नदी की शांत जलधारा में स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को बेहद रोमांचित कर रही है। राफ्टिंग के दौरान सैलानी घने जंगलों की हरियाली, नदी के किनारों की प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करते हैं। यह गतिविधि केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्तर के जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को भी जीवंत करती है।

आमचो लाड़ी” होमस्टे, विदेशी मेहमानों को भा रही बस्तर की आत्मीयता
मांझीपाल में स्थित “आमचो लाड़ी” होमस्टे आज बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से समझने का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है। अपनी अनूठी और आत्मीय मेजबानी, बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद और पारंपरिक परिवेश के कारण यह होमस्टे विदेशी पर्यटकों के बीच भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है। आधुनिक शहरों की भागदौड़ से दूर यहाँ आने वाले पर्यटक स्थानीय रीति-रिवाजों को जीते हैं, जंगल का आनंद लेते हैं, बर्ड वॉचिंग (पक्षी अवलोकन) करते हैं और बस्तर के पारंपरिक जीवन के साथ आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।

सामुदायिक पर्यटन से स्थानीय युवाओं को मिल रहा रोजगार
राज्य सरकार की कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म (सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन) नीति का सीधा और सकारात्मक असर अब बस्तर के ग्रामीण अंचलों में देखने को मिल रहा है। मांझीपाल के पर्यटन हब बनने से स्थानीय आदिवासी युवाओं को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड, राफ्टिंग संचालक, होमस्टे प्रबंधन और  बस्तरिया हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) की बिक्री के जरिए सीधे तौर पर स्थायी रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल पलायन पर रोक लगी है, बल्कि जनजातीय परंपराओं और स्थानीय विरासत के संरक्षण को भी एक नई दिशा मिली है।

कैसे पहुँचें मांझीपाल
पर्यटकों के लिए मांझीपाल पहुँचना बेहद सुगम और आसान है। यह खूबसूरत पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय जगदलपुर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग होते हुए बेहतरीन पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है, जिससे देश के किसी भी कोने से यहाँ का आगमन सुलभ हो जाता है। प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर पर्यटन मॉडल का बेहतरीन उदाहरण पेश करता मांझीपाल आज सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की एक नई और गौरवशाली पहचान बन चुका है।

ओलंपिक पर कोरोना का साया: शुरू होने से पहले टोक्यो के खेल गांव में मिला कोरोना संक्रमण का पहला मामला… आयोजकों ने की पुष्टि
Big news : रायपुर में पकड़ाए लारेंस विश्नोई के शूटर, बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे बदमाश
Chhattisgarhi Olympics: दुर्ग संभाग ने लंगड़ी दौड़ और सरगुजा संभाग ने रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता में मारी बाजी
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए मशाल गौरव यात्रा को दिखाई हरी झंडी
रायपुर साहित्य उत्सव में विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण, साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर हुई परिचर्चा
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article केन्द्र सरकार ने किया जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन, जस्टिस नावलेकर होंगे अध्यक्ष
Next Article अब 28 मई को रहेगी बकरीद की सरकारी छुट्टी, राज्य शासन ने जारी की संशोधित अधिसूचना

Ro.No.-13784/19

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?