नई दिल्ली। ओडिशा के बालासोर जिले के बहनागा बाजार स्टेशन पर शुक्रवार देर शाम हुए ट्रेन हादसे के बाद केन्द्र सरकार ट्रेनों की सुरक्षा पर जोर देना शुरू कर दिया है। शनिवार को रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि 2024 तक ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (टीसीएएस) या कवच को देशभर की ट्रेनों में स्थापित किए जाने की संभावना है। कवच का पिछले साल परीक्षण किया गया था। यह तकनीक ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर आने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाने में सक्षम बनाती है।
बता दें ओडिशा के बालासोर जिले के बहनागा बाजार स्टेशन पर तीन अलग-अलग पटरियों पर बेंगलुरू-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ियों में तीन-तरफा दुर्घटना हुई। ओडिशा सरकार के विशेष राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार दोनों ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिसमें लगभग 300 यात्रियों की जान चली गई जबकि 900 घायल हो गए। इस हादसे के बाद एक बार कवच को लेकर बहस छिड़ गई है।
जानिए क्या है कवच?
भारतीय रेलवे ने चलती ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाई गई एंटी ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली को ‘कवच’ का नाम दिया है। कवच भारतीय उद्योग के सहयोग से अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा एक स्वदेशी रूप से विकसित एंटी ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है। भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में सुरक्षा के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे ने मार्च 2022 में इसका परीक्षण किया था। रेल मंत्रालय की मानें तो कवच न केवल लोको पायलट को सिग्नल पासिंग एट डेंजर और ओवर स्पीडिंग से बचने में मदद करेगा बल्कि खराब मौसम जैसे घने कोहरे के दौरान ट्रेन चलाने में भी मदद करेगा।
ऐसे काम करता है कवच
कवच ट्रेनों को खतरे पर सिग्नल पार करने और टक्कर रोकने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। यदि चालक गति सीमा के अनुसार ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो यह ट्रेन ब्रेकिंग सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय करता है। यह ऐसे दो इंजनों के बीच टक्कर को रोकता है जिनमें कवच प्रणाली काम कर रही है। यदि देशभर के ट्रेनों में कवच प्रणाली विकसित हो जाती है तो रेल हादसों पर रोक लगने की पूरी संभावना है।




