भिलाई। बीएसपी टाउनशिप में 30 साल की लीज पर संयंत्र के आवासों में रहने वाले लीज धारकों से मोटी रकम वसूली का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में भिलाई निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष संजय दानी ने भिलाई निगम, बीएसपी प्रबंधन व जिला पंजीयक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लीज़ डीड के पंजीयन और नियमितीकरण के आड़ में मोटी रकम आवास धारकों से वसूलने के प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार, नगर निगम व भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से अनुरोध किया कि पंजीयन से संबंधित राशि व नियमितीकरण अर्थदंड सहित तमाम राशि का भुगतान उक्त तीनों विभाग करें और नियमितीकरण से संबंधित समस्त वास्तविक जानकारियां आवास धारकों को दें।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष संजय दानी ने बताया कि 2001 से वर्ष 2003 के बीच भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा 5 चरणों में लीज़ आवास योजना प्रारंभ की गयी जो 20/22 वर्षो की अवधि की हो चुकी है। भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा लगभग 4500 लीज़ आवास धारकों को लिखित पत्र के माध्यम से लीज़ – डीड के पंजीयन के लिए दबाव डाला जा रहा है। लीज़ आवास योजना के माध्यम से जिन-जिन आबंटीतियों आवास में मूल ढांचा को परिवर्तित कर अतिरिक्त निर्माण कर लिया है, उन सभी लीज़ धारकों को जिला पंजीयन कार्यालय, नगर निगम भिलाई और भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा निर्धारित तय की गयी प्रक्रियाओं से गुजर कर ही आवासों के स्वामित्व के बारे में सोचना होगा।
संजय दानी ने कहा कि जिला पंजीयन अधिकारी उन समस्त आवास धारकों के लीज़ का पंजीयन 20/22 वर्ष पूर्व के स्टाम्प ड्यूटी की गणना के आधार पर करेगा या वर्तमान दर पर इसे जिला पंजीयक अधिकारी स्पष्ट करें। वर्ष 2001 से लेकर वर्ष 2023 तक लीज़ डीड के पंजीयन की अंतर की राशि भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन व नगर निगम भिलाई वहन करे क्योंकि पंजीयन से संबंधित विषय पर लीज़ धारकों की गलती नही है। संजय दानी ने सवाल किया है कि लीज़ डीड के पंजीयन के पश्चात जिन-जिन लीज़ धारकों ने मूल ढांचे के अतिरिक्त निर्माण किया है उन आवास धारकों से निगम कितनी राशि अर्थदंड के रूप में लेगा इसे भी स्पष्ट करें।
संजय दानी ने उन समस्त आवास धारकों को आगाह करते हुवे कहा कि निगम द्वारा निर्धारित यह राशि 1लाख रु.से 10 लाख रु.हो सकती है। स्पष्ट है लीज़ डीड के पंजीयन के लिये अलग राशि नियमितीकरण के लिये निगम को अलग राशि देनी होगी। भिलाई इस्पात संयंत्र नगर सेवायें विभाग के महाप्रबंधक विजय शर्मा 14 फरवरी 2023 को एक पत्र जारी किया जिसमें कहा गया कि आबंटी द्वारा सेल-बीएसपी के सहमति के बिना नियमितीकरण का आवेदन नही किया जा सकता है। सेल-बीएसपी ऐसे सभी आबंटीतीयों के विरुद्ध लीज़/लाइसेंस के नियम एवं शर्तों के अंतर्गत कार्यवाही करने के लिये पूर्णतया:स्वतंत्र है।उ आबंटी नियमितीकरण की कार्यवाही अपने जोखिम एवं लागत पर करेंगे। आबंटीतियों द्वारा की गयी ऐसी कोई भी नियमितीकरण की कार्यवाही से सेल-बीएसपी पर बंधनकारी नही है।
बीएसपी के इस पत्र से यह स्पष्ट है कि बीएसपी के आवासों में नियमितीकरण की कार्यवाही की प्रक्रिया में निगम सीधे हस्तक्षेप नही करेगा। आवास लीज़ में एलाटमेंट समस्त आवास भिलाई इस्पात संयंत्र के स्वामित्व में है,उसमे जुर्माना व अर्थदंड निर्धारित करने का अधिकार भी प्रबंधन के पास सुरक्षित है,जबकि प्रबंधन के पास नियमितीकरण करने का अधिकार नही है उसे निगम ही नियमित कर सकता है। पूर्व नेताप्रतिपक्ष ने नगर निगम व बी.एस. पी.प्रबंधन पर 4500 आवास लीज़ धारकों को गुमराह व दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाते हुवे कहा कि वे सेवानिवृत श्रमवीरों के साथ धोखा व छल कर रहे है,वास्तविक स्थिति से उन्हें दूर रखा जा रहा है।
संजय दानी ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि अगर कोई आवास धारक निगम के माध्यम से नियमितीकरण की कार्यवाही करता है तो उन आवास धारकों को प्रबंधन (NOC) अनापत्ति प्रमाण-पत्र नही देगा। इस बात पर गंभीरतापूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता है।पूर्व नेताप्रतिपक्ष संजय दानी ने जिला पंजीयक से जानना चाहा कि आवास धारकों को स्टाम्प ड्यूटी के माध्यम से कितनी राशि देनी पड़ेगी उसे सार्वजनिक करें और निगम आयुक्त ये बतायें की 4500 आवास धारकों को अर्थदंड व नियमितीकरण की कितनी राशि निगम कोष में देनी होगी इसका खुलासा अति आवश्यक है,उसके बाद ही उन समस्त आवास धारकों के लीज़ डीड के पंजीयन व नियमितीकरण के संदर्भ में नोटिस या पत्र लिखा जाये।
पूर्व नेताप्रतिपक्ष संजय दानी ने यह भी सवाल उठाया कि समस्त 4500 लीज़ धारक आज वर्तमान तक भिलाई इस्पात संयंत्र के स्वामित्व व आधिपत्य में है, तो निगम यह स्पष्ट करे कि किन नियमों व शर्तों के तहत जिन्होंने मूल संरचना के अतिरिक्त निर्माण को किस आधार पर नियमित करेंगे इसे निगम आयुक्त सार्वजनिक करे। जबकि इस संबंध में बीएसपी प्रबंधन अपनी लिखित आपत्ति दर्ज करा चुका है।
पूर्व नेताप्रतिपक्ष ने बताया कि जिला पंजीयक द्वारा पूर्व में लीज़ डीड के पंजीयन की प्रक्रिया को पूर्व में मौखिक रूप से मना कर दिया था, फिर अचानक 22 वर्षों बाद इनकी सुध कैसे ली जा रही है यह भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। समस्त लीज़ धारकों द्वारा निगम में संपत्तिकर भी जमा किया जा रहा है। पूरे मुद्दों पर एक नज़र डालें तो यह बात स्पष्ट है कि लीज़ धारक 3 विभागों के अहंकारों के बीच पीस कर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।




