15वें वित्त, डीएमएफ, बस्तर विकास प्राधिकरण और विधायक निधि समेत विभिन्न मदों से संवर रही सुदूर अंचलों की सूरत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के सुदूर और वनांचल क्षेत्र अंतागढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायतों में शासन द्वारा विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। अंदरूनी क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के अंतर्गत शासकीय मदों से बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा और अधोसंरचना निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है। क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए चलाए जा रहे इस महा-अभियान में 15वें वित्त, जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ), परियोजना मद, बस्तर विकास प्राधिकरण, मुख्यमंत्री अधोसंरचना संधारण, मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना, गौण खनिज मद, अधोसंरचना पर्यावरण निधि और विधायक निधि जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट का आपसी समन्वय के साथ उपयोग किया जा रहा है। शासन की इस चौतरफा पहल से जहां एक ओर सुदूर वनांचल में सड़कों, पुल-पुलिया और पेयजल का नेटवर्क मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए गरीबों को अपने पक्के मकान की सौगात मिल रही है।
दूरस्थ अंचलों में आवागमन को सुगम और बारहमासी बनाने के लिए नदी-नालों पर आरसीसी पुलिया और सीसी सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिसके तहत बड़ेपिंजोड़ी के हुर्रापिंजोड़ी, बड़ेतेवड़ा के कोहचूर, बैहासाल्हेभाट, मण्डागांव, मंगतासाल्हेभाट, मातला-ब, भैंसासुर, सुरेवाही, ताड़ोकी, जेठेगांव और अर्रा जैसी अनेक पंचायतों में निर्माण कार्य तेज गति से प्रगति पर हैं। ग्रामीण युवाओं को डिजिटल और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़ेपिंजोड़ी तथा तालाबेड़ा के हायर सेकण्डरी स्कूलों में कंप्यूटर लैब की स्थापना की जा रही है, जबकि उसेली और आमाबेड़ा जैसी प्रमुख पंचायतों में ‘अटल डिजिटल सेवा केंद्र भवन’ तथा बड़ेतोपाल में नवीन पंचायत भवन का निर्माण कर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए आमाबेड़ा व टेमरूपानी के उप स्वास्थ्य केंद्रों में अहाता, शौचालय तथा इंटरलाकिंग रोड का निर्माण कराया जा रहा है।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘हर घर जल’ के संकल्प को धरातल पर उतारा जा रहा है, जिसके लिए एड़ानार, बोड़ागांव, बोंदानार, बुलावण्ड, बैहासाल्हेभाट, कोलियारी, कोदागांव, कोतकुड़, मंगतासाल्हेभाट, आमागांव और अर्रा सहित दर्जनों गांवों में बोर खनन के साथ पानी टंकी एवं मोटर पंप स्थापना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सुदूर गांवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भैंसासुर, गुमझीर और तुमसनार में आधुनिक वॉटर फिल्टर लगाए जा रहे हैं, जबकि बण्डापाल, बेलोण्डी, अमोड़ी, लामकन्हार और कलगांव में स्वच्छता अभियान को गति देने के लिए व्यापक स्तर पर डस्टबीन खरीदी के कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
आस्था के केंद्रों का संरक्षण और सामुदायिक सुदृढ़ीकरण
बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिविरासत, लोक आस्था और जनजातीय परंपराओं को सहेजने के लिए भी शासन द्वारा विशेष बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत एड़ानार,मण्डागांव, आमोड़ी, कोसरोण्डा और ताड़ोकी के कचवर में देवगुड़ी का निर्माण किया जा रहा है, तथा हिन्दूबिनापाल में प्रसिद्ध गढ़मावली माता मंदिर एवं दंतेश्वरी मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार, मरम्मत और संरक्षण-संवर्धन का कार्य पूरी श्रद्धा के साथ कराया जा रहा है। सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पंचायतों में महिला स्व-सहायता समूहों हेतु टीन शेड, सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए रंगमंच, गांवों में उचित मूल्य की दुकानों के लिए पीडीएस भवनों, साप्ताहिक बाजारों में शेड निर्माण और राहगीरों के लिए रेन बसेरा का निर्माण कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का पक्के मकान का सपना हो रहा साकार
बुनियादी विकास के इन कार्यों के साथ-साथ अंतागढ़ विकासखण्ड में जरूरतमंदों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रिकॉर्ड संख्या में मकान स्वीकृत किए गए हैं। क्षेत्र की देवगांव पंचायत में सर्वाधिक 178 आवास, गोडरी में 177, सरण्डी में 158, बुलावण्ड में 156, टेमरूपानी में 116, बण्डापाल में 118 और भैंसगांव में 111 पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं। इसी तरह करमरी में 103, भैंसासुर में 100, ताड़ोकी व आमाबेड़ा में 104-104, आमागांव व मासबरस में 95-95, एड़ानार में 92, अर्रा में 89, तथा कोदागांव, तुमसनार व नवागांव में 87-87 परिवारों के सपनों के घर को मंजूरी मिली है। विकासखण्ड की अन्य लघु पंचायतों जैसे बड़ेपिंजोड़ी, उसेली और कलगांव में 84-84 आवास, मुल्ले में 81, बड़ेतोपाल में 37, कोलियारी में 35, कढ़ाईखोदरा में 31, तालाबेड़ा में 20 और पुलपाड़ में 19 आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। शासन के इन समन्वित और चौतरफा विकास कार्यों से अंतागढ़ के वनांचल क्षेत्रों में न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों का जीवन स्तर भी पहले से कहीं अधिक सुगम और समृद्ध हो रहा है।




