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सफर जो धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ, वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली

By @dmin
Published: December 3, 2021
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सफर जो धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ, वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
सफर जो धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ, वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
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भिलाई। नगर निगम चुुनाव का आगा•ा हो चुका है। राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों का ऐलान कर अपने-अपने पत्ते भी खोल दिए हैं। इस कड़ी में हम आज से क्षेत्र के उन दमदार और प्रभावशाली प्रत्याशियों की चर्चा करेंगे, जिन्हें भविष्य में पार्टियां बड़ी जवाबदारी सौंप सकती है। पहले दिन आज हम कांग्रेस द्वारा वार्ड क्रं. 3 से चयनित युवा, कर्मठ, जुझारू और संघर्षशील प्रत्याशी अरूण सिंह सिसोदिया को जानने की कोशिश करेंगे। श्री सिसोदिया कांग्रेस के बेहद कर्मठ कार्यकर्ता हैं। पार्टी को जब भी उनकी जरूरत हुई, वे समर्पण भाव से सदैव उपस्थित रहे। चाहे श्रमिक हो, छात्र-हित या आम नागरिक, सबके हितों के लिए उन्होंने आगे बढ़कर आवाज उठाई। विगत विधानसभा चुनाव में श्री सिसोदिया वैशाली नगर क्षेत्र से टिकट के प्रमुख दावेदार थे। वहीं पिछले महापौर चुनाव के लिए भी उनका नाम खूब चला था। प्रदेश के सत्ता और संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का उन्हें वरदहस्त है। खासकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के वे बेहद करीबी माने जाते हैं। वर्तमान में वे प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और राजनांदगांव जिले के प्रभारी है। उनकी योग्यता और कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें रिसाली नगर निगम चुनाव का पर्यवेक्षक बनाया है।

अरूण सिंह सिसोदिया… यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा उनके खून में है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भारतीय सेना की रही है। स्वयं श्री सिसोदिया पूर्व सैनिक हैं। जबकि उनके पिता सेना में पूर्व अफसर रह चुके हैं। पिछले करीब डेढ़ दशक से जनहित के विषयों पर लगातार जनांदोलन, अनशन, धरना-प्रदर्शन आदि करते रहे हैं। निजी स्कूलों के खिलाफ उनके संघर्ष ने जहां नई इबारत लिखी, वहीं श्रमिक-हितों के लिए उनके कार्यों को भुला पाना सहज नहीं है। इन्हीं श्रमिकों के लिए उन्होंने अपनी नौकरी भी कुर्बान की और जनांदोलनों के चलते कई एफआईआर भी हुई, यहां तक जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। बावजूद इसके जनता के लिए संघर्ष का जज्बा कम नहीं हुआ। श्री सिसोदिया को एक ईमानदार समाजसेवी और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने, साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। वे काम करने पर भरोसा करते हैं। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने गुटबाजी से दूर पार्टी और संगठन के लिए सिर्फ काम ही किया। यह वजह है कि (पार्टी संगठन के परिप्रेक्ष्य में) क्षेत्र विशेष की बजाए उनकी पूरे जिले में बेहतर छवि उभरती है। कांग्रेस पार्टी ने उनकी योग्यता और कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें भिलाई नगर क्षेत्र के वार्ड क्रं. 3 से प्रत्याशी बनाया है। लेकिन, दरअसल, सब कुछ एक वार्ड तक ही सीमित नहीं है। वास्तव में पार्टी के बड़े नेता उनसे कुछ बड़े और ज्यादा की उम्मीद करते हैं। इसीलिए उन्हें भिलाई के भावी प्रथम नागरिक के रूप में भी देखा जा रहा है।

जब इस बारे में श्री सिसोदिया से सवाल किया गया तो सहज भाव से उनका जवाब था,- ”वरिष्ठ नेताओं का जो आदेश होगा, वे मानेंगे। फिलहाल पूरा ध्यान वार्ड नं. 3 पर है। उनके मुताबिक, ”हमने हमेशा काम करने और उसे नतीजों तक पहुंचाने की कोशिश की है। ढिंढोरा पीटने और श्रेय लेने जैसे प्रयास अकर्मण्यता की ओर ले जाते हैं। वे कहते हैं,- ”हमने भिलाई के लिए काफी कुछ किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ और भी किया जाना है। श्री सिसोदिया जैसे बड़े दिल वालों के लिए एक शायद की चार पंक्तियां याद आतीं हैं-

हदें शहर से निकलीं तो गांव-गांव चली,
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली,
सफर जो धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ,
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली।

काम जो बोलते हैं..
यूं तो अरूण सिसोदिया को लोग जनहित के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति के रूप में जानते हैं, लेकिन राजनीति में सक्रिय होने के पश्चात उन्होंने सैकड़ों ऐसे परिणामोन्मुखी काम किए, जिनके बारे में भी जानना जरूरी है। शिक्षा का अधिकार की लड़ाई व निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ उन्होंने जब आवाज उठाई तो निजी स्कूलों के ठेकेदारों की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ा। अवैध टोल टैक्स वसूली के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा। इसके अलावा उन्होंने महापुरूषों का जन्मदिन गरीब बच्चों के साथ मनाने की एक अभिनव परंपरा शुरू की। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर डॉक्टरों की टीम के जरिए गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सहायता मुहैय्या करवाना, जन-संदेश तिरंगा यात्रा निकालना, दर्जनों स्वयंसेवी और सामाजिक संगठनों से जुड़े रहकर आम लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहना, रक्तदान को प्रोत्साहन देने के लिए स्वयं 40 से ज्यादा बाद रक्तदान करना, युवाओं और छात्रों में देशभक्ति की भावना जागृत करने समेत ऐसे और भी काम है, जो स्वयं गवाही देते हैं कि राजनीति और समाजसेवा एक दूसरे के पूरक है।

जिम्मेदारियां जो निभाईं..
कम ही लोग जानते हैं कि उच्च माध्यमिक की पढ़ाई के तत्काल बाद भारतीय सेना में शामिल हुए अरूण सिंह सिसोदिया वॉलीबाल के राष्ट्रीय और बॉस्केट बॉल के राज्य स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं। राजनीति में आने के पश्चात उन्होंने कई तरह की जिम्मेदारियां निभाई और अब भी निभा रहे हैं। इनमें भारत सरकार (ग्रामीण विकास मंत्रालय की दिशा कमेटी) के सदस्य, जिला कांग्रेस के सचिव, पूर्व सैनिक प्रकोष्छ छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव, पर्यावरण एवं विज्ञान प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव, फैरो स्क्रेप वर्कर्स यूनियन (इंटक) के अध्यक्ष, राषअट्रीय मजदूर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, जन अधिकार परिषद छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ डॉज बॉल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष, पर्यावरण एवं विज्ञान समिति घरा के अधअयक्ष, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन कांग्रेस के जिलाध्यक्ष व राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश सचिव जैसे महती पदों पर रहे।

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