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विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम भाजपा चुनाव लड़ने का दमखम कहां से लाएगी?

By @dmin Published December 2, 2021
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भाजपा में बगावत, मंत्री-सांसद और बागियों को टिकट देने से नाराज कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
भाजपा में बगावत, मंत्री-सांसद और बागियों को टिकट देने से नाराज कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
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भिलाई। जिले के सबसे बड़े भिलाई नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा तो कर दी है, लेकिन विगत 6 वर्षों में विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम रही पार्टी किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। 2015 के अंत में हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उसके बाद से क्षेत्र में भाजपा लगातार कमजोर होती चली गई। यहां तक कि जनहित के मुद्दों से भी उसने किनारा कर लिया। कमजोर संगठन, पराजय के बाद घर बैठे कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेताओं की आपसी उठापटक के चलते पार्टी का जनाधार व्यापक रूप से प्रभावित हुआ। विधानसभा चुनाव में स्थानीय विधायक की पराजय और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का नुकसान भी भाजपा को ही हुआ। ऐसे में 70 वार्डों वाले नगर निगम में पार्टी चुनाव लडऩे का दम-खम कहां से लाएगी, यह खुद पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता है।

स्थानीय चुनावों का बिगूल बजने के साथ ही दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस प्रत्याशियों के नामों पर हुए चिंतन के दौरान जहां पार्टी के नेताओं में एकता और जीत की ललक दिखाई दी तो वहीं भाजपा में एक बार फिर टिकट वितरण को लेकर आपसी मनमुटाव, गुटबाजी और टकराव सामने आया। जबकि कैडरबेस और अनुशासन का दम्भ भरने वाली इस पार्टी से इस बार सामंजस्य की अपेक्षा की जा रही थी। टिकट वितरण के पश्चात वार्डों में जो नाराजगी उभरकर आ रही है, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जबकि पार्टी ने प्रत्याशी चयन से पहले वार्डों में सर्वे करवाया था। इसी सर्वे की रिपोर्ट को सामने रखकर जब नाम चुनने की बारी आई तो कई धड़ों में बँटे नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। जिन वार्डों से सिंगल नाम आए थे, वहां भी दो से तीन नाम और जुड़वा दिए गए। यही वजह है कि अनेक वार्डों में भाजपा के कर्मठ, जुझारू और जमीनी कार्यकर्ता टिकट से वंचित रह गए। इनमें से कई ऐसे लोग थे, जिन्हें गुटबाजी से वास्ता नहीं है।

जाहिर है कि जिन लोगों को टिकट से वंचित किया गया है, अब उन्हीं से यह अपेक्षा की जाएगी कि वे प्रत्याशी की जीत के लिए जुट जाएं। मनमाने टिकट वितरण का एक परिणाम यह भी निकलकर आ रहा है कि पार्टी के नाराज कार्यकर्ता बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने की तैयारी में है। इससे भाजपाई वोटों के विभाजन का बड़ा जोखिम खड़ा हो गया है। कुछ हद तक ऐसे ही हालात कांग्रेस के साथ भी है, लेकिन वहां इतने बड़े पैमाने पर और खुलकर विरोध सामने नहीं आया है। इस लिहाज से देखें तो भाजपाई-निर्दलियों की मौजूदगी से कांग्रेस को खासा फायदा हो सकता है। वैसे भी, लम्बे समय से भाजपा के नेताओं का स्थानीय समस्याओं से सरोकार नहीं रहा। संगठन स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन-प्रदर्शन नहीं किया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा इस बार किन मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी?

स्थानीय मुद्दों की अहमियत
स्थानीय चुनाव में स्थानीय मुद्दों की अहमियत होती है। ऐसे में यदि पार्टी के नेता 15 वर्षीय भाजपाई सत्ता की उपलब्धियों को प्रचार का माध्यम बनाएँगे तो इसका लाभ मिलने की संभावना न के बराबर है। वहीं कैलाश नगर हाउसिंग बोर्ड, कुरूद, खुर्सीपार, कैम्प समेत कई पिछड़े हुए क्षेत्र विकास से महरूम रहे हैं। इन इलाकों की ओर निगम की सत्ता में रहते न भाजपा ने ध्यान दिया, न कांग्रेस ने। अब भी इन इलाकों में साफ-सफाई, गंदे पानी की निकासी की दिक्कतें तो बरकरार है हीं, इसके अलावा शासन की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे ही कई और वार्ड भी हैं, जहां विकास की रफ्तार बेहद कमजोर रही है। निगम की अनदेखी के बावजूद कई दबंग पार्षद अपने क्षेत्र के विकास के लिए शासन से पैसा लाने में कामयाब रहे। नुकसान उन्हें हुआ, जो रायपुर की दौड़ नहीं लगा पाए। ऐसे में जरूरी यह है कि स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया जाए।

टाऊनशिप की समस्याओं से किनारा
भाजपा की बात करें तो संगठन के नेता टाउनशिप क्षेत्र की समस्याओं से जानबूझकर किनारा किए रहे। वहीं, अन्य क्षेत्रों की समस्याओं की ओर भी ध्यान नहीं दिया गया। जब टाउनशिप में गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही थी और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे, तब भी पार्टी के नेता चुप्पी ओढ़े बैठे रहे। छात्र संगठन, सामाजिक संगठनों ने मिलकर घर-घर साफ पानी पहुंचाने की पहल की। अब भाजपा के पार्षद प्रत्याशी अपने वार्डों में किस मुंह से जनता का सामना करेंगे? मुद्दे कोई है नहीं और स्थानीय समस्याओं से दूरी बनाकर रखी गई, ऐसे में भाजपा इन वार्डों में जीत की उम्मीद कैसे करेगी?

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