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जस्टिस रमण बोले- कानून के प्रभाव का असर नहीं करतीं विधायिका, बन जाते हैं ‘बड़े मुद्दे’, न्यायपालिका पर बढ़ रहा बोझ

By @dmin
Published: November 27, 2021
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जस्टिस रमण बोले- कानून के प्रभाव का असर नहीं करतीं विधायिका, बन जाते हैं 'बड़े मुद्दे', न्यायपालिका पर बढ़ रहा बोझ
जस्टिस रमण बोले- कानून के प्रभाव का असर नहीं करतीं विधायिका, बन जाते हैं 'बड़े मुद्दे', न्यायपालिका पर बढ़ रहा बोझ
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नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने कहा है कि विधायिका (संसद व विधानसभाएं) उसके द्वारा बनाए जाने वाले कानूनों के प्रभाव का अध्ययन या आकलन नहीं करतीं इस कारण ये कई बार ‘बड़े मुद्देÓ बन जाते हैं। इस कारण न्यायपालिका पर भी मुकदमों का अत्यधिक बोझ बढ़ जाता है। 

जजों व वकीलों को संबोधित करते हुए सीजेआई रमण ने कहा कि हमें अवश्य याद रखना चाहिए कि हमें चाहे जिस आलोचना या बाधा का सामना करना पड़े, हमारा न्याय देने का मिशन नहीं रूक सकता। हमें न्यायपालिका को मजबूत करने व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का हमारा मार्च जारी रखना है। जस्टिस रमण ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा अदालतों का बगैर किसी खास बुनियादी ढांचे की स्थापना किए व्यावसायिक अदालतों के रूप में रिब्रांडिंग से लंबित मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में संविधान दिवस समारोहों के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि लंबित मुकदमों की समस्या बहुआयामी है। उम्मीद है कि सरकार इस दो दिनी समारोह में इस समस्या के समाधान के लिए आए सुझावों पर विचार करेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे। 

निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 का दिया उदाहरण
सीजेआई रमण ने कहा कि दूसरा मुद्दा यह है कि विधायिका उसके द्वारा पारित किए जाने वाले कानूनों का अध्ययन या आकलन नहीं करतीं। इस कारण कई बार बड़े मुद्दे पैदा हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में धारा 138 इसका एक उदाहरण है। इसके कारा पहले से केसों के बोझ में लदे मजिस्ट्रेटों पर ऐसे हजारों केस का बोझ और बढ़ गया है। इसी तरह विशेष बुनियादी ढांचे का निर्माण किए बगैर मौजूदा अदालतों की व्यावसायिक अदालतों के रूप में रिब्रांडिंंग करने से लंबित मामलों का बोझ कम नहीं होगा। 

उल्लेखनीय है कि निगोशिएबल इस्ट्रुमेंट्स एक्ट की धारा 138 बैंक खाते में पर्याप्त पैसा नहीं होने पर चेक अनादर के मामलों से जुड़ी है। अदालतों में आए दिन ऐसे सैकड़ों केस दायर होते हैं। 

9 हजार करोड़ रुपये देने पर कानून मंत्री की सराहना
चीफ जस्टिस रमण ने सरकार द्वारा न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 9 हजार करोड़ की बड़ी राशि स्वीकृत करने के लिए केंद्रीय कानून मंत्री की सराहना की। उन्होंने कहा कि मैंने कल कहा था कि फंड कोई समस्या नहीं है। समस्या राज्यों द्वारा अनुदान नहीं देना है। इस कारण केंद्रीय फंड ज्यादातर अनुपयोगी पड़ा रहता है। इसलिए मैंने न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए स्पेशियल परपज व्हीकल के गठन का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कानून मंत्री रिजिजू से आग्रह किया कि वे इस प्रस्ताव को अंजाम तक पहुंचाएं।

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