भिलाई। अभी हाल ही में स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि कांग्रेस परिवार में दो नए विधायक शामिल होने जा रहे हैं। इसके बाद से यह कयास लग रहे थे कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का विलय कांग्रेस पार्टी में होने जा रहा है। इस बात को और भी ज्यादा हवा तब मिली, जब जकांछ सुप्रीमो व विधायक डॉ. रेणु जोगी, दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंची। लेकिन अब यह खबर आ रही है कि जकांछ का कांग्रेस में विलय ‘फिलहालÓ नहीं होगा। अलबत्ता, डॉ. रेणु जोगी की मानें तो पार्टी के दो विधायक कांग्रेस में जाने के इच्छुक हैं, वहीं एक विधायक का झुकाव भाजपा के प्रति है।
2018 का विधानसभा चुनाव जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर लड़ा था। इस चुनाव में जकांछ को 5 सीटें तो बसपा को 2 सीटें मिली थी। मरवाही सीट से स्वयं जकाछं के संस्थापक अजीत जोगी तो कोटा सीट से डॉ. रेणु जोगी ने चुनाव जीता था। इसी तरह लोरमी से धर्मजीत सिंह, बलौदाबाजार से प्रमोद कुमार शर्मा व खैरागढ़ से देवव्रत सिंह ने जीत दर्ज की थी। गठबंधन साझीदार बसपा के दो प्रत्याशी जैजैपुर से केशवप्रसाद चंद व पामगढ़ से इंदु बंजारे ने चुनाव जीता था। मतगणना के पहले तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि यह गठबंधन तीसरी शक्ति के रूप में उभरेगा और सत्ता समीकरण तय करेगा। हालांकि मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा निर्णय देते हुए उसे 90 में से 70 सीटें सौंपी। सत्ता में रहते चुनाव लडऩे वाली भारतीय जनता पार्टी को महज 13 सीटों पर संतोष करना पड़ा। ऐसे में जकांछ-बसपा गठबंधन को मिली कुल 7 सीटों का सत्तापक्ष अथवा विपक्ष के लिहाज से ज्यादा महत्व नहीं रह गया। मरवाही विधायक व जकांछ संस्थापक अजीत जोगी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी के हाथ से यह सीट भी कांग्रेस के पास चली गई।
इधर, ता•ाा घटनाक्रम के तहत यह खबर आ रही है कि जकांछ के 3 विधायक जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं। इस बात का खुलासा स्वयं पार्टी सुप्रीमो डॉ, रेणु जोगी ने किया। उनके मुताबिक, 2 विधायक कांग्रेस और 1 विधायक भाजपा में जा सकते हैं। खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह व बलौदाबाजार के विधायक प्रमोद शर्मा का नाम लेते हुए डॉ. जोगी ने कहा कि ये दोनों विधायक कांग्रेस नेताओं के सम्पर्क में हैं और उनकी नजदीकियां भी कांग्रेसियों के साथ बढ़ रही है। वहीं लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह का भी रूझान भाजपा के प्रति सामने आया है। डॉ. जोगी के बिलासपुर में दिए बयान के मुताबिक, धर्मजीत सिंह का राजनीतिक पड़ाव भविष्य में भाजपा हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि अजीत जोगी के निधन के बाद खाली हुई मरवाही सीट पर उपचुनाव में पार्टी ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन दिया था। बताया जाता है कि पार्टी के इस राजनीतिक निर्णय के पीछे धर्मजीत सिंह की अहम् भूमिका थी। उसी वक्त से यह अटकलें तेज हो गई थी कि आने वाले दिनों या फिर वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले धर्मजीत सिंह जकांछ का दामन छोड़कर भाजपा के पाले में जा सकते हैं। वैसे, 4 बार के विधायक रहे सिंह को पार्टी ने विधायक दल का नेता बनाकर पर्याप्त सम्मान दिया था। वे विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2013 में वे लोरमी सीट से चुनाव हार गए थे। इसी दौरान अजीत जोगी ने नई क्षेत्रीय पार्टी बनाई तो वे भी नई पार्टी के साथ हो लिए। पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन पर कांग्रेस या भाजपा से चुनाव लडऩे के भी कयास लगते रहे। अब स्वयं जकांछ सुप्रीमो ने उन पर राजनीतिक टिप्पणी कर अटकलबाजियों पर विराम लगाया है।
जोगी के निधन के बाद बदले हालात
अजीत जोगी के निधन के पश्चात जकांछ के भीतरी हालात ते•ाी से बदले। जिस तरह से पार्टी ने मरवाही उपचुुनाव में भाजपा को समर्थन दिया, उससे दो विधायक देवव्रत सिंह व प्रमोद शर्मा नाराज हो गए। उन्होंने जकांछ को भाजपा की बी पार्टी तक बता दिया। इससे भी आगे बढ़कर उन्होंने नया राजनीतिक दल बनाने तक का ऐलान किया था। पार्टी के सूत्रों की मानें तो डॉ. रेणु जोगी और अमित जोगी को भी काफी पहले से ही इस बात की खबर है कि तीन विधायक टूट सकते हैं। गौरतलब है कि देवव्रत सिंह खैरागढ़ राजपरिवार से ताल्लुक रखथे हैं। वे कांग्रेस से 1 बार सांसद और 3 बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने पीसीसी पर कई तरह के आरोप लगाते हुए अपना इस्तीफा राहुल गांधी को भेजा था। बाद में वे जकांछ से जुड़ गए।




