नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका दायर कर नेताओं के कोविड-19 के इलाज के लिए रेमडेसिविर खरीदने और वितरित करने में गड़बड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और इनकी सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया गया है। याचिका में सवाल किया गया है कि जब मरीज इस दवाई के लिए जगह-जगह भटक रहे हैं तो नेताओं को यह दवाई कैसे मिल रही है? नेता ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स कानून के तहत आवश्यक अनुमति के बिना बड़ी मात्रा में दवाइयां कैसे खरीद पा रहे हैं जबकि आम जनता को यह दवा नहीं मिल रही है?

दवा देने से से इनकार करना गंभीर अपराध
याचिकाकर्ता हृदृय फाउंडेशन के अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज दीपक सिंह ने दलील दी, ‘अपने राजनीतिक लाभ के लिए किसी को दवाइयां देने से इनकार करना बहुत गंभीर प्रकृति का अपराध है और इससे देशभर में कोविड-19 मरीजों पर असर पड़ रहा है।
मेडिकल माफिया को संरक्षण दे रहे दल: विराग गुप्ता
सिंह की ओर से पेश हुए वकील विराग गुप्ता ने आरोप लगाया कि नेता बड़े पैमाने पर रेमडेसिविर जैसी अहम दवाइयों की जमाखोरी करने और उनके वितरण में शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है, ‘राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक शक्तियों का फायदा उठा रहे हैं और मेडिकल माफिया को संरक्षण दे रहे हैं।
अवैध वितरण करने वाले सांसद-विधायकों को अयोग्य करार दें
याचिका में प्राथमिकी दर्ज करने और सीबीआई जांच की मांग के अलावा कोविड-19 दवाओं की कालाबाजारी में शामिल लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत हिरासत में लेने तथा इनकी जमाखोरी तथा अवैध वितरण में शामिल पाए जाने वाले सांसदों तथा विधायकों को अयोग्य करार देने का भी अनुरोध किया गया है।




