नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने किसान आंदोलन के बारे में दुष्प्रचार और भड़काऊ बातें फैला रहे एकाउंट और हैशटैग के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में ट्विटर के देरी करने पर बुधवार को ‘कड़ी नाराजगी प्रकट की। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय किया कि कंपनी के अपने भले ही कोई नियम हों, लेकिन उसे देश के कानूनों का पालन करना ही चाहिए।
ट्विटर ने 500 से अधिक एकाउंट निलंबित किए हैं। हालांकि उसने अभिव्यक्ति की आजादी को अक्षुण्ण रखने की जरूरत का हवाला देते हुए निकायों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के एकाउंट पर रोक लगाने से इंकार किया है।
आईटी सचिव और ट्विटर के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच डिजिटल संवाद के दौरान सरकार ने इस मंच से कहा कि भारत में काम कर रहे कारोबारी निकाय के रूप में उसे कानूनों एवं लोकतांत्रिक संस्थानों का सम्मान करना ही चाहिए और देश में सद्भाव बिगाडऩे और अशांति फैलाने से जुड़े अभियानों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। सचिव ने किसान आंदोलन के संदर्भ में भड़काऊ बातों पर कार्रवाई करने से जुड़े सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने पर ट्विटर की आलोचना की।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि आईटी विभाग, तय कानूनी प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है। इसके बाद भी अगर ट्विटर नहीं मानता है तो कार्रवाई हो सकती है। आईटी एक्ट की धारा में सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। चीनी एप जब बंद किए गए तो संबंधित कंपनियों ने सरकार से गुहार लगाई थी कि ऐसा न किया जाए। उन्हें भी साफतौर पर बता दिया गया था कि राष्ट्र विरोधी गतिविधि चाहे वो किसी भी प्लेटफार्म पर हो, उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले में कानूनी मंत्रालय की राय ली जा रही है।
हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए में यह बात लिखी है कि कोई अधिकारी, केंद्र सरकार के आदेशों को नहीं मानता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। सजा और जुर्माना, दोनों का प्रावधान है। शुक्रवार तक कानून मंत्रालय की सलाह मिल जाएगी। उसके बाद ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई संभव है। अगर इस मामले में गिरफ्तारी करनी पड़ी तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।





