नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को नए संसद भवन का शिलान्यास और भूमि पूजन करेंगे। इस समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्रीय मंत्री और कई देशों के राजदूत शिरकत करेंगे। चार मंजिला नए संसद भवन का निर्माण 971 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 64500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में किया जाएगा। नया संसद भवन भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ यानी 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा।
नए संसद भवन के निर्माण का प्रस्ताव उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने क्रमश: राज्यसभा और लोकसभा में 5 अगस्त 2019 को किया था। प्रत्येक संसद सदस्य को नवनिर्मित श्रम शक्ति भवन में कार्यालय के लिए 40 वर्ग मीटर स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि नए संसद भवन का डिजाइन अहमदाबाद के मैसर्स एचसीपी डिजाइन और मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है और इसका निर्माण कार्य टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। नए भवन को सभी आधुनिक दृश्य- श्रव्य संचार सुविधाओं और डाटा नेटवर्क प्रणालियों से सुसज्जित किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान संसद के सत्रों के आयोजन में कम से कम व्यवधान हो और पर्यावरण संबंधी सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।
लोकसभा में बैठ सकेंगे 888 सदस्य
लोकसभा सचिवालय के मुताबिक नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। संयुक्त सत्र के दौरान इसमें 1224 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसी प्रकार, राज्यसभा कक्ष में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। मौजूदा संसद भवन से सटी त्रिकोणीय आकार की नई इमारत सुरक्षा सुविधाओं से लैस होगी। नई लोकसभा मौजूदा आकार से तीन गुना बड़ी होगी। राज्यसभा के आकार में भी वृद्धि की गई है। नए भवन की सज्जा में भारतीय संस्कृति, क्षेत्रीय कला, शिल्प और वास्तुकला की विविधता का समृद्ध मिलाजुला स्वरूप होगा। डिजाइन योजना में केंद्रीय संवैधानिक गैलरी को स्थान दिया गया है। आम लोग इसे देख सकेंगे। इमारत उच्चतम संरचनात्मक सुरक्षा मानकों का पालन करेगी, जिसमें भूकंपीय क्षेत्र 5 की आवश्यकताओं का पालन करना भी शामिल है और इसे रखरखाव तथा संचालन में आसानी होने के लिए डिजाइन किया गया है। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, नया संसद भवन भारत के लोकतंत्र और भारतवासियों के गौरव का प्रतीक होगा जो न केवल देश के गौरवशाली इतिहास अपितु इसकी एकता और विविधता का भी परिचय देगा।





