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प्रदेश में पढऩा-लिखना अभियान के प्रथम चरण में ढाई लाख लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य…. राज्य स्तरीय वेबीनार में दी जानकारी

By @dmin Published September 8, 2020
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In the first phase of the study-writing campaign in the state
In the first phase of the study-writing campaign in the state
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रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में इस वर्ष पढऩा-लिखना अभियान की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें 15 वर्ष से अधिक आयु समूह के असाक्षरों को स्वयंसेवी अनुदेशकों के माध्यम से साक्षर किया जाएगा। प्रदेश के लिए प्रथम चरण में ढ़ाई लाख लोगों को साक्षर किए जाने का लक्ष्य है। डॉ. टेकाम अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर आज राज्य स्तरीय वेबीनार में शिक्षा और साक्षरता से जुड़े राज्य, जिला, विकासखंड और मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों सहित विषय विशेषज्ञ, स्त्रोत व्यक्ति, ई-एजुकेटर एवं ई-शिक्षार्थी एवं सीख मित्र से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 में सब घरों में रहकर कार्य कर रहे हैं, ऐसे समय में डिजिटल साक्षरता दूरदराज के क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि साक्षरता से जुड़े अभियान और कार्यक्रम कोरोना संक्रमण कम होने के पश्चात प्रारंभ किया जाएगा। पढऩा-लिखना अभियान बुनियादी साक्षरता घटक 4 माह के चक्र पर केन्द्रित होगा। आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए यह कार्यक्रम ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शुरू होगा। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में राज्य साक्षरता केन्द्र और डाइट में जिला साक्षरता केन्द्र की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी समय में बुनियादी साक्षरता, बुनियादी शिक्षा, सतत् शिक्षा, कौशल विकास, पुस्तकालय-वाचनालय, डिजिटल साक्षरता, जीवन पर्यन्त शिक्षा, मोबाइल वाचनालय एवं ई-लाईब्रेरी जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया जाएगा।

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम 27 जिलों के 50 केन्द्रों में प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य नवसाक्षरों को डिजिटल साक्षर बनाना है। उन्होंने कहा कि यह हर्ष की बात है कि सम्पूर्ण भारत में छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है, जहां यूनेस्को के डिजिटल साक्षर होने का परिपालन अभिभूत किया जा रहा है। गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ कार्यक्रम अंतर्गत अब तक लगभग 10 हजार शिक्षार्थी डिजिटल साक्षर बने हैं।

मंत्री डॉ. टेकाम ने वेबीनार में बताया कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर वेबीनार में शामिल सभी ई-एजुकेटर्स को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 17 नवंबर 1965 को यूनेस्को ने 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया। इसे पहली बार 1966 में मनाया गया। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक रूप से साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालना है। डॉ. टेकाम ने कहा कि तत्कालिन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी द्वारा 5 मई 1981 में निरक्षरों को पूर्ण रूप से साक्षर करने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण की स्थापना की गई। गत वर्ष यूनेस्को ने साक्षरता दिवस का विषय डिजिटल साक्षर वर्ष के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र बहुत बड़ा है। जीवन के प्रारंभिक वर्षों में बच्चे अपने माता-पिता का परिवार, समुदाय और परिवेश के साथ बहुत कुछ सीखते है, इसके साथ ही उनकी औपचारिक शिक्षा शाला प्रवेश के साथ प्रारंभ होती है। प्रारंभिक वर्षों में ही बच्चों की पढ़ाई, स्कूल छोडऩा हमारे देश में शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। इसलिए छत्तीसगढ़ में श्रेष्ठ पालकत्व कार्यक्रम के माध्यम से पालको एवं अभिभावकों को जागरूक बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनकी सहभागिता से बच्चों की शिक्षा स्तर में गुणात्मक सुधार लाया जा सके।

मंत्री डॉ. टेकाम ने शिक्षा एवं साक्षरता के महत्वकांक्षी कार्य में लगे अमले को बधाई और शुभकामना देते हुए कहा कि वर्तमान में कोविड-19 महामारी के चलते यह कार्यक्रम संचालित नही है। जिलों से लगातार आ रही मांग को दृष्टिगत रखते हुए कोविड-19 की स्थिति सामान्य होते ही पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम, पढऩा-लिखना अभियान का क्रियान्वयन किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के राज्य साक्षरता मिशन के जिला और विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी एवं समस्त अमले, शिक्षा एवं साक्षरता से जुड़े प्रत्येक स्तर के कर्मियों, ई-एजुकेटर, सीख मित्र गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ कार्यक्रम से जुड़े सभी शिक्षार्थियों, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।

वेबीनार में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के संचालक श्री डी. राहुल वेंकट ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के महत्व को बताते हुए कहा कि देश के विकास में साक्षरता बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष साक्षरता दिवस का मुख्य थीम ‘कोविड-19 के समय व इसके बाद में साक्षरता कार्यक्रम का क्रियान्वयन कैसे होÓ है। कार्यक्रम के प्रारंभ में दंतेवाड़ा की शिक्षिका श्रीमती नीलिमा कर्मकार द्वारा राज्यगीत प्रस्तुत किया गया।

राज्य साक्षरता मिशन के सहायक संचालक श्री प्रशांत पांडेय, श्री दिनेश कुमार टांक शिक्षा सलाहकार श्री सत्यराज अय्यर, रिसोर्स पर्सन श्री मदनमोहन उपाध्याय, जिला परियोजना अधिकारी कोरिया यूके जायसवाल, जिला परियोजना अधिकारी सरगुजा गिरीश गुप्ता, ई-एजुकेटर सरगुजा प्रीति तिवारी, बस्तर के शिक्षार्थी गोमती बेहरा, दंतेवाड़ा की सीख मित्र कमलोचन बिंजानी ने अपने अनुभव साझा किए। वेबीनार में विषय विशेषज्ञ, स्त्रोत व्यक्ति, ई-एजुकेटर एवं ई-शिक्षार्थी एवं सीख मित्र विशेष रूप से शामिल हुए। इसके अलावा प्रदेश में शिक्षा और साक्षरता से जुड़े राज्य, जिला एवं विकासखंड के मैदानी स्तर के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।

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