मुंबई (एजेंसी)। महाराष्ट्र के सांगली जिले के भोसे गांव के ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई और 400 साल पुराने बरगद के एक पेड़ को बचा लिया गया। ये पेड़ आजकल सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। दरअसल, ये पेड़ निर्माणाधीन राजमार्ग की सर्विस रोड उसके पास से गुजरता है। इसी वजह से इसे काटकर सर्विस रोड बनाई जा रही थी। ऐसे में भोसे गांव के लोगों ने पेड़ के आसपास रैली की। इसके अलावा पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया।
16 जुलाई को, राज्य के पर्यटन और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र लिखा। इसमें राज्य के लिए 166 सड़क पर रत्नागिरी-सोलापुर राजमार्ग पर बदलाव करके पेड़ को बचाने का अनुरोध किया गया। पत्र में कहा गया कि येल्लम्मा मंदिर के पास स्थित 400 साल पुराना पेड़, लगभग 400 वर्ग मीटर का फैला हुआ है। यह इस क्षेत्र के इतिहास का एक हिस्सा होने के साथ ही कई पक्षियों और जानवरों की प्रजातियों का घर है।
इसके बाद ठाकरे ने बुधवार को ट्वीट किया कि नितिन गडकरी ने उनके अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रत्नागिरी-नागपुर राजमार्ग के पुनर्निर्माण पर काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पेड़ का मुख्य तना, जो सर्विस रोड के रास्ते में आ रहा था, उसे बरकरार रखा जाएगा, हालांकि इसकी कुछ शाखाओं को काटा जाएगा।
अधिकारी ने कहा, ‘पेड़ को बचाने के लिए एक योजना बनाई गई। मुख्य कैरिजवे के लिए पेड़ की कुछ शाखाओं को काटने की आवश्यकता होगी, लेकिन पेड़ के तने को बरकरार रखने के लिए इसे लगभग 20-25 मीटर के लिए बंद करके सर्विस रोड में बदलाव किया जाएगा।
भोसे के नागरिकों का कहना है कि उन्हें इस महीने की शुरुआत में पता चला कि राजमार्ग की सर्विस रोड के लिए पेड़ को पूरी तरह से काटना होगा। लॉकडाउन की वजह से हम बड़ी संख्या में इक_ा नहीं हो सकते थे। हालांकि हमने इसे बचाने के लिए हर तरह की कोशिश की। हमने सोशल मीडिया पर पेड़ को लेकर बात की और बताया कि इसे बचाना क्यों जरूरी है। आखिरकार उनकी ये कोशिश रंग लाई और पेड़ को बचा लिया गया।
रंग लाई ग्रामीणों की मेहनत, 400 साल पुराने पेड़ के लिए गडकरी ने बदला हाईवे का नक्शा




