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कोरोना से जंग: भारत में 54 फीसदी कंपनियों के पास घर से कामकाज की सुविधा नहीं

By @dmin Published March 20, 2020
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नई दिल्ली,कोरोना के कहर को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियां और सरकारी विभाग कर्मचारियों को घर से ही कामकाज करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। भारत में भी यह कवायद चल रही है, लेकिन एक रिपोर्ट में सामने आया है कि देश की 54 फीसदी कंपनियों के पास वर्क टू होम के लिए पर्याप्त तकनीक और संसाधन ही नहीं हैं।
गार्टनर की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी आईटी कर्मचारियों के लिए वीडियो कान्फ्रेसिंग और अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से दूरदराज या घर से काम करना आसान है। लेकिन ज्यादातर गैर आईटी कंपनियों और छोटे-मझोले उद्योगों के पास विकल्प ही नहीं है। पुराने डेस्कटॉप-लैपटॉप, खराब नेटवर्क, कनेक्टिविटी और यूपीएस बैकअप न होने से वे लाचार नजर आ रही हैं। दो तिहाई से ज्यादा कर्मचारियों को गूगल हैंगआउट, स्काइप, जूम, सिस्को वेबएक्स, गूटोमीटिंग, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, फ्लॉक जैसे ग्रुप चैट, डॉक्यूमेंट शेयरिंग और समूह के लिए काम करने वाले सॉफ्टवेयर की जानकारी तक नहीं है।

व्यूसोनिक के बिजनेस हेड मुनीर अहमद का कहना है कि रिमोट वर्किंग न होने से मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कारपोरेट और शिक्षा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित है। को वर्किंग स्पेस में काम करने वाली कंपनियां भी प्रभावित हैं, क्योंकि वे साझेदारी में नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। क्लाउडकनेक्ट कम्यूनिकेशंस के कार्यकारी प्रमुख गोकुल टंडन के मुताबिक, टेलीमेडिसन, टेलीवर्किंग का ढांचा बेहतर करने की जरूरत है। यह उनके लिए सबक है और किसी अन्य वैश्विक आपदा के लिए उन्हें अभी से हर कर्मचारी को आधुनिक डिजिटल स्किल का प्रशिक्षण देना शुरू कर देना चाहिए। गार्टनर के वरिष्ठ निदेशक सैंडी शेन का कहना है कि बाजार की मांग है कि कंपनियों का डिजिटल ढांचा न केवल बाहरी हमले, बल्कि आंतरिक चुनौतियों के लिए मजबूत हो।

महंगे सॉफ्टवेयर, तेज इंटरनेट जैसी अड़चनें

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित शर्मा ने कंपनियों के सामने वर्क टू होम को लेकर कई अड़चनें गिनाई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सॉफ्टवेयर बेहद महंगे होते हैं और कई सिर्फ कार्यालय में इस्तेमाल हो सकते हैं, लैपटॉप पर नहीं चलते। ऑफिस का इंटरनेट काफी तेज होता है। बीपीओ और केपीओ का काम करने वाली कंपनियां घर से काम नहीं कर सकतीं। छोटी कंपनियों के लिए ग्रुप मीटिंग और संवाद भी घर से संभव नहीं है। क्लाइंट रिक्वायरमेंट (ग्राहकों की जरूरतें) भी कार्यालय के अनुसार होती हैं और वे किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहते।

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