प्रति माह हो रहा राजस्व का नुकसान, पंजीकृत एडवर्टाइजर्स के साथ नाइंसाफी, जोन-1 में निगम कार्यालय के सामने भी भरमार
भिलाई। नगर निगम क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर स्कूल, कालेज, अस्पताल, क्लिनिक एवं अन्य प्रतिष्ठानों के बैनर पोस्टर लगे हैं। इनमें से 90 फीसद से ज्यादा अवैध हैं जिनके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। इससे न केवल नगर निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि पंजीकृत एडर्वाइजर्स को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिजली के खंबों पर लगे ये पोस्टर बैनर लटकते-गिरते रहते हैं जिसके कारण यातायात की सुरक्षा भी खतरे में आ जाती है।
शहर के पंजीकृत एडर्वाइजर्स के अनुसार अवैध बैनर-पोस्टरों और विज्ञापन बोर्डों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर विभिन्न मुख्य मार्गों पर बिजली के खंभों तक बड़ी संख्या में बैनर-पोस्टर और विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि भिलाई नगर निगम के जोन-1 कार्यालय के सामने भी सैकड़ों विज्ञापन बोर्ड और पोस्टर नजर आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।
स्थानीय लोगों और विज्ञापन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाने का सिलसिला लंबे समय से जारी है। इस संबंध में कई बार नगर निगम का ध्यान भी आकर्षित कराया गया, बावजूद इसके स्थिति में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया।

नियमों का पालन करने वालों को नुकसान
एक ओर नगर निगम द्वारा अधिकृत स्थानों पर विज्ञापन लगाने वाले कारोबारियों और एजेंसियों से निर्धारित शुल्क एवं टैक्स लिया जाता है, वहीं दूसरी ओर यदि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाए जा रहे हैं तो इससे नियमों का पालन करने वाले विज्ञापनदाताओं के कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। नियमों के तहत शुल्क जमा कर विज्ञापन लगाने वाले कारोबारियों का कहना है कि जब अवैध विज्ञापनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी तो नियमों के मुताबिक शुल्क देने वालों के साथ प्रतिस्पर्धा में असमानता की स्थिति जारी रहेगी।
कार्रवाई क्यों नहीं? उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निगम कार्यालय के सामने ही बड़ी संख्या में विज्ञापन बोर्ड और पोस्टर लगे हुए हैं, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इन पर नहीं पड़ती? यदि ये विज्ञापन अधिकृत हैं तो निगम को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और यदि इनमें से बड़ी संख्या में विज्ञापन बिना अनुमति लगाए गए हैं, तो अब तक इन्हें हटाने और संबंधित लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? शहर में लगातार बढ़ रहे अवैध विज्ञापनों को लेकर अब यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर इन विज्ञापनदाताओं पर कार्रवाई करने में नगर निगम प्रशासन इतनी नरमी क्यों बरत रहा है?
जवाबदेही तय करने की मांग
नागरिकों और नियमों का पालन कर विज्ञापन लगाने वाले कारोबारियों ने नगर निगम प्रशासन से शहरभर में लगे विज्ञापन बोर्ड और बैनर-पोस्टरों का सर्वे कराने, अवैध विज्ञापनों की पहचान कर उन्हें तत्काल हटाने तथा जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करता है या फिर अवैध विज्ञापन का यह सिलसिला यूं ही शहर की सड़कों और बिजली के खंभों पर चलता रहेगा।




