जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में सोमवार यानी 31 अगस्त को आने वाला फैसला फिलहाल टल गया है। NIA कोर्ट ने फैसला पांच दिन के लिए टाल दिया है। अब इसका फैसला 5 सितंबर को आएगा। इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 10 आरोपियों पर फैसला आना है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए हैं।
बता दें स्पेशल NIA अदालत ने मामले में 10 अगस्त की तारीख अंतिम बहस के लिए तय की थी। इसी दिन दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। इस मामले में एनआईए कोर्ट ने 31 अगस्त को फैसला सुनाने का निर्णय लिया था। सालों से पीड़ित परिवारों और पूरे प्रदेश की नजर सोमवार को आने वाले इस फैसले पर बनी हुई थी। हालांकि फैसला पांच दिन टलने के बाद इसके लिए और इंतजार करना होगा।

जानिए क्या था झीरम कांड
झीरम कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा कांड माना जाता है। कांग्रेस की परिवर्तन रैली की शुरुआत के दौरान 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा। यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ से दो घंटे तक फायरिंग होती रही। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। नक्सलियों ने गाड़ियां चेक कर एक एक का नाम पूछकर हत्या की। कांग्रेस के दिग्गज नता महेंद्र कर्मा को 100 गोलियां मारी गईं। हमला पूरी तरह सुनियजित था और खुफिया तंत्र को भी इसकी भनक नहीं थी।




