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छत्तीसगढ़ की बेटी अर्चना एक्का के ‘ईको ब्रिक बैंक’ नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

By Mohan Rao Published August 17, 2026
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रायगढ़। प्लास्टिक कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में देखने वाली रायगढ़ जिले की छात्रा अर्चना एक्का ने अपने नवाचार से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ की कक्षा 11वीं की छात्रा अर्चना के नवाचार ‘ईको ब्रिक बैंक रू प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलना’ का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि उनकी रचनात्मक सोच, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने की क्षमता को दर्शाती है।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में अर्चना ने दुर्ग स्थित छत्रपति शिवाजी प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईटी) में आयोजित राज्य स्तरीय मार्गदर्शन सत्र में रायगढ़ जिले का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञों और मार्गदर्शकों के समक्ष अपने नवाचार का प्रतिरूप प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों के आधार पर परियोजना में आवश्यक सुधार किए गए। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी वास्तविक समस्या के समाधान और परियोजना की उपयोगिता को देखते हुए ‘ईको ब्रिक बैंक’ का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए किया गया।

प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की पहल
अर्चना की परियोजना का उद्देश्य अनुपयोगी समझकर फेंके जाने वाले प्लास्टिक को एकत्रित कर उसका पुनः उपयोग करना और उससे टिकाऊ एवं उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। परियोजना में प्लास्टिक कचरे से फर्नीचर सहित विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की संभावनाओं पर काम किया गया है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है। ‘ईको ब्रिक बैंक’ के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ ही लोगों को कचरे के पुनः उपयोग, संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए जागरूक करने का प्रयास किया गया है।

मार्गदर्शन और विद्यालय के सहयोग ने बढ़ाया आत्मविश्वास
अर्चना अपनी सफलता का श्रेय अपनी मार्गदर्शक अनामिका लहरे के निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन को देती हैं। विद्यालय के प्राचार्य हकीम उल्लाह खान और व्याख्याता रवि कुमार यादव ने भी परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। विद्यालय में विद्यार्थियों को नवाचार, प्रयोग और रचनात्मक गतिविधियों के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। विद्यालय में तैयार सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी प्रोत्साहन का परिणाम है कि अर्चना का स्थानीय स्तर पर शुरू किया गया विचार अब राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने में सफल हुआ है।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनी अर्चना की पहल
अर्चना एक्का की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ और रायगढ़ जिले के लिए भी गौरव का विषय है। उनकी परियोजना यह संदेश देती है कि नवाचार के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं होती। आसपास मौजूद किसी समस्या को संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टिकोण से देखने पर भी समाधान की नई राह निकाली जा सकती है। प्लास्टिक कचरे में उपयोगिता और संभावना तलाशने वाली अर्चना की सोच अब राज्य की सीमाओं से आगे राष्ट्रीय मंच तक पहुँच गई है। उनकी यह पहल नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।

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