रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर ने मरीजों को अधिक सुविधाजनक, त्वरित और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए नवीनीकृत डोम-1 फलेबोटोमी ज़ोन का शुभारंभ किया है। इसके साथ ही बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के मरीजों के लिए पेपरलेस लैबोरेटरी टेस्ट रिक्विजिशन (प्रयोगशाला जांच अनुरोध) प्रणाली लागू कर दी गई है। इस नई सुविधा का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया।

आधारभूत संरचना के उन्नयन, केंद्रीय वातानुकूलन प्रणाली की स्थापना तथा मरीजों की सुविधाओं में विस्तार के बाद फलेबोटोमी ज़ोन को पुनः नवीनीकृत डोम-1 में स्थानांतरित किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब बाह्य रोगी विभाग के मरीजों को प्रयोगशाला जांच के लिए प्रिंटेड पर्ची लेकर फलेबोटोमी ज़ोन आने की आवश्यकता नहीं होगी। चिकित्सक द्वारा जांच की इलेक्ट्रॉनिक अनुशंसा किए जाने के साथ ही उसकी जानकारी सीधे प्रयोगशाला सूचना प्रणाली (लेबोरेटरी इन्फॉर्मेशन सिस्टम) में दर्ज हो जाएगी। इसके बाद मरीज सीधे फलेबोटोमी काउंटर पर पहुंचकर पंजीकरण करा सकेंगे, जहां कंप्यूटर पर उपलब्ध डिजिटल विवरण के आधार पर बारकोड तैयार कर रक्त अथवा अन्य नमूनों का संग्रह किया जाएगा।

संस्थान के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था से कागजी प्रक्रिया में कमी आएगी, मरीजों का प्रतीक्षा समय घटेगा, जांच पर्ची खोने जैसी समस्याएं समाप्त होंगी तथा परामर्श से लेकर नमूना संग्रह तक की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और सुगम बनेगी। साथ ही यह प्रणाली जांच की सटीकता और कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ कागज की खपत कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी।
इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एम्स रायपुर मरीजों को बेहतर, सरल और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार डिजिटल तकनीकों को अपनाने के साथ अस्पताल की आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अस्पताल प्रशासन, इंजीनियरिंग विंग, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) टीम तथा प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
एम्स रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) डी. के. त्रिपाठी ने कहा कि पुनः प्रारंभ किया गया फलेबोटोमी ज़ोन संस्थान की डिजिटल परिवर्तन यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बताया कि पेपरलेस लैबोरेटरी टेस्ट रिक्विजिशन प्रणाली से प्रतिदिन आने वाले हजारों बाह्य रोगी विभाग के मरीजों को तेज़, सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त सेवाएं मिलेंगी, वहीं अस्पताल की कार्यकुशलता और मरीजों की सुरक्षा भी और मजबूत होगी।
उद्घाटन के बाद फलेबोटोमी यूनिट के प्रभारी एवं उप नर्सिंग अधीक्षक जेक्का प्रदीप कुमार ने कार्यपालक निदेशक को नई डिजिटल कार्यप्रणाली, बारकोड जनरेशन काउंटर, रक्त नमूना संग्रह क्षेत्र तथा बच्चों के लिए विकसित बाल-अनुकूल सैंपल कलेक्शन कक्ष का अवलोकन कराया। इस कक्ष में ऑडियो-वीडियो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि बच्चों को रक्त नमूना देने के दौरान तनावमुक्त और सहज वातावरण मिल सके।
समारोह में उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मवीर सिंह चौहान, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) विराट गल्होत्रा, उप चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) सबाह सिद्दीकी, प्रोफेसर (डॉ.) मृत्युंजय राठौर, प्रोफेसर (डॉ.) तुषार जगजापे, डॉ. दिबाकर साहू, डॉ. रमेश चंद्राकर सहित संकाय सदस्य, नर्सिंग अधिकारी, प्रयोगशाला कर्मी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि फलेबोटोमी से संबंधित सभी सेवाएं तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ किए गए डोम-1 फलेबोटोमी ज़ोन से संचालित की जाएंगी। प्रयोगशाला जांच कराने वाले बाह्य रोगी विभाग के मरीज अब सीधे डोम-1 स्थित फलेबोटोमी ज़ोन में पहुंचकर अपना नमूना दे सकेंगे। एम्स रायपुर ने कहा है कि संस्थान नवाचार, आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से मरीजों को सुलभ, सुविधाजनक और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।




