दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA), बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा “सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी न्याय” की अवधारणा को साकार करने 18 जुलाई 2026 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में विशेश लोक अदालक का आयोजन किया गया। विशेष लोक अदालत का शुभारंभ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया।

विशेष लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस प्रकरण) से संबंधित लंबित मामलों के निराकरण हेतु विशेष लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। दुर्ग जिले में कुल 15 खंडपीठ का गठन किया गया था, जिनके द्वारा कुल 1001 प्रकरण चिन्हांकित किए गए थे, जिनमें से कुल 449 मामले निराकृत किए गए तथा समझौता राशि 13,88,05,129 रही।
विशेष लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को आपसी समझौते एवं सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से विवादों का त्वरित, कम खर्चीला एवं स्थायी समाधान उपलब्ध कराना था। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की भावना के अनुरूप आयोजित इस विशेष लोक अदालत ने यह सिद्ध किया कि आपसी सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान न्याय प्राप्ति का सबसे प्रभावी एवं व्यवहारिक माध्यम है। इस विशेष लोक अदालत में अपेक्षित एवं उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए, जिसके पीछे जिला स्तर पर की गई सुनियोजित रणनीति, सतत समन्वय एवं व्यापक पूर्व तैयारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के लिए माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा राठौर एवं अंजली सिंह की एक विशेष टीम गठित की गई थी। उक्त टीम द्वारा संबंधित अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों से निरंतर संपर्क स्थापित करते हुए उन्हें आपसी संवाद एवं समझौते के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, प्रकरणवार सतत अनुश्रवण एवं समन्वय के माध्यम से अधिकाधिक मामलों के सौहार्दपूर्ण निराकरण हेतु अथक एवं सराहनीय प्रयास किए गए।
विशेष लोक अदालत की सफलता में मध्यस्थता केन्द्र, दुर्ग की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। मध्यस्थ न्यायाधीशों द्वारा अनेक प्रकरणों में पक्षकारों को धैर्यपूर्वक समझाइश देकर, संवाद की सकारात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आपसी सहमति का वातावरण निर्मित किया गया, जिसके फलस्वरूप अनेक मामलों में सफल समझौते संभव हो सके। मध्यस्थता केन्द्र की यह सक्रिय भूमिका विशेष लोक अदालत की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध हुई।
विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन में जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग का उल्लेखनीय सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता रही। अधिवक्ताओं द्वारा अपने-अपने पक्षकारों को आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित करते हुए प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। इसके अतिरिक्त, विभिन्न राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंकों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भी विशेष लोक अदालत में सकारात्मक सहयोग प्रदान करते हुए लंबित चेक अनादरण (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) प्रकरणों के सौहार्दपूर्ण निपटारे हेतु सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने इस विशेष लोक अदालत की सफलता में सहयोग प्रदान करने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थ न्यायाधीशों, न्यायालयीन कर्मचारियों एवं पक्षकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी इसी प्रकार आपसी समझौते एवं संवाद की भावना को बढ़ावा देकर न्याय को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाया जाता रहेगा।




