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नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल डेका

By Mohan Rao
Published: June 5, 2026
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समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया। राज्यपाल डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। जिस प्रकार वे राज्यपाल के रूप में प्रदेश की जनता के हितों के प्रति उत्तरदायी हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए और मरीज का हित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सक की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी अवसर है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधियां और सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है।

प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नया रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है, जिसमें 5 हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था होगी। यह परियोजना प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसके अतिरिक्त रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पतालों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हों, ताकि उन्हें उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है, जिससे लंबे समय तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तरवासियों के सहयोग से नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे, वहां अब ‘सेवा डेरा’ विकसित कर लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं तथा ‘अग्रणी बस्तर योजना’ के तहत अधिकारी गांवों में रुककर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा का सर्वोत्तम अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली के राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं दीक्षांत समारोह के अभिभाषक डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठातागण, प्राध्यापक, विद्यार्थी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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