महासमुंद। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना जिले के दो मासूम बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। इस योजना के माध्यम से बागबाहरा विकासखंड के दो छोटे बच्चे काव्या यादव उम्र 2 वर्ष और गुनीत बघेल उम्र 4 वर्ष को जन्मजात हृदय रोग से मुक्ति मिली और उन्हें नया जीवन मिला। यह शहरी चिरायु टीम की सजगता और तत्परता का परिणाम रहा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के निर्देशन में टीम लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी भ्रमण के दौरान चिकित्सक डॉ. सुजाता शुक्ला, डॉ. विकास चौहान और लैब तकनीशियन चन्द्रकला साहू ने दोनों बच्चों की जांच की। परीक्षण के दौरान बच्चों में असामान्य श्वसन दर, अत्यधिक थकान और कमजोरी जैसे लक्षण पाए गए, जिससे हृदय रोग की आशंका हुई।
चिरायु टीम ने बिना देरी किए दोनों बच्चों को उच्चस्तरीय जांच और उपचार के लिए रायपुर स्थित नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल रेफर किया। वहां कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जांचों के बाद सर्जरी की आवश्यकता बताई गई। नियत समय पर विशेषज्ञों की टीम द्वारा दोनों बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने के उपरांत अब दोनों बच्चे पूर्णतः स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बच्चों के स्वस्थ होने से उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। परिजनों ने इस कठिन समय में शासन की चिरायु योजना और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों के गंभीर रोगों की पहचान से लेकर जांच, दवाइयां, शल्य क्रिया एवं अस्पताल में भर्ती तक का पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया जाता है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सहारा है, जो समय पर बच्चों का उपचार कर नया जीवन देने का कार्य भी कर रही है।




