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धान के साथ वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ते धमतरी के किसान, रागी की खेती में बढ़ी भागीदारी

By Poonam Patel Published February 10, 2026
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धान के साथ वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ते धमतरी के किसान, रागी की खेती में बढ़ी भागीदारी
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धमतरी। धमतरी जिले में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पारंपरिक धान फसल के साथ-साथ अब किसान फसलचक्र परिवर्तन को अपनाते हुए दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। सरसों, चना, मक्का के साथ-साथ रागी (मंडुआ) की खेती में भी जिले में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह परिवर्तन न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण की दिशा में भी उपयोगी साबित हो रहा है।

जिले में वर्तमान रबी मौसम के दौरान दलहन फसलों के अंतर्गत चना, अरहर एवं मसूर की खेती की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में दलहन फसलें लगभग 18,450 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई हैं, जिनमें चना का क्षेत्रफल लगभग 14,200 हेक्टेयर, अरहर 2,150 हेक्टेयर एवं मसूर लगभग 2,100 हेक्टेयर है। वहीं तिलहन फसलों में सरसों प्रमुख रूप से किसानों द्वारा अपनाई जा रही है। जिले में तिलहन फसलें लगभग 9,600 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही हैं, जिनमें सरसों का रकबा 8,300 हेक्टेयर तथा अन्य तिलहन फसलें 1,300 हेक्टेयर में बोई गई हैं।

इसी कड़ी में मोटे अनाजों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिले में रागी फसल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। रागी कम लागत में अधिक पोषण देने वाली एवं कम पानी में तैयार होने वाली फसल है, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है। वर्तमान में धमतरी जिले में रागी फसल लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान रागी की खेती कर रहे हैं।

जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी (म) , भटगांव ,सिरकट्टा  आदि में रागी फसल की रोपाई का कार्य प्रगति पर है, जहां इस कार्य में महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेतों में रागी की रोपाई कर आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।

इस संबंध में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “धमतरी जिले में फसलचक्र परिवर्तन को प्रोत्साहित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। दलहन, तिलहन एवं रागी जैसी फसलों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पोषण सुरक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। रागी जैसी पोषक फसलों को अपनाने से जिले के किसान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे। महिला किसानों की भागीदारी जिले के लिए अत्यंत सराहनीय है।”

जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज उपलब्धता एवं योजनाओं का लाभ देकर वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में धमतरी जिले को दलहन-तिलहन एवं मोटे अनाज उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

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