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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी

By Om Prakash Verma Published November 18, 2025
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
दुर्ग नगर निगम के वाटर फिल्टर टैंक में एक शव तैरता मिला. सूचना पर लाश निकाली गई और उसका पोस्टमार्टम करवाया गया. चिकित्सकों की राय में शव लगभग तीन दिन पुराना था. इस फिल्टर टैंक का पानी 40-50 हजार लोगों तक पहुंचता है. अभी तक किसी के बीमार होने की खबर नहीं है. अलबत्ता किसी का धर्म भ्रष्ट हो गया हो तो पता नहीं. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन को बैठे-बिठाए मौका मिल गया है. उन्होंने महापौर समेत निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जिन घरों तक इस फिल्टर टैंक का पानी पहुंचता है, उन सभी की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की मांग की गई है ताकि उन्हें संभावित बीमारियों से बचाया जा सके. साथ ही महापौर से कहा है कि उन्हें जनता से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए. बहरहाल, राजनीति अपनी जगह है. पेयजल आपूर्ति को लेकर सतर्क रहना एक बड़ी जिम्मेदारी है. पेयजल स्रोत तक कोई भी व्यक्ति कभी भी मुंह उठाए चला जाए, ऐसा होने नहीं दिया जाना चाहिए. वैसे इस घटना से एक बात और याद आई. भिलाई नगर में कई स्थानों पर सीमेंट की ओवरहेड टंकियां बनी हुई हैं. इनमें से कुछ आरसीसी टंकियां जर्जर हालत में हैं. दो साल पहले इनमें से दो टंकियां धराशायी हो चुकी हैं. वैसे समय-समय पर संयंत्र ने खुद जर्जर पानी टंकियों को सुरक्षित ढंग से ढहाया है. पर असली समस्या कुछ और है. इन टंकियों पर ऊपर तक जाने की सीढ़ियां हैं. कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण शरारती तत्व इन टंकियों पर चढ़ जाते थे. कई बार ऐसे आरोप भी लगे कि शरारती तत्व इन टंकियों में मल-मूत्र का त्याग कर देते हैं. इसके बाद फौरी तौर पर सुरक्षा की आधी अधूरी व्यवस्था कर दी गई. दरअसल, जल स्रोतों की सुरक्षा को लेकर हमारी लापरवाही जगजाहिर है. नदी नालों, पोखरों के प्रति हमारा रवैया तो विश्व प्रसिद्ध है. पर जहां तक पेयजल आपूर्ति का सवाल है, इसके लिए कुछ नियम बने हुए हैं. अधिकांश शहरों में पानी का स्टोरेज अंडरग्राउंड होता है. यहां से पानी खींचकर ऊपर की टंकियों में चढ़ाया जाता है जहां से उसकी आपूर्ति घर-घर होती है. नियम है कि भूमिगत स्टोरेज की साल में कम से कम एक बार अच्छे से सफाई होनी चाहिए. इसी तरह ओवरहेड टंकियों की सफाई साल में कम से कम दो बार होनी चाहिए. पर अमूमन ऐसा होता नहीं है. सफाई का ठेका लेने वाली कंपनियां घोर लापरवाही बरतती हैं. इसके बाद आता है पानी का पाइपलाइन. भिलाई टाउनशिप के कई सेक्टरों में रंग बिरंगा पानी आता है. समय समय पर यह बात भी सामने आती रही है कि ड्रेनेज सिस्टम और वाटर सप्लाई सिस्टम में लीकेज के कारण ड्रेनेज का पानी सप्लाई के पानी में मिल जाता है. इन टंकियों का व्यापक इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए भी किया जा सकता है. इसलिए इन टंकियों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किया जाना जरूरी है.

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