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ऑपरेशन सिंदूर : 25 मिनट में भारतीय सेना ने तबाह किए पीओके व पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकाने

By Mohan Rao Published May 7, 2025
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सेना की प्रेस ब्रीफिंग
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सेना की ओर से की गई प्रेस ब्रीफिंग, बताया- रात 1.05 से 1.30 के बीच चला ‘ऑपरेशन सिंदूर’

नईदिल्ली। पहलगाम हमले का बदला लेने मंगलवार की देर रात भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। भारतीय सेना ने बदला लेते हुए पाकिस्तान के 9 सन्य ठिकानों पर मिसाइल दागे। पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक को लेकर बुधवार सुबह 10:30 बजे तीन अफसर मीडिया को ब्रीफ करने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले एयर स्ट्राइक का 2 मिनट का वीडियो प्ले किया गया। इसमें आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई दिखाई गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्मी की कर्नल सोफिया कुरैशी और एयरफोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमनें पाकिस्तानी सेना और आम लोगों को निशाना नहीं बनाया। ऑपरेशन सिंदूर देर रात 1 बजकर 5 मिनट से 1 बजकर 30 मिनट तक चलाया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मौजूदगी में देश की संसद पर हमले, मुंबई हमले, पुलवामा हमले और पहलगाम हमले के दृश्य भी दिखाए गए।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पहलगाम में आतंकी हमले में टीआरएफ के दहशतगर्दों ने जिस तरह से पर्यटकों की नृशंस हत्या की, उसके खिलाफ भारतीय सेना ने सख्त कार्रवाई की।  उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की तरफ से अपनाए जाने हथकंडों का जिक्र कर दहशतगर्दों के पनाहगाह पड़ोसी देश की पोल खोली। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकी हमले के दो हफ्ते बाद आतंकवादियों और आतंकी संरचनओं को ध्वस्त करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, रेजिस्टेंस फ्रंट नामक एक समूह ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली है। यह समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की पुष्टि हुई है।

पाकिस्तान के साथ आतंकवादियों के संपर्क उजागर : विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री
विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने कहा कि पाकिस्तान स्थित समूहों के लिए कवर के तौर पर टीआरएफ का इस्तेमाल किया गया। लश्कर जैसे संगठन टीआरएफ जैसे संगठन को इस्तेमाल कर रहे हैं। पहलगाम हमले की जांच से पाकिस्तान के साथ आतंकवादियों के संपर्क उजागर हुए हैं। TYRF के दावे और लश्कर से सोशल मीडिया पोस्ट इसे साबित करती है। हमलावरों की पहचान भी हुई है। इस हमले की रूपरेखा भारत में सीमापार आतंकवाद फैलाने के पाकिस्तान का प्लान उजागर हुआ है। पाकिस्तान आतंकवादियों की शरण स्थली के रूप में पहचान बना चुका है। विक्रम मिस्त्री ने कहा कि पहलगाम में हुए हमले से आक्रोश है। भारत सरकार ने पाकिस्तान से संबंधों को लेकर कुछ कदम उठाए। 22 अप्रैल के हमले के अपराधियों और इसकी प्लानिंग करने वालों को न्याय के कठघरे में लाना जरूरी था। वे इनकार करने और आरोप लगाने में ही लिप्त रहे हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों के बारे में हमें सूचना मिली थी कि वे और हमले कर सकते हैं। इन्हें रोकना जरूरी था।

नपी-तुली व जिम्मेदारी पूर्ण कार्रवाइ थी
हमने इन्हें रोकने के अधिकार का इस्तेमाल किया है। यह कार्रवाई नपी-तुली और जिम्मेदारीपूर्ण है। आतंकवाद के इन्फ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने और आतंकियों को अक्षम बनाने पर केंद्रित है। आतंकवाद के इस निंदनीय कार्य के आपराधियों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता UN ने भी जताई थी। मिस्त्री ने बताया कि पिछले एक दशक में 350 से अधिक भारतीय नागरिक सीमा पार से प्रेरित आतंकवाद का शिकार हो चुके हैं। 800 से अधिक लोग इन नृशंस हिंसक कृत्यों में घायल हुए हैं। इस दौरान 600 से जयादा जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई है, जबकि 1,400 से अधिक सुरक्षा कर्मी घायल हुए हैं।

पहलगाम में मारे गए निर्दोश पर्यटकों के लिए लॉन्च किया गया ऑपरेशन
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि पहलगाम में निर्दयता से जिन निर्दोष पर्यटकों को मारा गया, उस के लिए यह ऑपरेशन किया गया। पाकिस्तान में 3 दशकों से आतंकवादियों का निर्माण हो रहा है। हमले के बाद भी यह सामने आया है। हमने पाकिस्तान और पीओके में 9 टारगेट को चुना था और इन्हें हमने तबाह कर दिया। यहां पर लॉन्चपैड, ट्रेनिंग सेंटर्स टारगेट किए गए। हमने विश्वसनीय सूचनाओं और इंटेलिजेंस के आधार पर इन लक्ष्यों को चुना। ऑपरेशन के दौरान हमने यह निश्चित किया कि बेगुनाह लोगों और सिविलियंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान न पहुंचे। पीओके में सबसे पहले सवाई नाला मुजफ्फराबाद में था, यह लश्कर का ट्रेनिंग सेंटर था। सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम हमले के आतंकियों ने यहीं ट्रेनिंग ली। मुजफ्फराबाद के ही सैयदना बिलाल कैंप में आतंकियों को हथियार, विस्फोटक और जंगल सर्वाइवल की ट्रेनिंग दी जाती थी। गुरपुर के कोटली में लश्कर का कैंप था, यहां पुंछ में 2023 में श्रद्धालुओं पर हुए हमले के आतंकी ट्रेंड हुए थे।

पाकिस्तान में हमारा पहला टारगेट सियालकोट का सरजल कैंप
पाकिस्तान में हमारा पहला टारगेट सियालकोट का सरजल कैंप था। मार्च 2025 में पुलिस जवानों की हत्या करने वाले आतंकवादियों को यहीं ट्रेन किया गया था। सियालकोट के महमूना जाया कैंप में हिजबुल का बहुत बड़ा कैंप था। यह कठुआ में आतंकवाद का नियंत्रण केंद्र था। पठानकोट हमला यहीं प्लान किया गया। मरकद तैयबा मुरीदके में टेररिस्ट कैंप है। अजमल कसाब और डेविड कोलमैन हेडली यहीं ट्रेन हुए थे। मरकज सुभानअल्लाह भावलपुर जैश का हेडक्वार्टर था। यहां आतंकवादियों का रिक्रूटमेंट होता था, उन्हें ट्रेनिंग दी जाती थी। जैश के बड़े अफसर यहां आते थे। किसी तरह की नागरिक क्षति की रिपोर्ट नहीं है, हमने रिहायशी इलाकों को निशाना नहीं पहुंचाया है।

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