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भारतीय रेल और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिए लॉन्च की एसओपी

By Mohan Rao Published October 28, 2024
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भारतीय रेल व महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिए लॉन्च की एसओपी
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बच्चों के लिए रेल यात्रा को सुरक्षित और तस्करी मुक्त बनाने के भारतीय रेल की की पहल

रायपुर। देशभर में रेल परिसरों में पाए जाने वाले कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक पहल में, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से 25 अक्टूबर, 2024 को नई दिल्ली के रेल भवन में अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू की है। यह व्यापक एसओपी भारतीय रेल के संपर्क में आने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत ढांचे की रूपरेखा तैयार करती है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। महिलाओं और बच्चों के लिए रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने में भारतीय रेल के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने रेलवे को आश्वासन दिया है कि महिलाओं और बच्चों के लिए रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने के उसके प्रयासों में फंडिंग बाधा नहीं बनेगी।

मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने के दौरान, एमओडब्ल्यूसीडी के सचिव अनिल मलिक ने उन्नत रेल स्टेशनों पर सीसीटीवी और चेहरा पहचान तकनीक स्थापित करने जैसे उपायों के माध्यम से किशोरों की सुरक्षा बढ़ाने की पहल के लिए भारतीय रेल की सराहना की। प्रतिदिन 2.3 करोड़ से अधिक लोग रेल से यात्रा करते हैं, जिनमें 30 प्रतिशत महिलाएं भी शामिल हैं-जिनमें से कई अकेले यात्रा करती हैं – ऐसे में कमजोर समूहों, विशेष रूप से किशोरों की सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है, जो मानव तस्करों द्वारा शोषण का जोखिम उठाते हैं। कार्यक्रम में, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू) को मजबूत करने के महत्व पर एमओडब्ल्यूसीडी अधिकारियों को जानकारी दी और असम, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से तस्करी को रोकने और यात्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलवे स्टेशनों पर इन इकाइयों को स्थापित करने का आग्रह किया।

आरपीएफ ने पिछले पांच वर्षों में 57,564 बच्चों को तस्करी से बचाया
आरपीएफ यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सक्रिय भूमिका निभा रही है कि उसके परिसर का उपयोग मानव तस्करों द्वारा बच्चों को लाने- ले जाने को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाए। आरपीएफ ने पिछले पांच वर्षों में 57,564 बच्चों को तस्करी से बचाया है। इनमें 18,172 लड़कियां थीं। इसके अलावा बल ने यह सुनिश्चित किया कि इनमें से 80 प्रतिशत बच्चे अपने परिवारों से मिल जाएं। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’के तहत, आरपीएफ ने पूरे रेल नेटवर्क में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित पहलों की श्रृंखला शुरू की है। बाल तस्करी की निरंतर चुनौती को पहचानते हुए, आरपीएफ के “ऑपरेशन एएएचटी” ने 2022 से2,300 से अधिक बच्चों को बचाने और 674 तस्करों को पकड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि तस्करी और शोषण से निपटने के लिए आरपीएफ के अथक समर्पण को रेखांकित करती है।

262 स्टेशनों पर मानव तस्करी विरोधी इकाई
देशभर में कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिए देशभर के लगभग 262 स्टेशनों पर मानव तस्करी विरोधी इकाई-एएचटीयू स्थापित की जानी थी। लेकिन कुछ भारतीय राज्यों के सहयोग के अभाव के कारण वहां एएचटीयू स्थापित नहीं की  जा सकी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालयसचिवइस दिशा में त्वरित कदम के रूप में इन राज्यों को एक पत्र लिखने पर सहमत हुए। एमओडब्ल्यूसीडीसंबंधित राज्यों के रेल स्टेशनों में इस इकाई को स्थापित करने के लिए इन राज्य सरकारों और जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र लिखेगा ताकि रेलवे सुरक्षा बल के प्रयासों को और अधिक सफल बनाया जा सके।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन मेरी सहेली
ट्रेनों में यात्रा करने वाली अकेली महिलाओं की सुरक्षा के लिए रेल मंत्रालय “ऑपरेशन मेरी सहेली”चला रहा है। मानव तस्करी विरोधी गतिविधियों में आरपीएफ के योगदान की सराहना करते हुए, एमओडब्ल्यूसीडी सचिवने कहा कि हमारा मंत्रालय महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से परियोजनाओं के लिए भी धन खर्च करने के लिए तैयार है। भारत सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से पहल के कार्यान्वयन के लिए ‘निर्भया फंड’नामक समर्पित कोष की स्थापना की थी। महिलाओं के साथ होने वाले अपराध रोकने के लिए देशभर के स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे और फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाने के लिए निर्भया फंड से पैसा दिया जा सकता है।

बाल सहायता डेस्क (सीएचडी) के विस्तार की घोषणा
भारतीय रेल और महिलाए एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रमुख रेल स्टेशनों पर बाल सहायता डेस्क (सीएचडी) के विस्तार की घोषणा की, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध सहायता नेटवर्क को मजबूत किया जा सके। रेल परिसर में बच्चों और महिलाओं दोनों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए नई पहल और सहयोगात्मक रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। आरपीएफ के लिए जारी किए गए नए नारे, “हमारा मिशन: ट्रेनों में बाल तस्करी को रोकें”के साथ, भारतीय रेल ने सभी के लिए रेल को सुरक्षित यात्रा अनुभव बनाने की अपनी प्रतिज्ञा की पुष्टि की। मानव तस्करों से निपटने के दौरान पिछले एक दशक में मिली सीख से संशोधित एसओपी में योगदान मिला। अपने व्यापक रेल नेटवर्क में सुरक्षात्मक, दयालु वातावरण बनाने की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, आरपीएफ डीजी ने कहा कि भारत के बच्चों के कल्याण को ध्यान में रखना नई एसओपी के मूल में है।

बाल शोषण और तस्करी को रोकने भारतीय रेल प्रतिबद्ध
यह एसओपी उन जोखिम वाले बच्चों के लिए सुरक्षा जाल प्रदान करके बाल शोषण और तस्करी को रोकने की भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, जो अपने परिवारों से अलग हो सकते हैं। मूल रूप से किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम के तहत 2015 में शुरू की गई और 2021 में अद्यतन की गई इस एसओपी को अब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 2022 “मिशन वात्सल्य”के बाद और परिष्कृत किया गया है। इसमें बच्चों की पहचान, सहायता और उचित दस्तावेजीकरण करने के लिए रेल कर्मियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का विवरण दिया गया है जब तक कि वे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) से जुड़े हैं। आरपीएफमहानिदेशक मनोज यादव ने कहा कि हम रेल परिसर में बाल संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल देते हुए किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम के साथ निकटता से जुड़ रहे हैं। एसओपी लॉन्च कार्यक्रम में रेल बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ सतीश कुमार, एमओडब्ल्यूसीडी के सचिव अनिल मलिक, रेलबोर्ड के सदस्य संचालन और व्यवसाय विकास, रविंदर गोयल और दोनों मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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