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Gustakhi Maaf: सम्मान समारोह के प्रति बेजारी

By Om Prakash Verma
Published: April 1, 2024
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
देश में सम्मान समारोहों की बाढ़ आई हुई है। अधिकांश समारोह चीफ गेस्ट की जान पर बन आते हैं। बुजुर्ग मुख्य अतिथि को अपने कर कमलों से 50-100 लोगों को सम्मानित करना भारी पड़ता है। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथियों के हाथों को ‘कर कमलÓ ही कहा जाता है। बुजुर्गवार बीच-बीच में थक कर बैठ जाते हैं। पर उन्हें मजबूरी उन्हें दोबारा खड़ा कर देती है। इसलिए अब सम्मान समारोह का मुख्य अतिथि बनने का न्यौता लेकर जाने वालों से लोग पहले ही पूछ लेते हैं कि कितने लोगों का सम्मान करना है। यदि यह सूची लंबी हो तो वे टिप्स भी देते हैं। आयोजकों से कह देते हैं कि स्कूल-कॉलेज की भांति सम्मानित होने वालों को अलग से बैठाया जाए और उन्हें उसी क्रम में बुलाया जाए ताकि दो लोगों के मंच पर आने के बीच ज्यादा अंतराल न हो। कुछ आयोजक सर्टिफिकेट पर नाम भी नहीं लिखते। जो मंच पर आता है उसे एक कोरा हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट दे दिया जाता है जिसपर वह अपना नाम खुद भर सकता है। इससे सर्टिफिकेट ढूंढने और सही सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर उसकी अदला-बदली में लगने वाला वक्त भी बच जाता है। असली परेशानी तब शुरू होती है जब मंच पर एक से ज्यादा कद्दावर अतिथि होते हैं। मंच पर 4-5 अतिथि एक साथ खड़े होते हैं और उन्हें आपस में काम बांटना पड़ता है। जब एक सम्मान दे रहा होता है तो बाकी ताली बजाते हैं। यह सवाल आज इसलिए कि सोशल मीडिया पर फिर से एक फोटो वायरल हो रही है। यह फोटो पूर्व उप प्रधानमंत्री और अयोध्या राममंदिर आंदोलन के सूत्रधार रहे लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न सम्मान दिये जाने की है। वयोवृद्ध आडवाणी अब कहीं आने-जाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह सम्मान देने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके निवास पर पहुंची थीं। मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। सम्मान बैठे-बैठे नहीं दिया जाता इसलिए राष्ट्रपति खड़ी थीं। सम्मान देने का दायित्व भी उनका ही था। इसलिए प्रधानमंत्री बैठे रहे। बस फिर क्या था, मोदी जी सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए। लोगों ने इसकी खूब आलोचना की। कांग्रेस कहां यह मौका हाथ से जाने देती। कांग्रेस ने इसे मोदी का अहंकार और भाजपा का गुरूर बताया। इसे इमोशनल टच देने के लिए राष्ट्रपति के आदिवासी महिला होने का जिक्र भी किया। वैसे तो राष्ट्रपति केवल राष्ट्रपति होता है पर चूंकि भाजपा ने आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाने का श्रेय लिया था इसलिए यह जिक्र भी शायद जरूरी हो गया था। दरअसल, इसी को मल्टिपल चीफ गेस्ट फैक्टर कहा जाता है। जब मंच पर एक से ज्यादा वीआईपी होते हैं तो ऐसी स्थिति बन ही जाती है। एक देता है, एक लेता है, बाकी सब खड़े होकर यही सोचते रह जाते हैं कि अपने हाथों का वो क्या करें। कोई लगातार ताली बजाता रहता है तो कुछ लोग हथेलियां रगड़ रहे होते हैं।

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